आज मैं सोनीपत जा रया था, उड़ै मन्नै एक गरीब आदमी मिल्या, मन्नै उस्तै आपणा फ़ोन, सोने की चैन अर बटुआ में जो 5-7 हज़ार रपिये पड़े थे, सब दान कर दिए..

वो आदमी भोत खुश होया
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अर उसनै पिस्तौल उल्टी ए आपणी गोझ में घाल ली

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छोटे छोटे चैक की लाल बुरशट , डार्क गरे पन्ट , पीटर इंग्लैंड की जर्सी , रेड चीफ के काले जूत्ते , क्लीन शेव , सुथरे पठे बाह क आज घर त लिकड़ा था डयूटी प। पर कोइसी भाईरोई न, ना त देख्या अर ना भाव दिए
फेर मन्ने सोच्या के कमी रह गी र
भीतर त आवाज आई दिल्ली म आ रया स खागड आड़े सकल भी भुंडी होणि चईये

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चीन मैं एक कपल के घर दो छोरे जुड़वां पैदा होए उनका नाम रख्या

“Jo hoya”-“So hoya”

वहां दो तै जादा पैदा करना जुर्म , पर अगले साल फेर एक हो ग्या …

उसका नाम राख्या … “Ya ke hoya” 🤔

सरकार उस कपल तै ढूंढ री है … पर वे बालकां समेत फरार हो कै वापस रोहतक आ गए अपणे घर

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एक मैडम नै घणी वार सब्जी आले गैल्यां तुंतुं मैंमैं करी फेर उसके धौरै खड़े होकै एक सैल्फी लेकै फेसबुक पै पोस्ट करदी …

Fighting with सब्जीवाला ,
Feeling …. छौ ,
He is too much लुटेरा ,
Never purchase सब्जी from this डाकू ,
Every body पिछान लो ..

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आजकाल छोरी उस छोरे नै
‘हाय जानू,
हाय बेबी,
हाय हैडंसम’
कह कै बोलैै हैं
जिसनै हाम कदे लंडर कह कै बोल्या करते

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पांच दस साल की सजा तो सलमान क्यूकरे भुगत लेता कोए फरक ना पड़ता …

पर या दस हजार का जुर्माना … मजा आ गया …

बाप की जमीन बेच यां किडनी … बेट्टा ये तो भरने पडैंगे … और मार हिरण वा बी काला

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सिर्फ पिच्छलग्गु बनके विरोध करने वालो एक बार पद्मावत देख के तो आओ …
राजपूती आन बान शान को कैसे खूबसूरती से दिखाया है इसमें

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टीचर :- अपनी माँ की तारीफ मैं एक ऐस्से लिखो ,

छात्र :- सर दुनिया मैं वा स्याई ना बणी जो मेरी माँ के गुण लिख सकै …

टीचर :- ओह … तो बेट्टा बाब्बू के बारे मैं लिख दे कुछ ,

छात्र :- सर जी वा कागज इ ना है सृष्टी मैं जिसपै मेरे बाब्बू की महानता लिखी जा सकै …

मास्टर जी की आंख्यां मैं पाणी आ गया छोरे तै गले लाकै बोल्या :- वाह रै महान आत्मा मनैं गर्व है तेरे पै … बड़ा हो कै के बणैंगा …

महान आत्मा बोल्या :- जी मास्टर जी बड़ा होकै नेता बणूंगा अर बिना कुछ करे धरे न्युए बड़ी बड़ी बात करकै लोगां का फद्दू बणाउंगा अर ऐश करुंगा ..

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न्यू कवैं मां बाप की इज्जत करो … औरतां की इज्जत करो … बढे बुड्ढयां की इज्जत करो … छोरियां की इज्जत करो …

अरै सबकी इज्जत करो तो … वा के कए करैं सुसरी बेज्जती किसकी करैं , हमनै तो रोटी बी ना बढिया लागती जब तक दन मैं दो चार की नासां मैं तै धुम्मा ना लिकाड़ दैं उनकी बेज्जती करकै …

यार हरीयाणवी सां हम …

एक हल है या किसे नै ना कही अक छोट्टेयां की इज्जत करो … इब कल तै जड़ै बी कोई छोट्टा दिख्खै उसकी गुद्दी पै बेमतलब रैप्टा मार द्यो … 😂😂

मजाक था भाई आग्गै थारी मरजी .

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जज: तू तीसरी बार अदालत आया है, तने शर्म कोनी आती?
आदमी: तू तो रोज़ आवे है, तने तो डूब के मर जाना चाहिए ।

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छोरी :- या लिपस्टिक कितने की है …?
दुकानदार :- सतरां रुपए की ,
छोरी :- ओ माई गॉड सैवन्टी … फिफ्टी रुपए लेदां हो तो बोल …?
दुकानदार :- सैवन्टी नि मैडम सैवनटीन सतरां रुपए ,
छोरी :- ओह सैवनटीन …. बारां रुपए लेले

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एक डाब्बे पै छोटू चाय लेकै आया अर आंगली चाय के गिलास मैं डुबो रया था …

गाहक छोह मैं आ गया … अरै यो के है रै …

छोटू बोल्या … जी हमरा उंगली में चोट लगा था दर्द कर रहा था इसलिए गरम चाय में डुबो दिए आराम मिलता है …

गाहक का पारा हाई हो ग्या … साले अराम तांई मेरिए चाय पाई थी … आंगली अपणे चुतड़ां मैं दे लेंदा …

छोटू भोलेपण तै बोल्या … जी बाऊ जी वंही दिए थे पर आपका चाए लाणे के लिए निकालना पड़ा

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पद्मावती मूवी का नाम पद्मावत करके रीलीज करने की तैयारी …

अर यंहा करनी सेना वाले भी अपणा नाम बदल कै करण सेणा रखण की सोचरे हैं ,

तूम डाल डाल … हम पात पात ..

