बालकपण मैं अपणे खिलौणे तेरे घरां भूल आया करदा जो तन्नै पसंद आए करदे …
स्कूल मैं तेरा बी बस्ता तेरे घर तक ठाकै ल्याए करदा …
कालेज मैं तेरी हर प्रोजैक्ट मैं दिन रात एक कर दिया करदा …
नौकरी ना करी खेती करण लाग ग्या अक तेरे तै दूर ना जांऊ …
तन्नै तो बैरण बी ना कैह सकदा बैरण … छौड़ तो गई … पर एकबै तो कैह देंदी अक वा सब मेरा पागलपण था … अर वा प्यार ना प्यार के नाम पै गुलामी थी .

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जे थारे सारा कै नये साल की कुरकरी मिटगी हो तो
मकर संक्रांति और लोहङी के मैसेज चालू कर दैवू के ।

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गाजर का हलवा बनाने के लिए महिलाएँ 1200 रू/किलो काजू
800 रू/किलो बादाम और ड्राई फ्रूट और 700 रुपये किलो देसी घी सब खरीद लेंगी.
लेकिन गाजर जब तक दस रूपये की डेढ़ किलो ना हो जाये
तब तक हलवा बनाने का प्रोग्राम पेंडिंग ही रखती हैं

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पप्पी की सगाई होई …
सोने की अंगूठी पहरा दी सुसराड़ आल्यां नै …
नोरमल बात सै …

लोगां तै बहाने बहाने तै अंगूठी दिखाण की कौशिश करै था किसी नै ध्यान ना दिया …
ईब बात नोरमल ना रई …

तंग आकै तीसरे दन अपणे घर मैं आग लादी … लोग कट्ठे हो कै पाणी गेर कै आग बुझाण लागरे थे … अर पप्पी वाए अंगूठी आली आंगली तै इशारे कर कर कै रुक्के देण लाग्या … औढ़ै पाणी गेरो , औढ़ै पाणी गेरो …
थोड़ी हाण मैं एक नै बूझ लिआ … रै पप्पी या अंगूठी कित तै लियाया …

पप्पी उस्तै एक रैप्टा मार कै बोल्या … रै फुफ्फा जे पहल्यां ए बूझ लेता तो मेरे घर मैं आग तो ना लागती …

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एक बुढे कै चार-पाँच छोरे,
बुढा मरणासन हो रया, आर वे पाँचु मेरे बटे
सकिम भिडाण लाग रे,
एक बोल्या ‘ रै बाबु मरेगा’
दुसरा बोल्या ‘हाँ भाई मरणन तै होए
रहया स’
तीसरा बोल्या ‘भाई गाँम कि च्याणी त
दुर पडेँगी इतणी दुर नही चालेगा, न्यु
कर ल्यागे ट्रेक्टर म ले चालागे।’
पहलडा बोल्या ‘आछ्या 100 रपये
लेगा ट्रेकटर आला’
दुसरा बोल्या ‘रे बुगी म ले चालागे’
एक बोल्या ‘तेरा झकोई 70
लेगा बुगी आला भी’
चौथा बोल्या ‘रे न्यु कर लियो साईकल क
गेल न सिढी बांध क उसप लुटा लियो’
इब बुढा खाट म पडया पडया सुणन
लाग रया था, उसन देख लिया तेरी खराब
माटी करैगे, कोए कोए साँस आवै था, उसने
जोड के साँस आर मार कै हँगा, होकै
बैठया बोल्या ‘रे मैरी जुती दे दयो, मैँ पैदल
ए डिगर ज्यांगा’

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एक जाट की छोरी के ब्याह मैं फेरे
होण लाग रे
थे |
पण्डितआँख मींच क मंतर पढ़ क
बोल्या “ॐ गन गणपते नमह |
51 रुपे दक्षिणा समर्पियामी ”
नु कह क जाट त बोल्या धर 51 रुपे
गणेश जी प
| जाट ने 51 रुपे धर दिए |
फेर आँख मीच क और मन्त्र पढ़न लगगया |
थोड़ी हान पाछे फेर बोल्या “ॐ गन
गणपते
नमह |
101 रुपे दक्षिणा समर्पियामी ”
धरो 101 रुपे गणेश
जी प |
जाट ने 101 रुपे धर दिए | फेर आँख
मीच क और
मन्त्र पढ़न लगगया |
थोड़ी हान पाछे फेर बोल्या “ॐ गन गणपते
नमह |
151 रुपे दक्षिणा समर्पियामी ”
धरो 151 रुपे
गणेश
जी प | जाट ने 151 रुपे फेर धर दिए |
पण्डित आँख मीच क और मन्त्र पढ़न
लगगया | जाट नै सोची भी पंडित

