एक भइया डाक्टर धौरै जाकै बोल्या ::- एजी डाक्टर जी सुनिए ना … हमको ना बइठे बइठे भी सांस चढ़ जाता है ऐसा काहे … बोलिए ना … डाक्टर जी …
डाक्टर ::- तो सुसरे किसी की गोद मैं धार लेण नै बैठ्या करै … खड़या हो स्यामी मेज पै बैठ

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जै कोई दस बजे उठै तो
जरूरी ना स की आलसी ए हो
हो सकै है आगला के सपने बड़े हों

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पंजाब नैशनल बैंक गया था … मन्नै पूछ लिया :- भाई या अठ्ठनी का पैन रस्सी गैल्यां क्यांतै बांध राख्या ,

सिकोरटी गार्ड बंदूक पै हाथ फेरदा बोल्या :- भाई लोग पैन चोरी कर ले ज्यां हैं ज्यांतै ,

मैं :- 😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂

गार्ड :- 😏😏😬😬😩😩😢😢😭😭

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न्यू कवैं अक वक्त एक बार खुद को दोहराता है …
हे भगवान … इसका मतलब वा फेर आवैगी मेरी जिंदगी मैं …
पिज्जा खुआदे … नंवी मूवी आरी देखण चाल्लै के टिकट के पीसे लेरी मैं … या सूट देखिए किसाक लागै है मेरै मन्नै तो ना जचया

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म्हारे ताऊ नै चाला कर राख्या आज तो ,

न्यू कवै पांया कान्नि तै जाड्डा चढ़ै …

धोती गैंल्यां अपणै पोते के स्पोर्ट शूज पैहरे हांड रया गाम मैं … अर पोता उसकी जुत्ती पैहर के किरकट खेलण जा रया है …

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मन्नै आशकी मैं बारां लाइन की शायरी पेली थी ,
तन्नै hmmm जवाब देकै जणो गोब्बर कर दिया .

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एक बाबा दस साल तै हिमालय पै था …
एक पत्रकार उसका इंटरव्यू लेंदा बुझण लाग्या :- महाराज आप इतनी ठंड में कैसे रह लेते हो ?

महाराज नैं जवाब दिया :- बस जी तपस्या और चाय मुझे ठंड से बचाते हैं … आप क्या पसंद करेंगे तपस्या यां चाय ?

पत्रकार बोल्या ;- जी चाय …

बाबा नैं रुक्का दिया :- ए तपस्या सुणैं है या बाऊजी खात्तर चाय बणा लिया ..

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रिक्शावाले की लड़की नैं आईएएस करके किया पिता का नाम रोशन …

रिक्शावाले का लड़का हुआ नासा के लिए सिलैक्ट …

रिक्शावाले के दोनों बच्चे आई पी ऐस अधिकारी बनें … किया राज्य का नाम रोशन …

ये सब खबर फेसबुक पै देख कै मैं बाब्बु तै बोल्या :- के धरया पापा इस पुलिस की नौकरी मैं रिक्शा चलाले नैं …

भाई भित्तरले स्टोररूम मैं मूंद राख्या मैं … मेरी टोटल बॉडी मसाज करके … अर सुण ल्यो रैय जिसका बाब्बु पुलिस मैं है वो अपने बाब्बु स्यामी या सलाह कदे मत ले कै जइओ … उसनैं न्यु बेरा होए करै अक क्युकर बक्कल तारे करैं … 😢😬😭😭

हां बाकी भाई ट्राई करकै देख ल्यो … जे थारा बाब्बु मान ग्या तो जिंदगी सैट हो जागी …

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जंगल मैं एक शेर खड्डे मैं फंस ग्या … उपर पेड़ पै बैठ्या बांदर मजाक उड़ान लागया :- क्यों राजा साब ले रया जी सा … खत्म ईब राज पाठ तेरा , इब तो किसी शिकारी के घर खाल टंगी पावैगी प्रधान तेरी … आंख मतना काड्डै साले फोड़ दयुंगा डला मारकै …
जब्बे पेड़ की डाल टूटगी अर बांदर बी उसे खड्डे मैं गिर गया … बचारे के छक्के छूटगे , पड़दाए शेर के पाँ पकड़ कै बोल्या :- माहराज उपर पेड़ पै तो किसी शैतान का साया है समझ आंदे इ मैं तो माफी मांगण कूद पड़या … माँ की सूँ ले .

