पूनम : कोई आवाज दे है बाहर गेट पै , देखियो ।
अनिल : कौण है ?
पूनम : मैं ना पिछाणती
अनिल : अच्छा , रुकण की कह , मैं आऊं हुँ बाहर नै ।
एक तै इस घर मैं कुछ मिलता नी बख्त पै , मेरी घड़ी कित गई इब ?
किसे काम की नहीं या लुगाई , कोय चीज ठिकाणे पै नी पाती , बेरा ना के करती रह है सारे दिन बैठ्ठी बैठ्ठी ।
किस्मत फूट गी मेरी जो या पल्लै पड़ी ।
पूनम : तू पहल्या कोस ले अपणी किस्मत नै जी भर कै, तन्नै तो ज्युकर जीवन सफल कर दिया मेरा , तन्नै पा कै तो सारी इच्छा पूरी होगी मेरी ।
मौका मिलते ए जहर काढण लाग ज्या अपणा , कदे मिठास भी आया है इस जबान पै मेरे नाम का ??
इतणे मैं दुबारा किवाड़ खुड़कै है …..
अनिल : आऊं हूँ , आऊं हूँ , शांति राख ।
“नारंगी पीला सूट पहरे एक सुथरा सा चेहरा, जमीन मैं नजर ग़ाड्डे खड़ा था ।
ज्युकर कुछ छिन ग्या हो उसका”
अनिल : जी बोलो ,
पिछाणे नी आप !!
“उसकी आंख ईब भी जमीन पै थी, ज्युकर कुछ
उकेरणा चाहती हो, उस संगमरमर के धोले फर्श पै ।”
ब्होत हिम्मत जुटा कै वा उप्पर लखाई ।
अनिल : सुमन तू !!
“इस बोल के पाछै जो सन्नाटा ब्यखरा , उसकी चीख मैं , वे सारे ‘घा’ जो भर कै , नई खाल मैं ढल गे थे, एक बार फेर हरे हो गे ।”
” वो घर का गेट एक सीमा रेखा मैं बदलग्या ।”
“एक पासै रिवाजां की रस्सी तै गांठ मार कै गला घोंटी होई गृहस्थी थी और दूसरे पासै बख्त अर झूठे अहंकार की मार खाया होया प्यार।”
“बसी होई गृहस्थी मैं अलगाव का विलाप था अर उजड़े होए , दीमक के खाए होए प्यार मैं सुकून।”
“करुणा तै एक जीसी थी दोनूं पासै , बस बख्त सही ना था।”
“दिल के स्वार्थ नै गृहस्थी के किवाड़ लात मार कै बंद कर दिए थे ।”
अहमद फ़राज़ साहब की ग़ज़ल का यो शेर ब्होत सही लागै है आडै :
” रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ …
तू फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ “

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दिल्ली की छोरी हरियाणवी फोटोग्राफर का मजाक उड़ान खात्तर बोली :- अंकल पासपोर्ट साइज फोटो खींच दो पर उसमें मेरे नाइक के शूज भी आने चाहिए …

एक तो फरमाइश खतरनाक दूसरा सम्बोधन ( अंकल ) उस्तै खतरनाक पर छोरा हरयाणवी था बोल्या :- ठीक सै जूते सिर पै धर कै खड़ी होजा …

छोरी बेज्जती सी फील करगी … दूकान के बाहर छोरे का बाब्बु बेठ्या था उसनै उस्ते शकैत लाई …

पूरी रामकहानी सुण कै बाब्बु बोल्या :- किम्मे ना बेट्टी यो नंवा नंवा काम सिख्या है … तूं न्यू कर उकड़ू बैठ कै खिचवाले .

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पड़ोस मैं एक भाभी दिल्ली की स। आज तड़के 7 बजे म्हारै घर आयी, मैने दरवाजा खोला तो वो बोली:- कोई बात नही जी मैं फिर आ जाऊँगी।
मनै दरवाजा बंद कर दिया।
7:30 बजे दोबारा आई, दरवाजा खोलते ही बोली:-कोई बात नही जी मैं थोड़ी देर में आ जाऊँगी।
मेरे बात समझ नहीं आई, मनै दरवाजा बंद कर दिया।
8 बजे फिर आई,दरवाजा खोला तो बोली कोई बात नही जी, मैं कल ही आ जाऊँगी।
मैं बोल्या :- रूक भाभी, के चक्कर है???
तीन बार आली, फेर न्यू कहदे है बाद म्हं आऊँगी!
भाभी बोली:- जी मैं जब भी आती हूँ आपके हाथ में चम्मच मिलती है, मैं सोची आप खाना खा रहे हो तो बाद में आ जाऊँ।
मैं बोल्या रै बावलीबूच या चम्मच तो हाम साँकल म्हं लाया कराँ….!!

