इंटरयू देण गया था इधर उधर के सवाल करकै वा बोल्या :- तो आपकी कोई कमजोरी भी है तो बताओ …

मखा जी मेरै पैग लाग रहा हो अर मेरे को कोए गंवार कैह दे तो मैं उसको साला बावली बूच बोल देता हूं जी …

बोल्या … ओह ये तो तुम सचमुच गंवारो वाली हरकत करते हो ,

मखा ओ साले बावली बूच अपणी लिमट मैं रै लिए …

फेर बेरा ना के होया सालेयां नै मेरा मुंह सूंघ सूंघ छेत्या मैं

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गाजर का हलवा बनाने के लिए महिलाएँ 1200 रू/किलो काजू
800 रू/किलो बादाम और ड्राई फ्रूट और 700 रुपये किलो देसी घी सब खरीद लेंगी.
लेकिन गाजर जब तक दस रूपये की डेढ़ किलो ना हो जाये
तब तक हलवा बनाने का प्रोग्राम पेंडिंग ही रखती हैं

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एक बार ताऊ फिल्म देखण गया, फिल्म का नाम था बॉबी, अर गाणा चाल रया था, “मैं मायके चली जाऊंगी”।

Dimple: मैं मायके चली जाऊंगी, तुम देखते रहियो।

ताऊ: न्यू क्यूकर चली ज्यागी, यो तेरी टांग ने तोड़ देगा।

Rishi Kapoor: मैं दूजा ब्याह रचाउंगा

ताऊ: येह्ह्ह्ह बात .. छोरे ने कट्या रोग

Dimple: मैं कुवें में गिर जाउंगी।

ताऊ: छोरे बहकाए में मत आ ज्याइये .. पाखण्ड कर रिह सै।

Rishi Kapoor: मैं रस्सी से खिंचवाऊंगा।

ताऊ: अरे क्या ने खिंचवावे सै….. आगे फेर सेधेगी।

Dimple: मैं पेड़ पर चढ़ जाउंगी।

ताऊ: टंगी रहन्दे सासु की नै।

Rishi Kapoor: मैं आरी से कटवाऊंगा

ताऊ: अरे तू भी मैंने तो किमे नकली सा ए लाग्या… खामखाँ अपनी बुआ नै सिर पै चढ़ा रया सै।

Dimple: मैं मायके नहीं जाउंगी, मैं मायके नहीं जाउंगी।

ताऊ: तावलिये होश ठिकाणे आगे

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छोरा दिल्ली आली छोरी तै :- यू लव मी ना … 😎

छोरी :- नो … 😗

छोरा :- प्लीईईईज बोल दे ना यू लव मी … 😍

छोरी :- आई से नो मीन्स नो … 😗

छोरा :- देख ले भाई तै नाट्टै है … ओ तेरी बेब्बे कै थु थु थु … सोरी सोरी

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भीड़ ते खचा खच भरी होई मैट्रो,
मैं आराम तै खड्या जबे राजीव चौक पै,
दरवाजा सज्जे हाथ ने खुला अर मेरा
ध्यान दरवाजा की तरफ गया
एक 5’7 लांबी छोरी , पिला सूट मड़कन आली जुत्ती ,
आँख्या में शयाई घाल ली, सर पै चुन्नी अर
जब वा चाले तो हवा जब उसके काना धौरे
को गुजरे तो हवा मैं उड़ते उसके बाल ,
नाक में एक छोटा सा कोका, चहरे की एक
साइड उसके डिंपल पड़े अर ठोड़ी आला तिल
उसके गुल्लक से मुह की सुंदरता में 4 चाँद लागण लाग रह्या, अर बेरण जमा टिकाई तै पैर धरदी
होइ आवे अर मैं अपनी दिल की धड़कण
रोक के उसकी तरफ देखण लाग रह्या ,
वा मेरी तरफ़ आगे बढ़ी और भोली सी सकल बनाके
मेरी आँख्या में देख के अपना डिंपल
दिखा के एक घणी प्यारी मुस्कान देके बोली
” आप तो एडमिन हो ना” 😍😍
मेरा साँस ऊपर की ऊपर रह गया
मखा कोये छोरी हमने भी जाणे है 😊
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अरे भाई रेस मारण चलेगा के ?
बेरा नी मैरी सासू का कोणसा था
सारा सपना की इसी तीसी कर गया 😕😑
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चलो कोई नहीँ
तडके तड़क की राम राम सबने

