किसै नै चाहिए हो तो बता दियो, कदै बाद म्ह उल्हाणा दयो 😂
1 साल चाल्या 2017 का कैलेंडर, 70 का लिया था 30 म्ह दे दूगा
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किसै नै चाहिए हो तो बता दियो, कदै बाद म्ह उल्हाणा दयो 😂
1 साल चाल्या 2017 का कैलेंडर, 70 का लिया था 30 म्ह दे दूगा
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पत्नियों के बल्ड परैशर का सर्तिया इलाज …
हाई हो रया तो फोन लगा कै उसकी माँ तै बात करा द्यो ,
लो हो रया हो तो अपणी माँ तै … 😎
आजमा कै देखो , थै़क्यू बोलोगे …
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टीचर :- अपनी माँ की तारीफ मैं एक ऐस्से लिखो ,
छात्र :- सर दुनिया मैं वा स्याई ना बणी जो मेरी माँ के गुण लिख सकै …
टीचर :- ओह … तो बेट्टा बाब्बू के बारे मैं लिख दे कुछ ,
छात्र :- सर जी वा कागज इ ना है सृष्टी मैं जिसपै मेरे बाब्बू की महानता लिखी जा सकै …
मास्टर जी की आंख्यां मैं पाणी आ गया छोरे तै गले लाकै बोल्या :- वाह रै महान आत्मा मनैं गर्व है तेरे पै … बड़ा हो कै के बणैंगा …
महान आत्मा बोल्या :- जी मास्टर जी बड़ा होकै नेता बणूंगा अर बिना कुछ करे धरे न्युए बड़ी बड़ी बात करकै लोगां का फद्दू बणाउंगा अर ऐश करुंगा ..
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न्यू कवैं अक वक्त एक बार खुद को दोहराता है …
हे भगवान … इसका मतलब वा फेर आवैगी मेरी जिंदगी मैं …
पिज्जा खुआदे … नंवी मूवी आरी देखण चाल्लै के टिकट के पीसे लेरी मैं … या सूट देखिए किसाक लागै है मेरै मन्नै तो ना जचया
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किसी हरियाणवी तै कदे उल्टा सवाल ना करणा चइए …
मैडिकल स्टोर पै जाकै एक हरियाणवी बोल्या :- भाई मुस्से मारण की दवाई दिए …
स्टोर आला :- घर ले जाओगे … ?
हरियाणवी :- ना गैल ले कै आ रया हूं आढ़िए खुआदे … अर मेरे तंइ चाय बोलदे जाड्डा हो रया है घणा ..
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दो आदमियों की बीवीयाँ मेले में खो गईं।
:
जिसमे से एक हरियाणा से था, और एक दिल्ली से।
:
अपनी – अपनी बीवी ढूंढते हुए वो आपस में मिले।
:
हरियाणा वाले ने दिल्ली वाले से पूछा..? तुम्हारी बीवी की पहचान क्या है..?
:
दिल्ली वाला बोला -> कद 5’7″, गोरी, भूरी आँखें और पतली है, स्लीवलेस पिंक टी-शर्ट और लाल मिनी स्कर्ट पहने है।
:
तुम्हारी बीवी की क्या पहचान है..?
