हाए रै गरमी …
म्हारे झोट्टे नैं छोह मैं आकै लिया जोड़िया तोड़ ,
भाज्या बिदक कै गाली देंदा बड़ गया भित्तर जोहड़ ,
बड़ गया भित्तर जोहड़ , बोल्या बाहर नी आंदा ,
ना तूं कदे नहावै … अर ना मन्नैं नुहांदा …
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हाए रै गरमी …
म्हारे झोट्टे नैं छोह मैं आकै लिया जोड़िया तोड़ ,
भाज्या बिदक कै गाली देंदा बड़ गया भित्तर जोहड़ ,
बड़ गया भित्तर जोहड़ , बोल्या बाहर नी आंदा ,
ना तूं कदे नहावै … अर ना मन्नैं नुहांदा …
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मन्नै आशकी मैं बारां लाइन की शायरी पेली थी ,
तन्नै hmmm जवाब देकै जणो गोब्बर कर दिया .
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बाब्बू छोह मैं आ रया था बोल्या … उरै नै आ रै कुत्ते …
मैं पूरे स्वैग मैं … होर भांवे कुज वी करले बाब्बू पर गाल नी कड्डणी … 😎😎😎
अरै सुणजा … एक मिंट .. हाए रै … बात तो सुण … मर ग्याआआआ … देख सोरी … सोरी सोरीईईईई सुण तो ले … 😬😢😭
जिस बंदे की गाल काड्डण पै बैन लाण की सोचूं था … उसनै जुत्ता काड्ड लिआ … 😏😏
इसे इसे गाणया पै बी बैन लाओ मोदी साब
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पूनम : कोई आवाज दे है बाहर गेट पै , देखियो ।
अनिल : कौण है ?
पूनम : मैं ना पिछाणती
अनिल : अच्छा , रुकण की कह , मैं आऊं हुँ बाहर नै ।
एक तै इस घर मैं कुछ मिलता नी बख्त पै , मेरी घड़ी कित गई इब ?
किसे काम की नहीं या लुगाई , कोय चीज ठिकाणे पै नी पाती , बेरा ना के करती रह है सारे दिन बैठ्ठी बैठ्ठी ।
किस्मत फूट गी मेरी जो या पल्लै पड़ी ।
पूनम : तू पहल्या कोस ले अपणी किस्मत नै जी भर कै, तन्नै तो ज्युकर जीवन सफल कर दिया मेरा , तन्नै पा कै तो सारी इच्छा पूरी होगी मेरी ।
मौका मिलते ए जहर काढण लाग ज्या अपणा , कदे मिठास भी आया है इस जबान पै मेरे नाम का ??
इतणे मैं दुबारा किवाड़ खुड़कै है …..
अनिल : आऊं हूँ , आऊं हूँ , शांति राख ।
“नारंगी पीला सूट पहरे एक सुथरा सा चेहरा, जमीन मैं नजर ग़ाड्डे खड़ा था ।
ज्युकर कुछ छिन ग्या हो उसका”
अनिल : जी बोलो ,
पिछाणे नी आप !!
“उसकी आंख ईब भी जमीन पै थी, ज्युकर कुछ
उकेरणा चाहती हो, उस संगमरमर के धोले फर्श पै ।”
ब्होत हिम्मत जुटा कै वा उप्पर लखाई ।
अनिल : सुमन तू !!
“इस बोल के पाछै जो सन्नाटा ब्यखरा , उसकी चीख मैं , वे सारे ‘घा’ जो भर कै , नई खाल मैं ढल गे थे, एक बार फेर हरे हो गे ।”
” वो घर का गेट एक सीमा रेखा मैं बदलग्या ।”
“एक पासै रिवाजां की रस्सी तै गांठ मार कै गला घोंटी होई गृहस्थी थी और दूसरे पासै बख्त अर झूठे अहंकार की मार खाया होया प्यार।”
“बसी होई गृहस्थी मैं अलगाव का विलाप था अर उजड़े होए , दीमक के खाए होए प्यार मैं सुकून।”
“करुणा तै एक जीसी थी दोनूं पासै , बस बख्त सही ना था।”
“दिल के स्वार्थ नै गृहस्थी के किवाड़ लात मार कै बंद कर दिए थे ।”
अहमद फ़राज़ साहब की ग़ज़ल का यो शेर ब्होत सही लागै है आडै :
” रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ …
तू फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ “
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शादी के पहले दिन छोरा confuse हो रहा था कि
पत्नी से कैसे बात शुरू की जाये।
.
कमरे में पहुंचा, तो 5 मिनट के लिए तो दुल्हन के पास चुपचाप
बैठा रहा, उसके बाद धीरे से बोला:
.
..
.
“के नाम है तेरा ?” 😎😎
.
दुल्हन शरमाते हुए बोली:😅
.
“क्यों, कार्ड मे थारी बुआ का नाम लिखवाया था के ?