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ब्याह आले घर मैं घणखरे रिस्तेदार रात नै छत पै सोवैं थे … एक दारु पीया छौरा अपने दोस्त गैल्यां एक खाट पै सोवै था … उसके तलब उठ्ठी वा बीडी़ लेण निच्चै गया … पाच्छे तै उसका दोस्त उठया अर मूतन चल्या गया …।

इतनै छौरे की बुआ आई अर खाट खाली देख कै उसपै सौगी … छौरा मांग तांग कै बीड़ी पी कै आया अर अन्धेरे मैं दोस्त समझ कै उसपै जम्प मार दी … बुआ नै उठ कै छौरे का झलूस काढ दिआ …।।

अगली रात फेर वा छौरा न्यूए बीडी़ पी कै आया अर रुक्का दे कै बोल्या …. अपणी अपणी खाट पै हो ल्यो भई सारे … नातै फेर बूआ बरगा मूँ बणाओगे

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हा हा बिघन होग्या!!
जडै मै खडया हूं उसके स्यामी कुर्सी तलै
एक 100 का नोट पड्या है!!
एक छोरी नै भी देख लिया ओ नोट!!
इब शर्म म ना वा ठा री अर ना मै

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प्लस टू का रिजल्ट आया …

बाब्बू गब्बर … छोरा कूण मैं खड़या

बाब्बू … कितने पेपर थे … टूंऊंऊंऊंऊं ( बैकग्रांउड सांउड )

छोरा … बाब्बू घणे थे …

… कितनैयां मैं फैल होया … टूंऊंऊंऊं

…. बाब्बू सप्ली आरी हैं

… याके सौदा है रै , पास होया …

… हां बाब्बू … ना बाब्बू … वा बाब्बू वा तो बाब्बू कलियर कर दयुंगा

… सुसरे सिधा पास क्यों ना होया अर फेर बी उल्टा आ ग्या खाली दमाग … अरे ओ भीरे की माँ कितना खरच होया इसपै इस साल … टूंऊंऊंऊं

… जी पूरे पैंतिस हजार

… सुण्या तन्नैं पूउउरे पैंतिस हजार अर या पैंतिस हजार ज्यांतै अक मेरा बेट्टा आई ए ऐस बणैगा मेरा नाम करैगा … अर तन्नैं मेरा नाम मिट्टी मैं मिला दिया … अब तेरा क्या होगा भीरे … टूंऊंऊंऊं

… बाब्बू न्यू तो खड़के का रामा भी फैल हो ग्या , बिंदर का लिल्लू बी फैल हो ग्या , रामधारी का गुल्लू बी फैल हो ग्या , बीरपाल का …

… आच्छया रै या बात है के चल फेर बरफ लिकाड़ कै ल्या फरीज मैं तै पैग लाण का टैम हो रया

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जाट…… दिल्ली चला गया
रेलवे स्टेशन पै अखबार वाले से bola
एक अखबार देना…
.
.
अखबार वाला-हिन्दी या अंग्रेजी ka
.
.जाट ….. भाई कोईसा दे दे
मने तो रोटी लपेटनी है|

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आजकल के बालक पेपरां मैं नंबर कम आए पाच्छै घर छौड़ कै भाज ज्यां हैं …

अरै बालको या के बुजदिलां आली हरकत करो हो …

अरै मूरखो म्हारे टैम मैं तो नंबर म्हारे कम आया करते अर स्कूल छौड़ कै मास्टर जी भाज जा था … अक ईब समाज मैं के मुंह दिखाउंगा …

अर म्हारा आठवीं आला मास्टर तो म्हारे रिजल्ट आए पाच्छै पकड़या गया था …

आत्महत्या का परयास करदा

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भगतो आज का ज्ञान … भुगतो ..
छोरियां की आधी जवानी ऐक्चुअली , लिटरली , सिरियसली करते लिकड़ जाहै
.
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अर छोरेयां की मेरली , तेरली करते .