:
हरियाणा वाला -> मेरे आली कै मार गोली, चाल तेरे वाली को ढूंढते है।
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छोरी किसी की बाइक पै पाच्छै बैठ कै जावै थी , उसकी मां नै देख लिआ … फोन करकै पुछण लागी … कित सै तूं …
छोरी बोली मां पेपर देण आरी हूं ,
मां नै प्यार तै समझाया … देख बेट्टी जे इन पेपरां का रिजल्ट आ गया तो टांग तोड़ दूंगी तेरी , याद राखिए …
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पति बैडरूम मैं बैठ्या था लुगाई झाड़ू मारण आगी बोल्ली थोड़ा सरकिओ …
पति ड्राईंग रूम मैं आकै बैठ ग्या झाड़ू लेकै वंहा बी पोंहचगी … थोड़ा सरकिओ …
पति आंगण मैं चल्या गया … थोड़ी हाण पाच्छै औढ़ै बी … थोड़ा सरकिओ …
पति घर तै बाहर लिक्ड़ ग्या , पांच घंटे बाद लुगाई तै फोन आया … मैं चंडिगढ़ सत्तरां सैक्टर बस अड्डे पै हूं और सरकूं के
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एक सात साल का छोरा अपणी माँ तै बुज्झण लाग्या … एरी माँ तूँ मन्नैं कित तै ल्याई थी ,
माँ बोली बेट्टा मन्नैं एक गत्ते के डब्बे मैं थोड़ा गुड़ अर पाणी गेर कै रख दिया … चार दिन बाद मन्नैं डब्बे मैं तूं पाया अर तूं मेरी औलाद बण ग्या ,
छोरे नै बी न्युए करी फेर चार दन बाद डब्बा खोल कै देख्या भित्तर एक कॉकरोच हांडै था … छोरा छौ मैं आकै बोल्या … साले जी तो करै तन्नैं ईबी चप्पल मार कै मार द्यूं , पर के करूं औलाद है तूं मेरी …
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माँ का जन्मदिन है आज …
उस्नैं तो याद बी ना था … मन्नैं सोच्ची अक अपणी भोली माँ तै सरप्राइज द्युंगा आज … घरां जाकै सारे घरके कट्ठे कर लिए अर माँ तै बोल्या :- हैप्पी बर्थडे माँ … या केक पै मोमबत्ती जलाऊं हूं आप मोमबतियां कै फूंक मार कै केक काटो … अर और के गिफ्ट चइए आपनै …
माँ बोली :- रै तूं इस केक पै धर कै अपणा मोबाइल फूंक दे याए मेरा गिफ्ट सै ,
सबके स्यामी मेरा हैप्पी बर्डे कर दिया … खैर माँ तो माँ होती है
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पूनम : कोई आवाज दे है बाहर गेट पै , देखियो ।
अनिल : कौण है ?
पूनम : मैं ना पिछाणती
अनिल : अच्छा , रुकण की कह , मैं आऊं हुँ बाहर नै ।
एक तै इस घर मैं कुछ मिलता नी बख्त पै , मेरी घड़ी कित गई इब ?
किसे काम की नहीं या लुगाई , कोय चीज ठिकाणे पै नी पाती , बेरा ना के करती रह है सारे दिन बैठ्ठी बैठ्ठी ।
किस्मत फूट गी मेरी जो या पल्लै पड़ी ।
पूनम : तू पहल्या कोस ले अपणी किस्मत नै जी भर कै, तन्नै तो ज्युकर जीवन सफल कर दिया मेरा , तन्नै पा कै तो सारी इच्छा पूरी होगी मेरी ।
मौका मिलते ए जहर काढण लाग ज्या अपणा , कदे मिठास भी आया है इस जबान पै मेरे नाम का ??
इतणे मैं दुबारा किवाड़ खुड़कै है …..
अनिल : आऊं हूँ , आऊं हूँ , शांति राख ।
“नारंगी पीला सूट पहरे एक सुथरा सा चेहरा, जमीन मैं नजर ग़ाड्डे खड़ा था ।
ज्युकर कुछ छिन ग्या हो उसका”
अनिल : जी बोलो ,
पिछाणे नी आप !!
“उसकी आंख ईब भी जमीन पै थी, ज्युकर कुछ
उकेरणा चाहती हो, उस संगमरमर के धोले फर्श पै ।”
ब्होत हिम्मत जुटा कै वा उप्पर लखाई ।
अनिल : सुमन तू !!