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पत्नी :- मैं तो मेरे भाई के बहरे पण नैं डोब दी ना तूं मेरे पल्ले ना पड़दा … 😗

पति ( मजे लेंदा होया ) :- उसी मेरे साले नैं तो म्हारा रिस्ता कराया था … अर तूं तो कह्या करै अक वा तन्नैं घणा प्यार करै था तेरी सारी फरमैश पूरी करया करदा … 😎

पत्नी :- हां ठीक कहूं थी … पर एकबै मैं गाणा गांऊ थी …
भइया मेरे राखी के बंधन को निभाना
अर उस बहरे नैं सुण लिआ …
भइया मेरे राखी पे बंदर को ले आणा …

फेर वा तन्नैं पसंद कर ल्याया मेरी खात्तर ..

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पूनम : कोई आवाज दे है बाहर गेट पै , देखियो ।
अनिल : कौण है ?
पूनम : मैं ना पिछाणती
अनिल : अच्छा , रुकण की कह , मैं आऊं हुँ बाहर नै ।
एक तै इस घर मैं कुछ मिलता नी बख्त पै , मेरी घड़ी कित गई इब ?
किसे काम की नहीं या लुगाई , कोय चीज ठिकाणे पै नी पाती , बेरा ना के करती रह है सारे दिन बैठ्ठी बैठ्ठी ।
किस्मत फूट गी मेरी जो या पल्लै पड़ी ।
पूनम : तू पहल्या कोस ले अपणी किस्मत नै जी भर कै, तन्नै तो ज्युकर जीवन सफल कर दिया मेरा , तन्नै पा कै तो सारी इच्छा पूरी होगी मेरी ।
मौका मिलते ए जहर काढण लाग ज्या अपणा , कदे मिठास भी आया है इस जबान पै मेरे नाम का ??
इतणे मैं दुबारा किवाड़ खुड़कै है …..
अनिल : आऊं हूँ , आऊं हूँ , शांति राख ।
“नारंगी पीला सूट पहरे एक सुथरा सा चेहरा, जमीन मैं नजर ग़ाड्डे खड़ा था ।
ज्युकर कुछ छिन ग्या हो उसका”
अनिल : जी बोलो ,
पिछाणे नी आप !!
“उसकी आंख ईब भी जमीन पै थी, ज्युकर कुछ
उकेरणा चाहती हो, उस संगमरमर के धोले फर्श पै ।”
ब्होत हिम्मत जुटा कै वा उप्पर लखाई ।
अनिल : सुमन तू !!
“इस बोल के पाछै जो सन्नाटा ब्यखरा , उसकी चीख मैं , वे सारे ‘घा’ जो भर कै , नई खाल मैं ढल गे थे, एक बार फेर हरे हो गे ।”
” वो घर का गेट एक सीमा रेखा मैं बदलग्या ।”
“एक पासै रिवाजां की रस्सी तै गांठ मार कै गला घोंटी होई गृहस्थी थी और दूसरे पासै बख्त अर झूठे अहंकार की मार खाया होया प्यार।”
“बसी होई गृहस्थी मैं अलगाव का विलाप था अर उजड़े होए , दीमक के खाए होए प्यार मैं सुकून।”
“करुणा तै एक जीसी थी दोनूं पासै , बस बख्त सही ना था।”
“दिल के स्वार्थ नै गृहस्थी के किवाड़ लात मार कै बंद कर दिए थे ।”
अहमद फ़राज़ साहब की ग़ज़ल का यो शेर ब्होत सही लागै है आडै :
” रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ …
तू फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ “

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दो आदमियों की बीवीयाँ मेले में खो गईं।
:
जिसमे से एक हरियाणा से था, और एक दिल्ली से।
:
अपनी – अपनी बीवी ढूंढते हुए वो आपस में मिले।
:
हरियाणा वाले ने दिल्ली वाले से पूछा..? तुम्हारी बीवी की पहचान क्या है..?
:
दिल्ली वाला बोला -> कद 5’7″, गोरी, भूरी आँखें और पतली है, स्लीवलेस पिंक टी-शर्ट और लाल मिनी स्कर्ट पहने है।
:
तुम्हारी बीवी की क्या पहचान है..?
:
हरियाणा वाला -> मेरे आली कै मार गोली, चाल तेरे वाली को ढूंढते है।