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पूनम : कोई आवाज दे है बाहर गेट पै , देखियो ।
अनिल : कौण है ?
पूनम : मैं ना पिछाणती
अनिल : अच्छा , रुकण की कह , मैं आऊं हुँ बाहर नै ।
एक तै इस घर मैं कुछ मिलता नी बख्त पै , मेरी घड़ी कित गई इब ?
किसे काम की नहीं या लुगाई , कोय चीज ठिकाणे पै नी पाती , बेरा ना के करती रह है सारे दिन बैठ्ठी बैठ्ठी ।
किस्मत फूट गी मेरी जो या पल्लै पड़ी ।
पूनम : तू पहल्या कोस ले अपणी किस्मत नै जी भर कै, तन्नै तो ज्युकर जीवन सफल कर दिया मेरा , तन्नै पा कै तो सारी इच्छा पूरी होगी मेरी ।
मौका मिलते ए जहर काढण लाग ज्या अपणा , कदे मिठास भी आया है इस जबान पै मेरे नाम का ??
इतणे मैं दुबारा किवाड़ खुड़कै है …..
अनिल : आऊं हूँ , आऊं हूँ , शांति राख ।
“नारंगी पीला सूट पहरे एक सुथरा सा चेहरा, जमीन मैं नजर ग़ाड्डे खड़ा था ।
ज्युकर कुछ छिन ग्या हो उसका”
अनिल : जी बोलो ,
पिछाणे नी आप !!
“उसकी आंख ईब भी जमीन पै थी, ज्युकर कुछ
उकेरणा चाहती हो, उस संगमरमर के धोले फर्श पै ।”
ब्होत हिम्मत जुटा कै वा उप्पर लखाई ।
अनिल : सुमन तू !!
“इस बोल के पाछै जो सन्नाटा ब्यखरा , उसकी चीख मैं , वे सारे ‘घा’ जो भर कै , नई खाल मैं ढल गे थे, एक बार फेर हरे हो गे ।”
” वो घर का गेट एक सीमा रेखा मैं बदलग्या ।”
“एक पासै रिवाजां की रस्सी तै गांठ मार कै गला घोंटी होई गृहस्थी थी और दूसरे पासै बख्त अर झूठे अहंकार की मार खाया होया प्यार।”
“बसी होई गृहस्थी मैं अलगाव का विलाप था अर उजड़े होए , दीमक के खाए होए प्यार मैं सुकून।”
“करुणा तै एक जीसी थी दोनूं पासै , बस बख्त सही ना था।”
“दिल के स्वार्थ नै गृहस्थी के किवाड़ लात मार कै बंद कर दिए थे ।”
अहमद फ़राज़ साहब की ग़ज़ल का यो शेर ब्होत सही लागै है आडै :
” रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ …
तू फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ “

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( मेरी ये पोस्ट फिर एक बार )

थोडा़ हटके …कोई समझे तो …।

गोहत्या पाप है यां नही … गोमांस खाना चाहिए या नहीं …?
है तो जानवर ही … जब दूसरे जानवरों को खा सकते हैं तो गाय क्यों नहीं …??

गाय जानवर है कोई शक नहीं … लेकिन गाय का पाचन तंत्र कैसा है ये समझें , सब प्राणी भोजन के जहरीले तत्वों का विसर्जन मल मुत्र से करते हैं और पौष्टिक तत्वों से उनका शरीर – मांस हड्डीयां खून आदि बनते हैं …।
गाय एकमात्र ऐसा प्राणी है जो अपने भोजन के पोष्टिक तत्वों को मल मूत्र में विसर्जीत करती है … और जहरीले पदार्थों से उसका शरीर बनता है … गाय खाना मना इसीलिए किया जाता है क्योंकी जहरिले पदार्थों से बना इसका मांस भी जहरीला होता है , और इसे यदि कोई इन्सान खाता है तो ये उसके शरीर और बुद्धी के लिए हानिकारक होता है …जबकि गाय का मुत्र और गोबर भी शुद्ध होता … इसे पीपल के वृक्ष के साथ भी जोड़ कर देख सकते हैं , जो दूसरे वृक्षों के विपरीत चौबिसों धन्टे हवा से कार्बनडाइआक्साईड सोख के आक्सिजन छोड़ता है इसलिए पीपल की लकड़ी जलाना वातावरण और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है …।।
पुराने समय में शिक्षा की कमी के कारण सब चीजों को पाप और पुण्य से जोड़ दिया जाता था जो लोगों को जल्दी समझ आता था … लेकिन हिन्दू पुराणों में लिखी हर वो बात जिसे अन्धविश्वाश कहा जाता है सब का वैग्यानिक आधार है … इसलिए गोमांस पे लड़ने मरने की बजाए यदि तथ्यों से समझाया जाए तो मुझे नहीं लगता कोई गोमांस खाएगा … और ये हमारे तथाकथित धर्मरक्षक इस तरह से कभी नहीं समझाएंगे , क्योंकि इस मांस में उनकी रोटियां छिपी हैं …
तो … लड़ते रहो …।।।

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आपणै तै जलण आले ब्होत सै,,,,😡
फेर के फर्क पङै सै,,,
आपणै पै मरण आले भी ब्होत सै ।

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