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बैंक खाते आधार तै लिंक करो …
रुक्के देंदा रै गया नरेंद्र मोदी ,
बैंक अफसरां तै लिंक करकै …
पीसे लेकै भाज गया नीरव मोदी ,

मोदी महिमा अपरम्पार …
एक मोदी चौकिदार … दो चोरी करकै फरार ,
ललित , नीरव दोनूं यार …
माल्या का बी बेड़ापार ,
गरिबो क्यां का झगड़ा … क्यां की तकरार ,

अबकी बार बी आण द्यो मोदी सरकार ,
देस मैं ना रैहण देणे ये चोर …
बचे होए बी भजा दयांगे बाहर ..

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पद्मावती मूवी का नाम पद्मावत करके रीलीज करने की तैयारी …

अर यंहा करनी सेना वाले भी अपणा नाम बदल कै करण सेणा रखण की सोचरे हैं ,

तूम डाल डाल … हम पात पात ..

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बुलेट ट्रेन तो उन देशों के लिए बनी है जहां समय की कमी हो।
हमारे देश मे तो अगर कहीं JCB लगी हो तो आधा गांव उसे देखने चला जाता है।
ड्राइवर बैक कर रहा हो तो 15 आदमी ‘आण दे आण दे’ में लगे रहते हैं।

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पूनम : कोई आवाज दे है बाहर गेट पै , देखियो ।
अनिल : कौण है ?
पूनम : मैं ना पिछाणती
अनिल : अच्छा , रुकण की कह , मैं आऊं हुँ बाहर नै ।
एक तै इस घर मैं कुछ मिलता नी बख्त पै , मेरी घड़ी कित गई इब ?
किसे काम की नहीं या लुगाई , कोय चीज ठिकाणे पै नी पाती , बेरा ना के करती रह है सारे दिन बैठ्ठी बैठ्ठी ।
किस्मत फूट गी मेरी जो या पल्लै पड़ी ।
पूनम : तू पहल्या कोस ले अपणी किस्मत नै जी भर कै, तन्नै तो ज्युकर जीवन सफल कर दिया मेरा , तन्नै पा कै तो सारी इच्छा पूरी होगी मेरी ।
मौका मिलते ए जहर काढण लाग ज्या अपणा , कदे मिठास भी आया है इस जबान पै मेरे नाम का ??
इतणे मैं दुबारा किवाड़ खुड़कै है …..
अनिल : आऊं हूँ , आऊं हूँ , शांति राख ।
“नारंगी पीला सूट पहरे एक सुथरा सा चेहरा, जमीन मैं नजर ग़ाड्डे खड़ा था ।
ज्युकर कुछ छिन ग्या हो उसका”
अनिल : जी बोलो ,
पिछाणे नी आप !!
“उसकी आंख ईब भी जमीन पै थी, ज्युकर कुछ
उकेरणा चाहती हो, उस संगमरमर के धोले फर्श पै ।”
ब्होत हिम्मत जुटा कै वा उप्पर लखाई ।
अनिल : सुमन तू !!
“इस बोल के पाछै जो सन्नाटा ब्यखरा , उसकी चीख मैं , वे सारे ‘घा’ जो भर कै , नई खाल मैं ढल गे थे, एक बार फेर हरे हो गे ।”
” वो घर का गेट एक सीमा रेखा मैं बदलग्या ।”
“एक पासै रिवाजां की रस्सी तै गांठ मार कै गला घोंटी होई गृहस्थी थी और दूसरे पासै बख्त अर झूठे अहंकार की मार खाया होया प्यार।”
“बसी होई गृहस्थी मैं अलगाव का विलाप था अर उजड़े होए , दीमक के खाए होए प्यार मैं सुकून।”
“करुणा तै एक जीसी थी दोनूं पासै , बस बख्त सही ना था।”
“दिल के स्वार्थ नै गृहस्थी के किवाड़ लात मार कै बंद कर दिए थे ।”
अहमद फ़राज़ साहब की ग़ज़ल का यो शेर ब्होत सही लागै है आडै :
” रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ …
तू फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ “

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जुल्मी चाचा …

पड़ोस आली भाब्भी की छोटी बेब्बे आरी है … छत्त पै चक्कर मारण लाग ग्या मैं … चाचा बोल्या रै उपर के करण जाए करै …

मखा चाच्चू टाटा स्काई सैट करण जाऊं था …

बोल्या … ड्रैसिंग सैंस सुधार ले कुरते पजामे पै टाई लाए तै टाटा स्काई सैट ना होए करदी …

Me … Crying in a कूण ..

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