कत्ती लूट क छोड़े गा |
इब के ने जाट ने गणेश जी की मूर्ति ठा क जेब में
रख
ली |
पंडित फेर बोल्या “ॐ गन गणपते
नमह |
201 रुपे दक्षिणा समर्पियामी ” धरो 201 रुपे
गणेश जी प अर
आँख
खोल क
देख्या; त गणेश जी गायब थे | पंडित
बोल्या –
चोधरी साहब ये गणेश जी कित गए
| जाट बोल्या – पंडित जी देश मे और
भी त ब्याह
सं
एकला मेरी बेटी काये थोडा स |
हो सके स किसे और के फेरां प चले
गए हों.

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बेट्टा :- मां आज ना बाब्बू कामआली तै बैडरूम मैं पोट्टी करण की कवै था …😩

बाब्बू के अपणी लुगाई के स्यामी तोत्ते से उड़गे बोल्या :- ओ हरामजादे मन्नै कद कई थी … 😡

बेट्टा :- आच्छया तूंए ना तड़की बैड पै पड़या पड़या उसतै बोल रया था मेरी जान वैलेनटांइन चल रया आजा हग दे ..

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एक दिन पड़ोस का हरयाणवी छोरा आ के बोल्या-
” रे चाचा, अपनी इस्त्री देदे… ”
चाचा ने अपनी जनानी की ओर इसारा करया और बोला- ” ले जा, वा बैठी.. ”
छोरा चुप चाप देखन लाग्या…
बोला- ” चाचा यो नहीं, कपडे वाली..”
चाचा बोल्या- ” भले मानस, यो तन्ने बगेर कपड़े दिखे है के ??? ”
छोरा गुस्से में चीखा- ” रा चाचा
बावला ना बन, करंट वाली इस्त्री..”
चाचा- ” बावले, हाथ ते लगा के देख…जे ना मारे करंट, फेर कहिये…”

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नब्बे दिन छुटके नब्बे दिन नवम्बर दिसम्बर जनवरी … नहाना मतलब मौत को दावत देना …
फरवरी … एक महीना ऐसे ही इंतजार करो क्योंकि अचानक पानी उपर डालोगे तो गरम सरद हो सकता है ….

सिर्फ होली से बचो तो मार्च भी निकल जाएगा … सुसरे गीले पानी से बच के …
अप्रेल में थोड़ा सैंट छिड़क लो … लोगों का ऐसे ही ऐप्रेल फूल बना रहेगा … बइ बंदा खुश्बुएं फेंक रहा तो नहाया होगा … मई थोड़ा उपर नीचे करके निकाल दो …
जून जुलाई अगस्त … पसीना ही इतना आता है कि बंदा वैसे ही नहाया रहता है … सितम्बर मौसम बदलता है डाक्टर भी बोलते हैं नहाना मत …
बचा एक अक्तुबर तो यार एक महिना अपने दम से निकालो … यां सब मैं ही सिखाऊं …
नब्बे दिन छुटके बस्स्स् नब्बे दिन ….
आग्गै मरजी है तेरी आखिर गात है तेरा …

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एक बै एक जनैत जीमण लाग री थी। सबकी
पातल (प्लेट) में लाडडू धरे थे। एक ताऊ रह
गया।
कई बार हो गी।
ताऊ ने लाडु ना मिला।
हार के ने ताऊ छात की ओर मुँह करके बोल्या
– राम करे के छात पड़ ज्या। अर सारे दब के मर
ज्या।
एक जना बोल्या -हां ताऊ,जे या छात
पड़ेगी तो तू क्यूकर बचेगा?
ताऊ बोल्या – इब बी तो बच रया सु।

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बाब्बू :- ओ कुत्ते …
बेट्टा :- हां बाब्बू …

मां :- थम दोनूं लिक्ड़ो इस घर तै बाहर गली मैं भौंको जाकै … 😬😬

What a गजब की family .

