एक ताऊ अपने पड़ोसी के घर से घी लाने गया
ताऊ–छोरा तेरी माँ ने पूछ थारे घी है के …..
छोरा–माँ घर घी है के ताऊ पूछ है……..
माँ–बेटा तेरे ताऊ न के दे की आपने तो रोटी चोपडन जोगा ही है…..
छोरा– ताऊ मेरी माँ कह की म्हारे तो रोटी चोपडन जोगा ही है….
ताऊ–तो तेरी माँ न कह दे की में के ढुंगा चोपडन खातर लेजा हूँ..

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बोली
कसम खा तेरे जीते जी कोई मेरी सौत ना होवैगी …
मखा
सुणले जो हमनै जुदा करै वा मेरी मौत ही होवैगी
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गले लाग कै रोण लाग्गी … रोड छाप शायरी मैं तो बड्डे बड्डे इम्प्रैस कर दिए , आई बड़ी शायर … 😎

( छोह मैं आवैगी तूं जाणूं हूं … पर मैं एक कॉमेडी पेज का ऐडमिन हूं या तूं बी जाणैं है , या लास्ट आली लाइन ना लिखदा तो झकौई मन्नैं ट्रोल करण लाग जांदे … 💏

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टीचर :- अच्छा इसका अंग्रेजी में अनुवाद करो … ” रामस्वरूप बिमार था परिणाम स्वरूप मर गया ”

पप्पी :- सर पहल्यां न्यु बताओ जब बिमार रामस्वरूप था तो परिणाम स्वरूप क्युकर मर गया … 😏

टीचर :- अरै बेकूफ रामस्वरूप बिमार था फलस्वरूप मर गया … 😬

पप्पी :- एल्ले ईब तीसरा मार दिया … जो बिमार है पहल्यां उसनै मारो सर जी फेर अनुवाद करुंगा … 😎

टीचर नै चाक का डब्बा बगा कै मारया बोल्या सुसरे तूं हिंदी सीख पहल्यां

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एक मॉडर्न छोरी रुक्के देरी थी :- बुड्ढे मां बाप की जिम्मेदारी छोरियां की होती ती तो देस मैं एक बी वृद्धाश्रम ना होता ,
मखा बेब्बे वाए छोरी ब्याह पाच्छै सास सुसर नै मां बाप मान ले तो दुनिया मैं एक बी वृद्धाश्रम ना होता ,
सोच बदलो , समाज बदलेगा ,

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खोल के बैठा था मैं दूकान इश्क की …
गौर फरमाइएगा ..
खोल के बैठा था मैं दूकान इश्क की ..
आंदी जांदी छोरियां तै आंख मांरू था
पर भाई ये साले दुनिया वाले … रोंडी पिंवैं … मैं छेत गेरया … उन छोरियां तै दिखाण खात्तर ..

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आज मैं सोनीपत जा रया था, उड़ै मन्नै एक गरीब आदमी मिल्या, मन्नै उस्तै आपणा फ़ोन, सोने की चैन अर बटुआ में जो 5-7 हज़ार रपिये पड़े थे, सब दान कर दिए..

वो आदमी भोत खुश होया
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अर उसनै पिस्तौल उल्टी ए आपणी गोझ में घाल ली

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एक हरियाणवी 5 स्टार होटल में जाके वेटर से बोला, “चाय 🍵 लाओ..”

थोड़ी देर बाद वेटर ट्रे के साथ आया जिसमें गरम पानी, टी बैग, शुगर क्यूब और मिल्क पाउडर का पाउच था। ट्रे रख वो चला गया.!!

हरियाणवी ने जैसे-तैसे चाय बनाई और पी..!! 😒

कुछ देर बाद वेटर उसके पास आया और कहा, “और क्या लोगे साब..?”

हरियाणवी : वैसे तो पकोड़े खाने का जी करे था भाई, पर डर 😱 यूं लागे कि उसे तु मेरे सामने….

तेल, बेसन, नून मिर्च और कढ़ाई लाके न धर दे..!!