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. भाई तेरे भतिजे नै प्लस टू फ्रस्ट कलास तै पास करली , ईब आगै के कराऊं … ?

… भाई न्यू कर उसतै बी टैक करादे , यां ऐम बी ए करलेगा … दिमाग तो बढ़िया है बेट्टे मैं ,

… फेर भाई ये कोरस करे पाच्छै बढ़िया जॉब पाजागी नै … ?

… ना यार जॉब का चक्कर ना है जिसकी रेहड़ी पै जितनी बड़ी डिग्री टंगी पावैगी उसके पकोड़े उतने जादा बिकैंगे … इब ये मैट़्रिक प्लस टू आल्यां के पकौड़े ना खरिदने का कोई , कम्पिटिसन का जमाना है भाई …

जा रै थारी … इनकी बेब्बे कै पकौड़े मारुं ..

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एक ताऊ अपने पड़ोसी के घर से घी लाने गया
ताऊ–छोरा तेरी माँ ने पूछ थारे घी है के …..
छोरा–माँ घर घी है के ताऊ पूछ है……..
माँ–बेटा तेरे ताऊ न के दे की आपने तो रोटी चोपडन जोगा ही है…..
छोरा– ताऊ मेरी माँ कह की म्हारे तो रोटी चोपडन जोगा ही है….
ताऊ–तो तेरी माँ न कह दे की में के ढुंगा चोपडन खातर लेजा हूँ..

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बालकपण मैं अपणे खिलौणे तेरे घरां भूल आया करदा जो तन्नै पसंद आए करदे …
स्कूल मैं तेरा बी बस्ता तेरे घर तक ठाकै ल्याए करदा …
कालेज मैं तेरी हर प्रोजैक्ट मैं दिन रात एक कर दिया करदा …
नौकरी ना करी खेती करण लाग ग्या अक तेरे तै दूर ना जांऊ …
तन्नै तो बैरण बी ना कैह सकदा बैरण … छौड़ तो गई … पर एकबै तो कैह देंदी अक वा सब मेरा पागलपण था … अर वा प्यार ना प्यार के नाम पै गुलामी थी .

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मेरे तै कार मैं किडनैप कर लिआ …
उनकी कोई बात सुणन तै प्हल्यां ए मैं बोल्या … Thanks भाइयो बचपन तै सपना था कार मैं बैठण का आज आपनै पूरा करया … 😊😊😊
सालेयां नै कार सैड मैं रोक कै मैं ठाकै बाहर गेर दिया
घणे बेकार लिकड़े यार … मेरे तै कैंदे मैं अपणे आप ना उतर जांदा … औच्छे बदमास हुंह .

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पड़ोसन भाब्भी रंगी पुती दोपहर मेरे आग्गै खड़ी होकै बोली … देख देवर रंग नी ला देगा मेरै … 😗

मखा भाब्बी लाऊं कित रंग कोई जंगाह बच इ ना रई … नहा कै आ एक बै पहल्यां …

मुंह बणा कै बोली … ईब आइए भाई की मोटरसैकल मांगण हुंह ,

फेर दो बजे उसके नहाए पाच्छै कोए आधा किलो गुलाल गैल्यां रंगदी … छोह मैं आण का दिखावा तो करै थी पर ईब भाई आली मैटरसैकल तो देदेगी काम पड़े पै दिक्खै ..

