एक मैडम नै घणी वार सब्जी आले गैल्यां तुंतुं मैंमैं करी फेर उसके धौरै खड़े होकै एक सैल्फी लेकै फेसबुक पै पोस्ट करदी …

Fighting with सब्जीवाला ,
Feeling …. छौ ,
He is too much लुटेरा ,
Never purchase सब्जी from this डाकू ,
Every body पिछान लो ..

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टीचर :- अच्छा इसका अंग्रेजी में अनुवाद करो … ” रामस्वरूप बिमार था परिणाम स्वरूप मर गया ”

पप्पी :- सर पहल्यां न्यु बताओ जब बिमार रामस्वरूप था तो परिणाम स्वरूप क्युकर मर गया … 😏

टीचर :- अरै बेकूफ रामस्वरूप बिमार था फलस्वरूप मर गया … 😬

पप्पी :- एल्ले ईब तीसरा मार दिया … जो बिमार है पहल्यां उसनै मारो सर जी फेर अनुवाद करुंगा … 😎

टीचर नै चाक का डब्बा बगा कै मारया बोल्या सुसरे तूं हिंदी सीख पहल्यां

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आजकल के बालक पेपरां मैं नंबर कम आए पाच्छै घर छौड़ कै भाज ज्यां हैं …

अरै बालको या के बुजदिलां आली हरकत करो हो …

अरै मूरखो म्हारे टैम मैं तो नंबर म्हारे कम आया करते अर स्कूल छौड़ कै मास्टर जी भाज जा था … अक ईब समाज मैं के मुंह दिखाउंगा …

अर म्हारा आठवीं आला मास्टर तो म्हारे रिजल्ट आए पाच्छै पकड़या गया था …

आत्महत्या का परयास करदा

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हद्द ऐ यार …

एक बारां साल की लड़की का फेसबुक स्टेटस ” बहुत हुआ , अब मैं सब भूल के आगे बढ़ना चाहती हूं ”

ना बेब्बे तूं के भूलणा चावै छै का पहाड़ा … फेर तो तेरा सातवीं मैं ऐडमीशन बी कोनी होवै … आग्गै कित बढ़ैगी

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अमिताभ बच्चन :- एक हजार रुपए के लिए पहला सवाल ये रहा आपकी क्म्पयूटर सक्रीन पे …
किस के नालायक बच्चे अपने पिता की कमाई पे ऐश करते हैं … आपके ऑपशन हैं …
A किसान
B मजदूर
C फिल्म कलाकार
D दुकानदार
मैं :- 😣😣😐😥😨 जी मैं लाइफलाइन ल्यूंगा ,
अमिताभ बच्चन :- हाहाहा काटाबेन शांत हो जांए …पहले ही सवाल पे … खैर कौन सी लाइफलाइन लेंगे आप …
मैं :- जी मैं एक नालायक दोस्त तै फोन करणा चाऊं हूं जो बाप की कमाई पै ऐश कर रया है … 😬😬😬
अमिताभ बच्चन :- ओह तो आपके दोस्त भी नालायक हैं हा हा हा … कौन हैं आपके वो नालायक दोस्त …😝😝
मैं :- सर जी अभिषेक बच्चन तै फोन ला दयो … 😩😩
अमिताभ :- 😡😡😈😈 अरै ठा कै बाहर गेरो इसनै कौणसे नै बुलाया था यो … नातो मैं जा रया हूं …

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पूनम : कोई आवाज दे है बाहर गेट पै , देखियो ।
अनिल : कौण है ?
पूनम : मैं ना पिछाणती
अनिल : अच्छा , रुकण की कह , मैं आऊं हुँ बाहर नै ।
एक तै इस घर मैं कुछ मिलता नी बख्त पै , मेरी घड़ी कित गई इब ?
किसे काम की नहीं या लुगाई , कोय चीज ठिकाणे पै नी पाती , बेरा ना के करती रह है सारे दिन बैठ्ठी बैठ्ठी ।
किस्मत फूट गी मेरी जो या पल्लै पड़ी ।
पूनम : तू पहल्या कोस ले अपणी किस्मत नै जी भर कै, तन्नै तो ज्युकर जीवन सफल कर दिया मेरा , तन्नै पा कै तो सारी इच्छा पूरी होगी मेरी ।
मौका मिलते ए जहर काढण लाग ज्या अपणा , कदे मिठास भी आया है इस जबान पै मेरे नाम का ??
इतणे मैं दुबारा किवाड़ खुड़कै है …..
अनिल : आऊं हूँ , आऊं हूँ , शांति राख ।
“नारंगी पीला सूट पहरे एक सुथरा सा चेहरा, जमीन मैं नजर ग़ाड्डे खड़ा था ।
ज्युकर कुछ छिन ग्या हो उसका”
अनिल : जी बोलो ,
पिछाणे नी आप !!
“उसकी आंख ईब भी जमीन पै थी, ज्युकर कुछ
उकेरणा चाहती हो, उस संगमरमर के धोले फर्श पै ।”
ब्होत हिम्मत जुटा कै वा उप्पर लखाई ।
अनिल : सुमन तू !!
“इस बोल के पाछै जो सन्नाटा ब्यखरा , उसकी चीख मैं , वे सारे ‘घा’ जो भर कै , नई खाल मैं ढल गे थे, एक बार फेर हरे हो गे ।”
” वो घर का गेट एक सीमा रेखा मैं बदलग्या ।”
“एक पासै रिवाजां की रस्सी तै गांठ मार कै गला घोंटी होई गृहस्थी थी और दूसरे पासै बख्त अर झूठे अहंकार की मार खाया होया प्यार।”
“बसी होई गृहस्थी मैं अलगाव का विलाप था अर उजड़े होए , दीमक के खाए होए प्यार मैं सुकून।”
“करुणा तै एक जीसी थी दोनूं पासै , बस बख्त सही ना था।”
“दिल के स्वार्थ नै गृहस्थी के किवाड़ लात मार कै बंद कर दिए थे ।”
अहमद फ़राज़ साहब की ग़ज़ल का यो शेर ब्होत सही लागै है आडै :
” रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ …
तू फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ “