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न्यू कवैं अक वक्त एक बार खुद को दोहराता है …
हे भगवान … इसका मतलब वा फेर आवैगी मेरी जिंदगी मैं …
पिज्जा खुआदे … नंवी मूवी आरी देखण चाल्लै के टिकट के पीसे लेरी मैं … या सूट देखिए किसाक लागै है मेरै मन्नै तो ना जचया

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happy – किमे ऐसी बात बता मेरी setting मन्ने छोड़ कै नही जावै….
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मैं (surbhi)- उसपै रपिए उधारे लेले

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काल पहली बार एक फेसबुक फ्रैंड के साथ डेट पै जांऊ था … दोस्त बोल्या :- कॉन्फिडैंस तै बात करिए छोरी के स्यामी बौखला मत जइए …😊

मखा रै बाप तै मत सिखावै , ऐसी ऐसी छोरियां तो आंगली पै नचा दिया करूं मैं … 😎

10:30 AM Coffee shop …

वा आई अर स्यामी बैठदे ई बोली :- So today is your holiday … 😗

मखा yes yes is is … 😰

थोड़ा मुस्करा कै बोली :- ok what would you have tea , coffee or cold drink … 😗

मैं उखड़ती सांस काब्बू करदा बोल्या :- yes yes … same to you … thankyou … 😰😨

इसकी बेब्बै कै बाथरूम का बहाना करकै भाज आया ओढ़े तै … अपणे बस की ना ये डेट फेट

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पुराने माणसां की बात ए नयारी सै …
म्हारे दादा का गोड्डा उतर ग्या … गाम आले डाक्टर धोरै लेगे … घणी हाण जोर लाकै बोल्या ::- भाई अपणे दादा तै बांध कै टांड पै चढ़ाकै रख द्यो या गोड्डा कोनि चढ़े करदा … 😏😏😏😏
गाड्डी मैं गेरकै शहर के हाड्डजोड़ पैलवान के आगै जाकै धर दिआ दादा … वा बी आधा घंटा घुल कै बोल्या ::- यार थम मेरे पै झौट्टा छत्त पै चढ़वा ल्यो या गोड्डा चढ़ाना मेरे बस की ना सै … 😬😬
फेर किसी नै एक हकीम का पता दिया … उसके आगै दादा टेक दिया … हकीम साब नै कोई पाइया तेल गोड्डे पै गेर दिया होगा …
गोड्डा सारा तेल पी ग्या … बेरा ना कद का जंग खा रया था …
हकीम साब छौ मैं आ ग्या … अक ऐसी तैसी करा ग्या गोड्डा मेरे तेल के पीसे द्यो …
डेड़़ सौ रपइए हकीम तै देकै दादा घर लिआए … घरां आकै दादा नै अपणे आप टांग तै दो झटके दिए …
अर ईब कुददा फिरै है … म्हारा दादा जिंदाबाद …

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सास :- या बर्तन किसनै तोड़े …

बहु :- सोरी मांजी म्हारा झगड़ा हो ग्या था …

सास :- अर या डबल बैड … ???

बहु ( शरमांदे होए ) :- या तो समझौता करदे हाण टूट ग्या

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भीड़ ते खचा खच भरी होई मैट्रो,
मैं आराम तै खड्या जबे राजीव चौक पै,
दरवाजा सज्जे हाथ ने खुला अर मेरा
ध्यान दरवाजा की तरफ गया
एक 5’7 लांबी छोरी , पिला सूट मड़कन आली जुत्ती ,
आँख्या में शयाई घाल ली, सर पै चुन्नी अर
जब वा चाले तो हवा जब उसके काना धौरे
को गुजरे तो हवा मैं उड़ते उसके बाल ,
नाक में एक छोटा सा कोका, चहरे की एक
साइड उसके डिंपल पड़े अर ठोड़ी आला तिल
उसके गुल्लक से मुह की सुंदरता में 4 चाँद लागण लाग रह्या, अर बेरण जमा टिकाई तै पैर धरदी
होइ आवे अर मैं अपनी दिल की धड़कण
रोक के उसकी तरफ देखण लाग रह्या ,
वा मेरी तरफ़ आगे बढ़ी और भोली सी सकल बनाके
मेरी आँख्या में देख के अपना डिंपल
दिखा के एक घणी प्यारी मुस्कान देके बोली
” आप तो एडमिन हो ना” 😍😍
मेरा साँस ऊपर की ऊपर रह गया
मखा कोये छोरी हमने भी जाणे है 😊
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अरे भाई रेस मारण चलेगा के ?
बेरा नी मैरी सासू का कोणसा था
सारा सपना की इसी तीसी कर गया 😕😑
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चलो कोई नहीँ
तडके तड़क की राम राम सबने

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आज ताऊ जी गाम तै शहर आरे थे किसी काम तै , साथ मैं उनके तीन दोस्त और थे … काम निम्टा कै म्हारे तै मिलण आगे पापा घर ना थे मन्नैं इज्जत सत्कार तै बैठक मैं बिठाए …

थोड़ी हाण मैं माँ की अवाज आई रसोई मैं तै :- आइए बेट्टा …

मैं गया … माँ बोली :- रुह अफजा बणाई है , या जग अर एक गलास लेजा …

एक गलास … मैं थोड़ा हैरान हो कै बोल्या … चार गलासां मैं घाल दे ना माँ ट्रे मैं रखकै ले जांउगा …