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गाजर का हलवा बनाने के लिए महिलाएँ 1200 रू/किलो काजू
800 रू/किलो बादाम और ड्राई फ्रूट और 700 रुपये किलो देसी घी सब खरीद लेंगी.
लेकिन गाजर जब तक दस रूपये की डेढ़ किलो ना हो जाये
तब तक हलवा बनाने का प्रोग्राम पेंडिंग ही रखती हैं

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एक जाट की छोरी के ब्याह मैं फेरे
होण लाग रे
थे |
पण्डितआँख मींच क मंतर पढ़ क
बोल्या “ॐ गन गणपते नमह |
51 रुपे दक्षिणा समर्पियामी ”
नु कह क जाट त बोल्या धर 51 रुपे
गणेश जी प
| जाट ने 51 रुपे धर दिए |
फेर आँख मीच क और मन्त्र पढ़न लगगया |
थोड़ी हान पाछे फेर बोल्या “ॐ गन
गणपते
नमह |
101 रुपे दक्षिणा समर्पियामी ”
धरो 101 रुपे गणेश
जी प |
जाट ने 101 रुपे धर दिए | फेर आँख
मीच क और
मन्त्र पढ़न लगगया |
थोड़ी हान पाछे फेर बोल्या “ॐ गन गणपते
नमह |
151 रुपे दक्षिणा समर्पियामी ”
धरो 151 रुपे
गणेश
जी प | जाट ने 151 रुपे फेर धर दिए |
पण्डित आँख मीच क और मन्त्र पढ़न
लगगया | जाट नै सोची भी पंडित
त
कत्ती लूट क छोड़े गा |
इब के ने जाट ने गणेश जी की मूर्ति ठा क जेब में
रख
ली |
पंडित फेर बोल्या “ॐ गन गणपते
नमह |
201 रुपे दक्षिणा समर्पियामी ” धरो 201 रुपे
गणेश जी प अर
आँख
खोल क
देख्या; त गणेश जी गायब थे | पंडित
बोल्या –
चोधरी साहब ये गणेश जी कित गए
| जाट बोल्या – पंडित जी देश मे और
भी त ब्याह
सं
एकला मेरी बेटी काये थोडा स |
हो सके स किसे और के फेरां प चले
गए हों.

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हरियाणा कै बालक नैट पैक 2G लगवावै,
अर चाहवै यूट्यूब पै सपना कै डांस देखणा

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या न्यूज चैनल आल्यां की मानै तो वा कोरिया का कुत्तरु बेरा ना कद दुनिया का खात्मा करदै …

बस एक आखरी अवाज आवैगी …

सूंऊंऊंऊंऊंऊंऊं ठांआंआंआंअअ……. .. . .

हाम तो ज्यांतै तावली तावली पोस्ट गेरां हाँ … रै बैरियो ले ल्यो जी सा … बेरा ना कल हो ना हो .

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पैसा ही सब कुछ नही होता …

ये एक ऐसा झूठ है जो पैसेवाले गरीब तै बेवकूफ बणान खात्तर अर गरीब अपणें बालकां तै तसल्ली देण खात्तर सदियों तै बोल्दे आरे हैं ..

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एक घणी सुथरी छोरी किराने की दुकान पै जाकै बोल्ली :: लाला जी लिपटन की चा है के … 😗😗
लाला जी बोल्या :: ना बेब्बे चा पत्ती तो खतम होगी ,
थम के सोच्चो थे लाला के कवैगा … लुच्चे कट्ठे होरे बइमान … 😂😅😜
जो.इसका मतलब समज रे हैं वे तो मजे लेरे जिसनै ना समज आई वे किसे तै टैग कर कै पूछ ल्यो … लुच्चे तो घणे हैं .

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एक सात साल का छोरा अपणी माँ तै बुज्झण लाग्या … एरी माँ तूँ मन्नैं कित तै ल्याई थी ,

माँ बोली बेट्टा मन्नैं एक गत्ते के डब्बे मैं थोड़ा गुड़ अर पाणी गेर कै रख दिया … चार दिन बाद मन्नैं डब्बे मैं तूं पाया अर तूं मेरी औलाद बण ग्या ,

छोरे नै बी न्युए करी फेर चार दन बाद डब्बा खोल कै देख्या भित्तर एक कॉकरोच हांडै था … छोरा छौ मैं आकै बोल्या … साले जी तो करै तन्नैं ईबी चप्पल मार कै मार द्यूं , पर के करूं औलाद है तूं मेरी …

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पत्नियों के बल्ड परैशर का सर्तिया इलाज …

हाई हो रया तो फोन लगा कै उसकी माँ तै बात करा द्यो ,

लो हो रया हो तो अपणी माँ तै … 😎

आजमा कै देखो , थै़क्यू बोलोगे …

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