आज मौसी का छोरा आ रया था … माँ नै जांदी हाण उस्तै सौ रपइए दिए प्यार के …
मन्नै बाहर लिक्ड़दे ई हेर लिआ … ओ कुत्ते गाजरपाक खुआ कै जा ,
हे प्रभू मेरे इस गुनाह को माफ करना वो भी मेरी गैल ऐसे इ करता है जी
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आज मौसी का छोरा आ रया था … माँ नै जांदी हाण उस्तै सौ रपइए दिए प्यार के …
मन्नै बाहर लिक्ड़दे ई हेर लिआ … ओ कुत्ते गाजरपाक खुआ कै जा ,
हे प्रभू मेरे इस गुनाह को माफ करना वो भी मेरी गैल ऐसे इ करता है जी
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नब्बे दिन छुटके नब्बे दिन नवम्बर दिसम्बर जनवरी … नहाना मतलब मौत को दावत देना …
फरवरी … एक महीना ऐसे ही इंतजार करो क्योंकि अचानक पानी उपर डालोगे तो गरम सरद हो सकता है ….
सिर्फ होली से बचो तो मार्च भी निकल जाएगा … सुसरे गीले पानी से बच के …
अप्रेल में थोड़ा सैंट छिड़क लो … लोगों का ऐसे ही ऐप्रेल फूल बना रहेगा … बइ बंदा खुश्बुएं फेंक रहा तो नहाया होगा … मई थोड़ा उपर नीचे करके निकाल दो …
जून जुलाई अगस्त … पसीना ही इतना आता है कि बंदा वैसे ही नहाया रहता है … सितम्बर मौसम बदलता है डाक्टर भी बोलते हैं नहाना मत …
बचा एक अक्तुबर तो यार एक महिना अपने दम से निकालो … यां सब मैं ही सिखाऊं …
नब्बे दिन छुटके बस्स्स् नब्बे दिन ….
आग्गै मरजी है तेरी आखिर गात है तेरा …
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डॉक्टर :- ताऊ जी कैसी तबीयत है अब ताई की …
ताऊ जी :- इब तो किम्मे सुधार सै … तड़की तो मड़ी मड़ी लड़ी बी थी मेरी गैल्यां
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ज़ाड्डा स्पेशल
एक बोल्या म्हारे इतनी बड़ी सोड़ है च उसमे म्हारा सारा कुणबा सोज्यो —
दूसरा बोल्या – म्हारे इतनी बड़ी स च उसमे म्हारा सारा पाना ( महोल्ला ) सोज्यो —
तीसरा म्हारे इतनी बड़ी सोड़ स च उसमे सारा गाम सोज्यो —
.
चौथा – म्हारे, म्हारे कुणबे म्ह 1200 मलंग स –
तीनू कठे बोले – फेर वें कित सोवें –
थारी सोड़ म्ह 😉
ज़ाड्डा
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एक लड़की क पेट म दर्द होग्या अर वा डाक्टर धौरै गई…
डाक्टर :- रात नै के खाया था?
छौरी :- रात को मैंने हैमबर्गर, फ्राइड राईस, कार्न पिज्जा, चिल्ली पनीर और थोड़ी चिल्ड कोक ली थी।
डाक्टर :- फेसबुक कोन्या यो, साच्ची बता के खाया था?
छौरी :- जी, बथुऐ का रायता
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क्या आप जानते हैं … ?
कई मछलियां अंडे नही बच्चे देती हैं …
हाथी ढलान की तरफ तेज नही दौड़ सकता …
आप अपनी जीभ नीचे के दांतो से टच करके गर्लफ्रैंड नही बोल सकते …
बंदर कभी भी अप ……………. तूं गर्लफ्रैंड बोल ले प्हल्यां मैं तो ज्ञान बाद मैं बी दे ल्यूंगा
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पप्पी की सगाई होई …
सोने की अंगूठी पहरा दी सुसराड़ आल्यां नै …
नोरमल बात सै …
लोगां तै बहाने बहाने तै अंगूठी दिखाण की कौशिश करै था किसी नै ध्यान ना दिया …
ईब बात नोरमल ना रई …
तंग आकै तीसरे दन अपणे घर मैं आग लादी … लोग कट्ठे हो कै पाणी गेर कै आग बुझाण लागरे थे … अर पप्पी वाए अंगूठी आली आंगली तै इशारे कर कर कै रुक्के देण लाग्या … औढ़ै पाणी गेरो , औढ़ै पाणी गेरो …
थोड़ी हाण मैं एक नै बूझ लिआ … रै पप्पी या अंगूठी कित तै लियाया …
पप्पी उस्तै एक रैप्टा मार कै बोल्या … रै फुफ्फा जे पहल्यां ए बूझ लेता तो मेरे घर मैं आग तो ना लागती …
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न्यू कवैं अक वक्त एक बार खुद को दोहराता है …
हे भगवान … इसका मतलब वा फेर आवैगी मेरी जिंदगी मैं …
पिज्जा खुआदे … नंवी मूवी आरी देखण चाल्लै के टिकट के पीसे लेरी मैं … या सूट देखिए किसाक लागै है मेरै मन्नै तो ना जचया
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मेरी रश्के कमर … तेरी दुक्खै कमर ,
तेरी होई सगाई …
मजा आ गया
तन्नै ब्लॉक मैं करया … कसूर मेरा धरया ,
फेर बी ना भूल पाई …
मजा आ गया
ना गिला तेरे तै … मैं तो आदी धूप का
तूं थी छांव बण कै आई …
मजा आ गया
जिंदगी पाणी सी … नदी बण कै तन्नै
कुछ दन सीधी चलाई …
मजा आ गया
( किसी की कसम तोड़ कै लिखी हैं ये लाइन भाई … कोई उल्टा सुल्टा मतलब मत लिकाड़िओ
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स्टोर रूम की सफाई करदी हाण जब लास्ट लकड़ी का बक्सा ठाओ तो कूण मैं तै एक मुस्सी लिक्ड़ कै भाज्या करै …
आजकल ऐसे ऐसे बालक बी फेसबुक पै शेर बणे हांडैं हैं ..
