टीचर :- “आंधे की माक्खी राम हटावै” इस मुहावरे का वाक्य में प्रयोग करो ,
छात्र :- जी माणस बेसक दारू पीकै आंधा बोला हो रया हो , पर दारू का गलास आंख बंद करकै पी सकै इतिहास गवाह है दारू के गलास मैं माक्खी ना गिरती क्योंकि “आंधे की माक्खी राम हटावै” … 😝😝
टीचर :- बाहर लिक्ड़ क्लास तै कमीण अर सांझ नै मिलिए .

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किलकी पाटी थी उसकै गाम म
जब मने उसका हाथ थाम्या था
इब अपणी के बात करू
मेरी माँ न सुथरा ए इतना जाम्या था

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8 दिन हो गए थे लगातार इनबॉक्स में हाय हेल्लो होते। किते ना किते उसका भी जी करे था मेरे त बात करण का अर किते ना किते मैं भी बाट देखू था उसके मैसज का सारी हाण। फेर के था नोम्मा दिन आ गया जुकर त उसका मैसज आया जमा गेला गेल मन्ने रिप्लाई करा मखा के ढंग स। वा भी स्माइली घणी भेजे थी बात कम करे थी। फेर बात इतनी बढ़ गी थी ईब अक भीतरले मैं कुलकली रहण लाग्गी जब तैई बात ना हो ले किसे काम का जी ना करे। फेर एक दिन उसने बुला ऐ लिया तडके तडक मिलण खातर। ईब तडके तडक मीठी मीठी ठण्ड। अर वा मेरे स्यामी। मेरा कसूता जी कर रया अक कोळी भर ल्यू अर जब तैई घाम ना लिकडे छोड्डूए ना। फेर वा न्यू बोल्ली मन्ने तेरे त कुछ कहणा है। मन्ने कान करा उसके होठां कहनी। आवाज आयी
र बेटीचो* के यो काटडू खुला गया सारी धार चूँघ गया। खड़ा हो ले चुतड़ा प घाम आ लिया। बाब्बू न सारे सपने की इसीतीसी करदी।

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एक बै एक चौधरी साहब की लाटरी लाग गी, अर लाटरी भी थोड़ी नहीं, पूरे 50 करोड़ की लागी। पूरे गोहान्ड मै रुक्का पङग्या अर मीडिया आले चौधरी कै पाच्छै पाच्छै चक्कर काटैं। एक मीडिया आला चौधरी कै मुह आगै माईक लगा कै बोल्या :-

चौधरी साहब। आप नै के बेरा लाग्या के इस नम्बर पै ऐ लाटरी लागै गी?

चौधरी :- जब मैं पहली रात नै सोया तो मन्नै सूपने मैं 16 दिख्या।। अर दूसरी रात नै सोया तो सूपने मै 2 दिख्या।। मन्नै 16 अर 2 की गुणा करकै 8 नम्बर पै लाटरी लगा दी।।

मीडिया आला ( अचम्भे मै ) :- रै चौधरी साहब। यो के कर्या आप नै। 16 अर 2 की गुणा तो 32 होव सै।।

चौधरी साहब :- रै बावलीबूच। तेरै हिसाब तै चालदा तो लाग ली थी लाटरी।।

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किस्मत_खराब है जो setting कोन्या होती,,

ना छोरा इतणा सरीफ हूँ ….बाथरूम का गेट_बंद करया पाछे बी….
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तोलिया_बांध के कच्छा_बदल्या करूँ

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जै कोई दस बजे उठै तो
जरूरी ना स की आलसी ए हो
हो सकै है आगला के सपने बड़े हों

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मुस्कला एक शायरी याद करी थी छोरी फ़सान ताई। अक “एक पल में जान, जिस्म से कैसे जुदा होती है” या बात मन्ने कही तो अपणि सोड म थी। पर मेरे बाब्बू न बेरा ना क्यूकर सुणगी
फेर बाब्बू न बताई कोहणि मार मार के अक एक पल म जान जिस्म से कैसे जुदा होती है। इतने भूंडे भी कोई मारया करे। …!!

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डॉक्टर :- ताऊ जी कैसी तबीयत है अब ताई की …

ताऊ जी :- इब तो किम्मे सुधार सै … तड़की तो मड़ी मड़ी लड़ी बी थी मेरी गैल्यां

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कहानी घर घर की …
पत्नी :- एजी सुणे है सब्जी के बणांऊ रात खात्तर …
पति :- बणाले यार जो तेरा जी करै ,
… ना थम बताओ ,
… दाल बणाले ,
… दपैहरी बी तो दाल थी
… फेर आलू बैंगण बणाले ,
… बालक ना खाते खुश होकै ,
… राजमा …
… ईब भिगो ना राक्खे घणा टैम लाग जागा ,
… अंडे पड़े होंगे फ्रिज मैं ,
… राम राम वीरवार है आज ,
… होटल तै लिआऊं कुछ ,
… ऐं हैं गंदी संदी सब्जी रांद दें हैं होटल आले तो ,
… तो बणाले नै यार जो तेरा जी करै ,
… ना थम बताओ …

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जिंदगी ना होई मोबाईल की लीड होगी … जितना बी सुलझा कै सो ले , तड़की उलझी पावै ,

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आज काल की बहू।
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एक बहु आपणे पीहर चली गयी
अर अपणे पांच साल के छोरे नै वो सास्सू
धोरै छोड़ गी!
बहु नै गई नै 15 दिन हुए थे के उसकी सास्सू की चिट्ठी आ-गी !
सास्सू नै लिख राख्या था, “बहु
तावली आ-ज्या, छोरे
का जी कोन्या लाग रह्या” ।
बहु नै उल्टी चिट्ठी लिक्खी, “माँ, तन्नै
नू कोन्या लिख्या अक मेरे छोरे
का जी कोन्या लाग रहया अक तेरे
का ?”