ले कै जा … माँ नैं घुड़की मारी

बुरा सा मुंह बणाकै जग अर गलास ले कै गया …
ताऊ जी के जो दोस्त पहल्ड़े कान्नी बैठे थे … उन्तै गलास मैं घाल कै दिया रुह अफजा … पीकै उन्होनै फेर गलास आगै कर दिया … फेर एक … फेर एक

पूरा जग निम्टा दिया …

मैं रसोई मैं जाकै माँ तै बोल्या :- माँ या सारा जग तो एक ताऊ जी पी गए …

माँ मुस्करा कै बोली :- मन्नै पता था … बेट्टा गाम आले जब मेहनत करदे हाण नां शर्मांदे तो खाण पीण मैं बी वे गिण्ती ना करया करदे … मैं बी गाम की हूं … तेरे मामा हर कदे आवैंगे तो देखिए वे इनके बी ताऊ हैं … या दूसरा जग ले जा जब तक मैं तीसरा जग तयार करुं …

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पूनम : कोई आवाज दे है बाहर गेट पै , देखियो ।
अनिल : कौण है ?
पूनम : मैं ना पिछाणती
अनिल : अच्छा , रुकण की कह , मैं आऊं हुँ बाहर नै ।
एक तै इस घर मैं कुछ मिलता नी बख्त पै , मेरी घड़ी कित गई इब ?
किसे काम की नहीं या लुगाई , कोय चीज ठिकाणे पै नी पाती , बेरा ना के करती रह है सारे दिन बैठ्ठी बैठ्ठी ।
किस्मत फूट गी मेरी जो या पल्लै पड़ी ।
पूनम : तू पहल्या कोस ले अपणी किस्मत नै जी भर कै, तन्नै तो ज्युकर जीवन सफल कर दिया मेरा , तन्नै पा कै तो सारी इच्छा पूरी होगी मेरी ।
मौका मिलते ए जहर काढण लाग ज्या अपणा , कदे मिठास भी आया है इस जबान पै मेरे नाम का ??
इतणे मैं दुबारा किवाड़ खुड़कै है …..
अनिल : आऊं हूँ , आऊं हूँ , शांति राख ।
“नारंगी पीला सूट पहरे एक सुथरा सा चेहरा, जमीन मैं नजर ग़ाड्डे खड़ा था ।
ज्युकर कुछ छिन ग्या हो उसका”
अनिल : जी बोलो ,
पिछाणे नी आप !!
“उसकी आंख ईब भी जमीन पै थी, ज्युकर कुछ
उकेरणा चाहती हो, उस संगमरमर के धोले फर्श पै ।”
ब्होत हिम्मत जुटा कै वा उप्पर लखाई ।
अनिल : सुमन तू !!
“इस बोल के पाछै जो सन्नाटा ब्यखरा , उसकी चीख मैं , वे सारे ‘घा’ जो भर कै , नई खाल मैं ढल गे थे, एक बार फेर हरे हो गे ।”
” वो घर का गेट एक सीमा रेखा मैं बदलग्या ।”
“एक पासै रिवाजां की रस्सी तै गांठ मार कै गला घोंटी होई गृहस्थी थी और दूसरे पासै बख्त अर झूठे अहंकार की मार खाया होया प्यार।”
“बसी होई गृहस्थी मैं अलगाव का विलाप था अर उजड़े होए , दीमक के खाए होए प्यार मैं सुकून।”
“करुणा तै एक जीसी थी दोनूं पासै , बस बख्त सही ना था।”
“दिल के स्वार्थ नै गृहस्थी के किवाड़ लात मार कै बंद कर दिए थे ।”
अहमद फ़राज़ साहब की ग़ज़ल का यो शेर ब्होत सही लागै है आडै :
” रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ …
तू फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ “

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ब्रेकिंग न्यूज ::- आज शहर में एक दिल दहला देने वाली हृदय विदारक घटना घटित हुई …

कुछ व्यापारी एक जाने माने होटल में एक दोस्त के जन्म दिन की पार्टी में पीते हुए नाच कूद रहे थे …

तभी कोई आसामाजिक शरारती तत्व जोर से चिल्लाया …. मितरोंooo

ये सुनते ही दो व्यापारियों के हाथ से शराब का गिलास छूट गया एक व्यापारी को हार्ट अटैक आते आते बचा … फिर सब व्यापारी मुह लटका के बैठ गए … 😏😏😏

बस रै मितरों मैए … अर जे आग्गै भाइयोरबैनोंooo बी बोल देंदा तो के बन्दा थारा

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