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एक भाई एक तीस मंजिल बिल्डिंग की छत पै बैठ्या था …
जब्बे किसे नै आकै उसतै रुक्का दिया … औ परकासे तेरी बहू तेरे पड़ोसी राजबीर गैल्यां भाजगी …
दिल टूट ग्या माणस का अर घणी बेज्जती बी फील कर ग्या … बस दुख मैं उपर तै छाल मारदी ,
पच्चिसवीं मंजिल धौरै उसके ध्यान आई … अक मेरे पड़ोस मैं तो कोए राजबीर ना रैहता …
बीसवीं मंजिल पै दिमाग मैं आया अक रै मेरा तो ब्याह ए ना हो रया …
दसवीं मंजिल तक याद आया … ओ तेरी बेब्बे कै मेरा नाम तो सरेंदर है … या परकासा कौण है … ???
हट मेरे यार … तो मिसटर सरेंदर आपका समय समाप्त होता है … अब

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उस आदमी तै बड़ा स्वादू कोए नी —
जो ब्याह म
एक दस का नोट आधे घंटे तक हवा म घुमा कै उल्टा गोज मे घाल ले

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रस्ते कांट्यां भरे हों तो बाब्बु भाई यार दोस्त कोए साथ ना देता …
.
.
.
.
ऐसे मोके पै अपणी चप्पल ए काम आवै …
हर बार इमोसनल होणा जरुरी है के

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चौधरी से मेज़बान ने पूछा-
चौधरी जी क्या लेंगे आप, हलवा लाऊं या खीर??
चौधरी – घर में कटोरा एक ही है के??

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लड़की – तुम्हारा निक नेम क्या है ?
लड़का – ये क्या होता है ?
लड़की – अरे तुमको घर सब
किस नाम से बुलाते हैं
लड़का – डाकि

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. भाई तेरे भतिजे नै प्लस टू फ्रस्ट कलास तै पास करली , ईब आगै के कराऊं … ?

… भाई न्यू कर उसतै बी टैक करादे , यां ऐम बी ए करलेगा … दिमाग तो बढ़िया है बेट्टे मैं ,

… फेर भाई ये कोरस करे पाच्छै बढ़िया जॉब पाजागी नै … ?

… ना यार जॉब का चक्कर ना है जिसकी रेहड़ी पै जितनी बड़ी डिग्री टंगी पावैगी उसके पकोड़े उतने जादा बिकैंगे … इब ये मैट़्रिक प्लस टू आल्यां के पकौड़े ना खरिदने का कोई , कम्पिटिसन का जमाना है भाई …

जा रै थारी … इनकी बेब्बे कै पकौड़े मारुं ..

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आज मौसी का छोरा आ रया था … माँ नै जांदी हाण उस्तै सौ रपइए दिए प्यार के …
मन्नै बाहर लिक्ड़दे ई हेर लिआ … ओ कुत्ते गाजरपाक खुआ कै जा ,

हे प्रभू मेरे इस गुनाह को माफ करना वो भी मेरी गैल ऐसे इ करता है जी

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कोई लुगाई अपने खसम तै घणी तंग हो तो रात नै उसके सोए पाच्छै … उसके फोन तै अपने फोन पै एक वाट्स एप मैसेज भेजो …

तलाक , तलाक , तलाक ,

तीन साल तंइ पैंडा छूट सकै है .

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एक हरियाणवी 5 स्टार होटल में जाके वेटर से बोला, “चाय 🍵 लाओ..”

थोड़ी देर बाद वेटर ट्रे के साथ आया जिसमें गरम पानी, टी बैग, शुगर क्यूब और मिल्क पाउडर का पाउच था। ट्रे रख वो चला गया.!!

हरियाणवी ने जैसे-तैसे चाय बनाई और पी..!! 😒

कुछ देर बाद वेटर उसके पास आया और कहा, “और क्या लोगे साब..?”

हरियाणवी : वैसे तो पकोड़े खाने का जी करे था भाई, पर डर 😱 यूं लागे कि उसे तु मेरे सामने….

तेल, बेसन, नून मिर्च और कढ़ाई लाके न धर दे..!!

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हज़्ज़ाम: ताऊ, बाल छोटे करने है के…?
ताऊ: बड़े कर सके है के !!

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