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एक भाई एक तीस मंजिल बिल्डिंग की छत पै बैठ्या था …
जब्बे किसे नै आकै उसतै रुक्का दिया … औ परकासे तेरी बहू तेरे पड़ोसी राजबीर गैल्यां भाजगी …
दिल टूट ग्या माणस का अर घणी बेज्जती बी फील कर ग्या … बस दुख मैं उपर तै छाल मारदी ,
पच्चिसवीं मंजिल धौरै उसके ध्यान आई … अक मेरे पड़ोस मैं तो कोए राजबीर ना रैहता …
बीसवीं मंजिल पै दिमाग मैं आया अक रै मेरा तो ब्याह ए ना हो रया …
दसवीं मंजिल तक याद आया … ओ तेरी बेब्बे कै मेरा नाम तो सरेंदर है … या परकासा कौण है … ???
हट मेरे यार … तो मिसटर सरेंदर आपका समय समाप्त होता है … अब
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किलकी पाटी थी उसकै गाम म
जब मने उसका हाथ थाम्या था
इब अपणी के बात करू
मेरी माँ न सुथरा ए इतना जाम्या था
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एक होए करैं बेसुरे सिंगर …
एक होए करैं बेहुदे सिंगर …
फेर आवैं वे बेवड़े सिंगर जो रात साड्डे यारां बजे इमोशनल हो कै बची खुची गर्ल फ्रैंड तै फोन पै नशे मैं गल्त सल्त गाणा सुणा कै बचे खुचे रिलेशन का बी ब्रेकअप कर कै बैठ जां हैं … ओ रै लक फोर्टी एट कुड़ी दा … भाई रै एटी सेवन वेट कुड़ी दा … हट जा ताऊ पाच्छे नै मेरी डार्लिंग नाचैगी …
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( मेरी ये पोस्ट फिर एक बार )
थोडा़ हटके …कोई समझे तो …।
गोहत्या पाप है यां नही … गोमांस खाना चाहिए या नहीं …?
है तो जानवर ही … जब दूसरे जानवरों को खा सकते हैं तो गाय क्यों नहीं …??
गाय जानवर है कोई शक नहीं … लेकिन गाय का पाचन तंत्र कैसा है ये समझें , सब प्राणी भोजन के जहरीले तत्वों का विसर्जन मल मुत्र से करते हैं और पौष्टिक तत्वों से उनका शरीर – मांस हड्डीयां खून आदि बनते हैं …।
गाय एकमात्र ऐसा प्राणी है जो अपने भोजन के पोष्टिक तत्वों को मल मूत्र में विसर्जीत करती है … और जहरीले पदार्थों से उसका शरीर बनता है … गाय खाना मना इसीलिए किया जाता है क्योंकी जहरिले पदार्थों से बना इसका मांस भी जहरीला होता है , और इसे यदि कोई इन्सान खाता है तो ये उसके शरीर और बुद्धी के लिए हानिकारक होता है …जबकि गाय का मुत्र और गोबर भी शुद्ध होता … इसे पीपल के वृक्ष के साथ भी जोड़ कर देख सकते हैं , जो दूसरे वृक्षों के विपरीत चौबिसों धन्टे हवा से कार्बनडाइआक्साईड सोख के आक्सिजन छोड़ता है इसलिए पीपल की लकड़ी जलाना वातावरण और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है …।।
पुराने समय में शिक्षा की कमी के कारण सब चीजों को पाप और पुण्य से जोड़ दिया जाता था जो लोगों को जल्दी समझ आता था … लेकिन हिन्दू पुराणों में लिखी हर वो बात जिसे अन्धविश्वाश कहा जाता है सब का वैग्यानिक आधार है … इसलिए गोमांस पे लड़ने मरने की बजाए यदि तथ्यों से समझाया जाए तो मुझे नहीं लगता कोई गोमांस खाएगा … और ये हमारे तथाकथित धर्मरक्षक इस तरह से कभी नहीं समझाएंगे , क्योंकि इस मांस में उनकी रोटियां छिपी हैं …
तो … लड़ते रहो …।।।
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किसी हरियाणवी तै कदे उल्टा सवाल ना करणा चइए …
मैडिकल स्टोर पै जाकै एक हरियाणवी बोल्या :- भाई मुस्से मारण की दवाई दिए …
स्टोर आला :- घर ले जाओगे … ?
हरियाणवी :- ना गैल ले कै आ रया हूं आढ़िए खुआदे … अर मेरे तंइ चाय बोलदे जाड्डा हो रया है घणा ..
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म्हारा एक दोस्त है लगभग अपणी करतुतां की वजह तै बेरोजगार है …
पर दारू का शौकीन है , कोए दोस्त फस ज्यो उदन उस पै तै दारू पी कै मानैगा बेसक अपणी बचपन की दोस्ती का वास्ता दे कै ब्लैक मेल करणा पड़िओ …
अर लाके तिन्न पैग बल्लिए … मेज पै हाथ मार कै बोलैगा :- ओए तेरे भाई पै बेसक पैसे की तंगी रवै है पर आज तंई किसी भैंचौ के पल्ले तै दारू कौनी पी … अर सुन कल आ जइए बेसक पाँच चार तटपूजिए ले कै फुल्ल पार्टी तेरा भाई करैगा … 😎😎😎
थारा बी कोए ऐसा दोस्त है के ..
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