पति बैडरूम मैं बैठ्या था लुगाई झाड़ू मारण आगी बोल्ली थोड़ा सरकिओ …
पति ड्राईंग रूम मैं आकै बैठ ग्या झाड़ू लेकै वंहा बी पोंहचगी … थोड़ा सरकिओ …
पति आंगण मैं चल्या गया … थोड़ी हाण पाच्छै औढ़ै बी … थोड़ा सरकिओ …
पति घर तै बाहर लिक्ड़ ग्या , पांच घंटे बाद लुगाई तै फोन आया … मैं चंडिगढ़ सत्तरां सैक्टर बस अड्डे पै हूं और सरकूं के

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देश बदल रहा है गुजरात चुनाव दो घंटे म्ह 11% वोटिंग ~

दुल्हा – दुल्हन नै भी पहल्यां वोट का अधिकार जरुरी समझा, शादी की रस्म बाद म्ह

वहीं 98 साल का बुजुर्ग भी जाड्डा म्ह शुरू कै एक घंटे म्ह बोट डाल कै घर जा लिया

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पंजाब नैशनल बैंक गया था … मन्नै पूछ लिया :- भाई या अठ्ठनी का पैन रस्सी गैल्यां क्यांतै बांध राख्या ,

सिकोरटी गार्ड बंदूक पै हाथ फेरदा बोल्या :- भाई लोग पैन चोरी कर ले ज्यां हैं ज्यांतै ,

मैं :- 😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂

गार्ड :- 😏😏😬😬😩😩😢😢😭😭

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एक मॉडर्न छोरी रुक्के देरी थी :- बुड्ढे मां बाप की जिम्मेदारी छोरियां की होती ती तो देस मैं एक बी वृद्धाश्रम ना होता ,
मखा बेब्बे वाए छोरी ब्याह पाच्छै सास सुसर नै मां बाप मान ले तो दुनिया मैं एक बी वृद्धाश्रम ना होता ,
सोच बदलो , समाज बदलेगा ,

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पप्पी की सगाई होई …
सोने की अंगूठी पहरा दी सुसराड़ आल्यां नै …
नोरमल बात सै …

लोगां तै बहाने बहाने तै अंगूठी दिखाण की कौशिश करै था किसी नै ध्यान ना दिया …
ईब बात नोरमल ना रई …

तंग आकै तीसरे दन अपणे घर मैं आग लादी … लोग कट्ठे हो कै पाणी गेर कै आग बुझाण लागरे थे … अर पप्पी वाए अंगूठी आली आंगली तै इशारे कर कर कै रुक्के देण लाग्या … औढ़ै पाणी गेरो , औढ़ै पाणी गेरो …
थोड़ी हाण मैं एक नै बूझ लिआ … रै पप्पी या अंगूठी कित तै लियाया …

पप्पी उस्तै एक रैप्टा मार कै बोल्या … रै फुफ्फा जे पहल्यां ए बूझ लेता तो मेरे घर मैं आग तो ना लागती …

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ऐसी की तैसी किसी गब्बर टब्बर की … 😈😈

आलम पूरे मुहल्ले में ये है हमारी दहशत का …

हाथ में आइसक्रीम लिया हर बच्चा काँप उठता है हमें देखके …

अक ईब यो खोसैगा … 😢

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जज: तू तीसरी बार अदालत आया है, तने शर्म कोनी आती?
आदमी: तू तो रोज़ आवे है, तने तो डूब के मर जाना चाहिए ।

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दुकान पै गया था अंडे लेण मखा कितने का एक है …

बैल्या भाई सात का …

मखा यार स्यामी दकाण आला तो पाँच का दे है …

चारौं कान्नी देख कै खड़या होकै मेरे कान मैं बोल्या …
भाई उसकी मुर्गी का करैक्टर खराब है …

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सुबह से लेके शाम तक …

शाम से लेके रात तक …

रात से फिर सुबह तक …

सुबह से फिर रात तक

फोन पै मंडया रवै … भाई यां तो तूं कुंवारा है यां तेरी लुगाई गैल्यां ना बणदी .

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एकाधी छोरी की पसन्द के गाणे इसे हो स,
वे नेट प तो मिलै नही
बाकी साईकिल के खेल दिखावण
आले धोरै जरूर पा ज्यांगे
😂😂😂

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म्हारे गाम का सुक्की वेहला ब्याह खात्तर छोरी देखण मन्नै अपने गैल्यां ले ग्या …

छोरी के सारे घर के बैठे थे , छोरी चाय लेकै आई अर सामने बैठगी … सुक्की थोड़ी हाण छोरी कान्नी देखकै छोरी के बाब्बू तै बोल्या :- अंकल जी है तो या बी ठीक पर इस्तै बढ़िया कोई और हो तो वा बी दिखा द्यो ……..