“इस बोल के पाछै जो सन्नाटा ब्यखरा , उसकी चीख मैं , वे सारे ‘घा’ जो भर कै , नई खाल मैं ढल गे थे, एक बार फेर हरे हो गे ।”
” वो घर का गेट एक सीमा रेखा मैं बदलग्या ।”
“एक पासै रिवाजां की रस्सी तै गांठ मार कै गला घोंटी होई गृहस्थी थी और दूसरे पासै बख्त अर झूठे अहंकार की मार खाया होया प्यार।”
“बसी होई गृहस्थी मैं अलगाव का विलाप था अर उजड़े होए , दीमक के खाए होए प्यार मैं सुकून।”
“करुणा तै एक जीसी थी दोनूं पासै , बस बख्त सही ना था।”
“दिल के स्वार्थ नै गृहस्थी के किवाड़ लात मार कै बंद कर दिए थे ।”
अहमद फ़राज़ साहब की ग़ज़ल का यो शेर ब्होत सही लागै है आडै :
” रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ …
तू फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ “
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मैथ टीचर ने एक बच्चे से सवाल पूछा :- मान लो तुम्हारी भैंस ने दूध नही दिया और तुम्हे घर आए मेहमानों को चाय पिलानी है तो क्या करोगे … ?
बच्चा बोला … जी बजार से दूध ले आंउगा …
टीचर ( मुस्कुराते हुए ) :- वैरी गुड , अच्छा मान लो घर की भैंस का दूध पड़ता है बियालिस रुपये किलो , और बजार से मिलता है साड्डे बावन रुपये किलो … तुमने दूध लिया डेढ़ पाव , और दूध वाले नें उसमें पैंसठ ग्राम पानी मिला रखा था … तो बताओ तुम्हे कुल कितना नुक्सान हुआ … ?
जवाब ना देने पर मास्टर ने उस बच्चे को धूप में मुर्गा बना दिया …
अब दूसरे छात्र से वही सवाल पूछा …
छात्र बोला जी अपणे ताऊ के घर तै दूध लिआऊंगा …
टीचर बोला :- मान लो उनके घर भी दूध नही है तो …
छात्र :- जी पड़ोस आली चाची तै दूध मांग लूंगा …
टीचर चिढ़ के :- अगर उनके घर भी ना मिला तो …
छात्र :- मास्टर जी सारे गाम मैं हांड जाउंगा दूध मांगण खातर , ना मिलया तो मेहमाना तै नींबू पाणी प्या दूंगा … पर बजार तै मोल कोनी ल्यांऊ … मन्नैं धूप मैं मुर्गा ना बणना ..
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एक बरात किराए पै लिए हवाई जाहज मैं मुम्बई जा थी …
एलियनस नै वा जाहज हाईजैक करकै प्लूटो ग्रह पै रख दिया …
जंहा जाड्डे का राज … माइनस साढे चार सौ डिगरी पै राज कर रया … कोए जीव तो के घास बी ना उगण दे था अगला …
औढ़े जहाज तै उतर कै स्लिवलैस सूट पैहरी छोरियां रुक्के देण लाग्गी … कम ऑन गर्लस लैटस डांस .. पर या डी जे कित सै …
जाड्डा बोरिया बिस्तर बांध कै राम जी धौरै चल्या गया बोल्या … प्रभू मेरा इस्तिफा स्वीकार करिए अब मेरे अंदर वो पहले जैसी बात नही रही …
राम जी बोल्ले … भाई तूं ड्युटी कर अपणी … ये छोरी हरियाणे की हैं इनका जाड्डा कुछ ना बिगाड़ सकता ये वरदान मेराए दिया होड़ सै
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आदमी ए आदमी का काटै इब रस्ता …
बिल्ली मेरे शहर की सब ठाली बैठी सैं ,
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एक मैडम नै घणी वार सब्जी आले गैल्यां तुंतुं मैंमैं करी फेर उसके धौरै खड़े होकै एक सैल्फी लेकै फेसबुक पै पोस्ट करदी …
Fighting with सब्जीवाला ,
Feeling …. छौ ,
He is too much लुटेरा ,
Never purchase सब्जी from this डाकू ,
Every body पिछान लो ..
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देश बदल रहा है गुजरात चुनाव दो घंटे म्ह 11% वोटिंग ~
दुल्हा – दुल्हन नै भी पहल्यां वोट का अधिकार जरुरी समझा, शादी की रस्म बाद म्ह
वहीं 98 साल का बुजुर्ग भी जाड्डा म्ह शुरू कै एक घंटे म्ह बोट डाल कै घर जा लिया
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