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या चुटकला तो ना है सच्ची घटना है मेरे साथ घटी थी …
एअरइंडिया मैं युनियन बाजी के चलदे एअर होस्टैस बी पचपन छप्पन की हो कै रिटायर होवैं सैं समझै वे खुद नै सोलां साल की सैं … अर इकोनमी क्लास आले कस्टमर गैल्यां बिहेव न्यू करैं जणूं वा उनकी छात्ती पै बैठ कै जा रया हो … ढाई घंटे की फ्लाइट थी दिल्ली तै आबूधाबी की मेरी एकबै … वा नास्ता ब्रेड बटर , चटनी बर्गर सा दे कै गई …
अर पैग तो दो प्हल्यां ए ला लिए थे …
तीस लागगी … धौरै तै जावै थी मखा मैडम थोड़ा पानी ला दिजीए प्लीज …
ना सुणी …
अगली बार नजदीक तै लिक्ड़न लाग्गी मखा मैडम पानी ला दो …
ना जी …
तीसरी बार बी कोए असर ना …
फेर तो मेरे अंदर का हरयाणवी जाग ग्या घणी दूर थी मैं रुक्का दे कै बोल्या … ओ आंटी जी पाणी प्यादे गला सूख रया है …
दस सैकेंड मैं ले कै आई आंख्यां तै अंगारे बरस रे थे अर बोतल मेरे स्यामी एडजस्टेबल टेबल पै पटक कै गई … ड्युटी थी ना तो मेरे सिर पै मारती ..

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8 दिन हो गए थे लगातार इनबॉक्स में हाय हेल्लो होते। किते ना किते उसका भी जी करे था मेरे त बात करण का अर किते ना किते मैं भी बाट देखू था उसके मैसज का सारी हाण। फेर के था नोम्मा दिन आ गया जुकर त उसका मैसज आया जमा गेला गेल मन्ने रिप्लाई करा मखा के ढंग स। वा भी स्माइली घणी भेजे थी बात कम करे थी। फेर बात इतनी बढ़ गी थी ईब अक भीतरले मैं कुलकली रहण लाग्गी जब तैई बात ना हो ले किसे काम का जी ना करे। फेर एक दिन उसने बुला ऐ लिया तडके तडक मिलण खातर। ईब तडके तडक मीठी मीठी ठण्ड। अर वा मेरे स्यामी। मेरा कसूता जी कर रया अक कोळी भर ल्यू अर जब तैई घाम ना लिकडे छोड्डूए ना। फेर वा न्यू बोल्ली मन्ने तेरे त कुछ कहणा है। मन्ने कान करा उसके होठां कहनी। आवाज आयी
र बेटीचो* के यो काटडू खुला गया सारी धार चूँघ गया। खड़ा हो ले चुतड़ा प घाम आ लिया। बाब्बू न सारे सपने की इसीतीसी करदी।

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एक बरात किराए पै लिए हवाई जाहज मैं मुम्बई जा थी …

एलियनस नै वा जाहज हाईजैक करकै प्लूटो ग्रह पै रख दिया …

जंहा जाड्डे का राज … माइनस साढे चार सौ डिगरी पै राज कर रया … कोए जीव तो के घास बी ना उगण दे था अगला …

औढ़े जहाज तै उतर कै स्लिवलैस सूट पैहरी छोरियां रुक्के देण लाग्गी … कम ऑन गर्लस लैटस डांस .. पर या डी जे कित सै …

जाड्डा बोरिया बिस्तर बांध कै राम जी धौरै चल्या गया बोल्या … प्रभू मेरा इस्तिफा स्वीकार करिए अब मेरे अंदर वो पहले जैसी बात नही रही …

राम जी बोल्ले … भाई तूं ड्युटी कर अपणी … ये छोरी हरियाणे की हैं इनका जाड्डा कुछ ना बिगाड़ सकता ये वरदान मेराए दिया होड़ सै

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happy – किमे ऐसी बात बता मेरी setting मन्ने छोड़ कै नही जावै….
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मैं (surbhi)- उसपै रपिए उधारे लेले

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