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( मेरी ये पोस्ट फिर एक बार )

थोडा़ हटके …कोई समझे तो …।

गोहत्या पाप है यां नही … गोमांस खाना चाहिए या नहीं …?
है तो जानवर ही … जब दूसरे जानवरों को खा सकते हैं तो गाय क्यों नहीं …??

गाय जानवर है कोई शक नहीं … लेकिन गाय का पाचन तंत्र कैसा है ये समझें , सब प्राणी भोजन के जहरीले तत्वों का विसर्जन मल मुत्र से करते हैं और पौष्टिक तत्वों से उनका शरीर – मांस हड्डीयां खून आदि बनते हैं …।
गाय एकमात्र ऐसा प्राणी है जो अपने भोजन के पोष्टिक तत्वों को मल मूत्र में विसर्जीत करती है … और जहरीले पदार्थों से उसका शरीर बनता है … गाय खाना मना इसीलिए किया जाता है क्योंकी जहरिले पदार्थों से बना इसका मांस भी जहरीला होता है , और इसे यदि कोई इन्सान खाता है तो ये उसके शरीर और बुद्धी के लिए हानिकारक होता है …जबकि गाय का मुत्र और गोबर भी शुद्ध होता … इसे पीपल के वृक्ष के साथ भी जोड़ कर देख सकते हैं , जो दूसरे वृक्षों के विपरीत चौबिसों धन्टे हवा से कार्बनडाइआक्साईड सोख के आक्सिजन छोड़ता है इसलिए पीपल की लकड़ी जलाना वातावरण और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है …।।
पुराने समय में शिक्षा की कमी के कारण सब चीजों को पाप और पुण्य से जोड़ दिया जाता था जो लोगों को जल्दी समझ आता था … लेकिन हिन्दू पुराणों में लिखी हर वो बात जिसे अन्धविश्वाश कहा जाता है सब का वैग्यानिक आधार है … इसलिए गोमांस पे लड़ने मरने की बजाए यदि तथ्यों से समझाया जाए तो मुझे नहीं लगता कोई गोमांस खाएगा … और ये हमारे तथाकथित धर्मरक्षक इस तरह से कभी नहीं समझाएंगे , क्योंकि इस मांस में उनकी रोटियां छिपी हैं …
तो … लड़ते रहो …।।।

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बस मैं बैठ्या था घणी भीड़ थी एक सुथरी छोरी खड़ी देख कै ना डट्या गया बोल्या :- मैं तन्नै अपणी सीट दे दूं पर तूं सोच्चैगी मैं तन्नै सैट करण की कौशिश करुं हूं ,
बोली ना तो मैं तो ना सोच्चूं ऐसा … 😗
मखा रैहण दे फेर खड़ी रै ..

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रस्ते कांट्यां भरे हों तो बाब्बु भाई यार दोस्त कोए साथ ना देता …
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ऐसे मोके पै अपणी चप्पल ए काम आवै …
हर बार इमोसनल होणा जरुरी है के

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बोली
कसम खा तेरे जीते जी कोई मेरी सौत ना होवैगी …
मखा
सुणले जो हमनै जुदा करै वा मेरी मौत ही होवैगी
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गले लाग कै रोण लाग्गी … रोड छाप शायरी मैं तो बड्डे बड्डे इम्प्रैस कर दिए , आई बड़ी शायर … 😎

( छोह मैं आवैगी तूं जाणूं हूं … पर मैं एक कॉमेडी पेज का ऐडमिन हूं या तूं बी जाणैं है , या लास्ट आली लाइन ना लिखदा तो झकौई मन्नैं ट्रोल करण लाग जांदे … 💏

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फेरे होए पाछै दहेज के समान की लिस्ट पढन लागे,
बोला एक संदूक,
एक अलमारी,
एक कुलर,
इतने मे एक निचै बैठा शराबी बोल्या- एक बैंगण भी लिख लें,
वो धमका दिया, तु चुप बैठा रह॥
फेर बोलण लागा- एक डबल बैड,
एक सीसा,
एक सोफा सैट,
वो शराबी फेर बोला- एक बैंगण भी लिख लें,
वो फेर तै धमका दिया।
फेर बोला- एक सिलाई मशीन,
एक कढाई मशीन,
एक वाशिंग मशीन,
शराबी फेर बोल्या- आरै एक बैंगण भी लिख ल्यो,
सारे बुझण लागे -बता बैगण क्यांतै लिख ले?
शराबी- अरै कैल नै छौरी गेल्या रोला होगा तै साले न्यूं ना कह दे के बैंगण ल्याई थी ?

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