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पुलिस आला :- तन्नै चोरी करी अक ना ,
चोर :- ना करी …
पुलिस आले नै खैंच कै रैप्टा मारया :- ( पड़ाक ) के कवै ना करी ,
चोर :- जी करी थी …
पुलिस आला :- ( पड़ाक ) के कवै करी थी ,
चोर :- जी और के कंऊऊऊऊ …
पुलिस आला :- ( पड़ाक ) साले वा बी मैं बताऊं ,
चोर :- हे भगवान कित फस ग्या …
पुलिस आला :- ( पड़ाक ) हरामजादे इसमैं भगवान कित तै आ ग्या …
चोर :- मैं तो भगवान नै याद करूं था या बी जुर्म है के …
पुलिस आला :- ( पड़ाक ) साले मन्नै कानून सिखावैगा … बोलिए ,
चोर :- मैं बोलूंगा तूं फेर मारैगा …
पुलिस आला :- ( पड़ाक ) अरै कुत्ते मैं मर्डर्र हूं के जो मार दूंगा … बोल ,
चोर :- ………………
पुलिस आला :- ( पड़ाक ) बोल ईब ,
चोर :- ………………
पुलिस आला :- ( पड़ाक ) अरै कुछ तो बोल ,
चोर :- ……………..
पुलिस आला दूसरे पुलिस आले तै :- चाल भाई बलबीर चाय पीकै आंवैं हो लिया आज का कोट्टा पूरा … 😎😎😎
Moral of the story _ चोरी बेसक तै कर लियो पर म्हारी हरयाणा पुलिस तै मत फस जइओ

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दो आदमियों की बीवीयाँ मेले में खो गईं जिसमे से एक हरियाणा से था और एक दिल्ली से l
.
अपनी अपनी बीवी ढूंढते हुए वो आपस में मिले..!
.
तुम्हारी वाली की पहचान? – हरियाणा वाले ने दिल्ली वाले से पूछा.
दिल्ली वाला बोला – 5’7″, गोरी, भूरी आँखें और पतली है, स्लीवलेस पिंक टीशर्ट और लाल मिनी स्कर्ट पहने है।😪
तुम्हारी की क्या पहचान है ?😌
हरियाणा वाला- मेरे आली कै मार गोली, चाल तेरी ढूंढेंगे

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एक बंदे नै मीट की दुकान खोली अर बाहर बोरड पै लिख दिया ….

यंहा बकरे का ताजा मीट मिलता है

एक आया बोल्या … भाई आसपास और बी मीट की दुकान है के … ?

कसाई बोल्या … नां तो …

बोल्या फेर यंहा क्यों लिख रख्या वातो दिक्खण लग रया …

कसाई नै यंहा मिटा दिया … रै ग्या बकरे का ताजा मीट मिलता है

फेर एक आया … मुर्गा मच्छी बी बेचे करै के

… ना भाई

फेर बकरे का क्यों लिख राख्या … वा तो दिक्खणे लाग रया

बकरे का मेट दिया … रै ग्या ताजा मीट मिलता है

एक और आया … बासी मीट बी बेच्चे करै तीन चार दिनां का

बोल्या ना रै भाई

फेर ताजा क्यों लिख राख्या … लोग शक करैंगे

ताजा हटा दिया रै ग्या … मीट मिलता है

एक और हस्ती आई … भाई दाल सब्जी बी बेचे करै ?

ना यार दिखता नाके

फेर मीट मिलता है क्यों लिख राख्या … लोग आंधे हैं के

पूरे बोरड पैए पोच्छा मारकै बैठ ग्या

फेर एक महान शख्श आया अर बोल्या … भाई इतनी बड़ी दुकान खोल कै बैठ ग्या … बोरड बी है इसपै इतना ना लिख सकता …

यंहा पर बकरे का ताजा मीट मिलता है … 😏😏😏

कसाई नै बकरे का सींग बगाकै मारया साले कै

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आज की नारी हर नारी पै भारी … 😂

सास्सू :- घणी चबड़ चबड़ मतना करै तेरी सुसराड़ है यो पीहर ना … 😏

बहू :- अर मांजी तूं तो इस घर के बरांडे मैं ई उगी थी ना … 😗

ईब बैठी है सास्सू मॉम गाल मैं मुड्डा गेर कै … आ लेण दे चुड़ेल मेरे बेट्टे नैं … ( आखरी हथियार )

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मेरी रश्के कमर … तेरी दुक्खै कमर ,
तेरी होई सगाई …
मजा आ गया

तन्नै ब्लॉक मैं करया … कसूर मेरा धरया ,
फेर बी ना भूल पाई …
मजा आ गया

ना गिला तेरे तै … मैं तो आदी धूप का
तूं थी छांव बण कै आई …
मजा आ गया

जिंदगी पाणी सी … नदी बण कै तन्नै
कुछ दन सीधी चलाई …
मजा आ गया

( किसी की कसम तोड़ कै लिखी हैं ये लाइन भाई … कोई उल्टा सुल्टा मतलब मत लिकाड़िओ

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