या सुन्दे ई मैं तो औढ़े तै अंतरध्यान हो ग्या …
सुक्की गैल्यां के बणी पाच्छे तै या तो वो होस मैं आण के बाद बतावैगा … आई सी यू मैं बेहोस पड़या फिलहाल तो

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पूनम : कोई आवाज दे है बाहर गेट पै , देखियो ।
अनिल : कौण है ?
पूनम : मैं ना पिछाणती
अनिल : अच्छा , रुकण की कह , मैं आऊं हुँ बाहर नै ।
एक तै इस घर मैं कुछ मिलता नी बख्त पै , मेरी घड़ी कित गई इब ?
किसे काम की नहीं या लुगाई , कोय चीज ठिकाणे पै नी पाती , बेरा ना के करती रह है सारे दिन बैठ्ठी बैठ्ठी ।
किस्मत फूट गी मेरी जो या पल्लै पड़ी ।
पूनम : तू पहल्या कोस ले अपणी किस्मत नै जी भर कै, तन्नै तो ज्युकर जीवन सफल कर दिया मेरा , तन्नै पा कै तो सारी इच्छा पूरी होगी मेरी ।
मौका मिलते ए जहर काढण लाग ज्या अपणा , कदे मिठास भी आया है इस जबान पै मेरे नाम का ??
इतणे मैं दुबारा किवाड़ खुड़कै है …..
अनिल : आऊं हूँ , आऊं हूँ , शांति राख ।
“नारंगी पीला सूट पहरे एक सुथरा सा चेहरा, जमीन मैं नजर ग़ाड्डे खड़ा था ।
ज्युकर कुछ छिन ग्या हो उसका”
अनिल : जी बोलो ,
पिछाणे नी आप !!
“उसकी आंख ईब भी जमीन पै थी, ज्युकर कुछ
उकेरणा चाहती हो, उस संगमरमर के धोले फर्श पै ।”
ब्होत हिम्मत जुटा कै वा उप्पर लखाई ।
अनिल : सुमन तू !!
“इस बोल के पाछै जो सन्नाटा ब्यखरा , उसकी चीख मैं , वे सारे ‘घा’ जो भर कै , नई खाल मैं ढल गे थे, एक बार फेर हरे हो गे ।”
” वो घर का गेट एक सीमा रेखा मैं बदलग्या ।”
“एक पासै रिवाजां की रस्सी तै गांठ मार कै गला घोंटी होई गृहस्थी थी और दूसरे पासै बख्त अर झूठे अहंकार की मार खाया होया प्यार।”
“बसी होई गृहस्थी मैं अलगाव का विलाप था अर उजड़े होए , दीमक के खाए होए प्यार मैं सुकून।”
“करुणा तै एक जीसी थी दोनूं पासै , बस बख्त सही ना था।”
“दिल के स्वार्थ नै गृहस्थी के किवाड़ लात मार कै बंद कर दिए थे ।”
अहमद फ़राज़ साहब की ग़ज़ल का यो शेर ब्होत सही लागै है आडै :
” रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ …
तू फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ “

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टीचर :- “आंधे की माक्खी राम हटावै” इस मुहावरे का वाक्य में प्रयोग करो ,
छात्र :- जी माणस बेसक दारू पीकै आंधा बोला हो रया हो , पर दारू का गलास आंख बंद करकै पी सकै इतिहास गवाह है दारू के गलास मैं माक्खी ना गिरती क्योंकि “आंधे की माक्खी राम हटावै” … 😝😝
टीचर :- बाहर लिक्ड़ क्लास तै कमीण अर सांझ नै मिलिए .

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ताऊ ट्रम्पे नैं पाकिस्तान का बी पी ऐल कार्ड पाड़ कै बगा दिया …
बोल्या … साले पहल्यां आधार कार्ड बणवा .

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एक बार एक अँग्रेज रोहतक मेँ रास्ता भूल गया, उसने उड़ै पुलिस आळ्यां तै पूछा

Will you please guide me the way to bus stand?

पुलिस वाला: के कहवै है ?

अँग्रेज ने फेर दूसरे पुलिस वाले तै पूछा

Will you please tell me the way to reach bus stand?

पुलिस वाला: के कह रहा है भाई?

अँग्रेज वहाँ से चुपचाप चला गया

पहले पुलिस वाले ने दूसरे को कहा
रामबिलास भाई, आदमी नै अँग्रेजी जरूर आणी चाहिए, किम्मै एमरजैँसी मैँ काम आ जा है

दूसरा पुलिस वाला: उस अँग्रेज नै तो अँग्रेजी आवै थी
उसके काम आयी के???

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Q :- हरियाणा मैं सब तै जादा बर्फ कित पड़े करै ?
.
.
Ans :- पैग मैं

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