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लागै सै राहुल उर्फ पप्पू आलू तह सोना बणाण आली मशीन
आपणे मामा कै तह लेकै आवैगा, जित्या पाछै
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इब या किसनै फैलाई…
कोहली ब्याह मै बाज्या आल्या के रपिये मार गया
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दिल्ली में प्रदूषण का कारण हरियाणा के जाट सं
जो हुक्के का धुमा दिल्ली कण मुंह करके छोड़े सं
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एक बै एक जनैत जीमण लाग री थी। सबकी
पातल (प्लेट) में लाडडू धरे थे। एक ताऊ रह
गया।
कई बार हो गी।
ताऊ ने लाडु ना मिला।
हार के ने ताऊ छात की ओर मुँह करके बोल्या
– राम करे के छात पड़ ज्या। अर सारे दब के मर
ज्या।
एक जना बोल्या -हां ताऊ,जे या छात
पड़ेगी तो तू क्यूकर बचेगा?
ताऊ बोल्या – इब बी तो बच रया सु।
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छोटी बहन बड्डी तै :- या छोरी हर जन्म मैं एक इ पति क्यों मांगै सैं … 😩
बड्डी :- ए बेब्बे हर जन्म नंवे गधे नै ट्रेनिंग कौण दे … 😗
( छोरियां तो इस पोस्ट नै पढ़ कै खुसी के मारे गिद्दा लावणी भरत नाट्यम सब किमै नाच लेंगी …
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कुत्ते को मार पीट के शराबी मालिक ने ठंडी अंधियारी आधी रात को घर से निकाल दिया …
ठिठुरता हांफता जा रहा था , देखा एक लावारिस कुतिया कूड़े के ढेर के पास बैठी काँप रही थी … कुत्ते ने उसे एक करुणामई दृष्टी से देखा … लंगड़ाता हुआ उसके पास गया और बोला …
भौं भौं भौं …
और के बोलै था , या फेसबुकिए हर बात पै सैंटी हो ज्यां हैं ..
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रस्ते कांट्यां भरे हों तो बाब्बु भाई यार दोस्त कोए साथ ना देता …
.
.
.
.
ऐसे मोके पै अपणी चप्पल ए काम आवै …
हर बार इमोसनल होणा जरुरी है के
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भूंडू के भीरे कै लट्ठ लाग्गे आज … 😝😝😝
एक टैंट आली दकान पै लिख राख्या था …. यंहा ब्याह शादी का सब सामान मिलता है ,
जाकै बोल्या हां जी सेठ जी एक बढ़िया सी छोरी दिखाओ ब्याह खात्तर …
टैंट आली दरी मैं लपेट कै कुट्या मेरा साला … 😜😜
पाँच मिन्ट पाच्छै चूचे की ढाल दरी मैं तै गरदन बाहर लिकाड़ कै बोल्या … हां बइ फीजिकल फैल होया मेरा अक पास …
फेर दुबारा फीजिकल टैस्ट शुरु कर दिया … उसके सुसराड़ आल्यां नै
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या न्यूज चैनल आल्यां की मानै तो वा कोरिया का कुत्तरु बेरा ना कद दुनिया का खात्मा करदै …
बस एक आखरी अवाज आवैगी …
सूंऊंऊंऊंऊंऊंऊं ठांआंआंआंअअ……. .. . .
हाम तो ज्यांतै तावली तावली पोस्ट गेरां हाँ … रै बैरियो ले ल्यो जी सा … बेरा ना कल हो ना हो .
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काम धंधे के चक्कर मैं घर तै बाहर जाणा पड़या पहली बार …
साउथ इंडिया मैं चेन्नई … ओढ़ै एक घर मैं पी जी सैट हो ग्या , दो चार दन तो उनके डोस्सा , उपमा साम्भर बड़ा , इडली ठीक लागे … फेर मन भर ग्या घर की रोटी याद आण लाग्गी ,
होटलां कान्नी चल दिया पर ना रोटी ढंग की अर ना सब्जी रुह सर की … हार माणनियां तो होए ना करते हरयाणा आले मखा रै रोटी मैं बणाउंगा रूम पै खुद …
कर लिआ सारा जुगाड़ अर बणाई आड्डी टेड्डी सी रोटी अर कच्ची पक्की सी दाल … जैसी बी थी घाल्या घी अर खाई … भाई बणी तो बात सी किम्मै पर वा माँ के हाथ का सुआद ना था …
दो तीन दन बाद हाथ तो चालण लाग गया रोटी सब्जी बणान मैं पर वा बात क्यों ना बणरी यार …
फेर के बांध लिआ परणा सर पै … लाल टोप्पी आले बाबा तै ले कै अर लाल चड्डी आले बाबा तक सारेआं के मसाले जो टीवी मैं देखे थे बरते … सब्जी चरचरी सी होजा थी पर वा बात ना ,
मिहनेंक पाच्छै रात साड्डे यांरा बजे रूम पै आया आलू गाजर मटर की सब्जी बणान लाग्या … ना तो लाल मिर्च ना मसाले सब किम्मै निमट रया था … बस थोड़ी हरी मिर्च अदरक लहसण पड़या था … चाल रै आज याए सइ … बणाई सब्जी रोटी अर पहली बुरकी मुंह मैं गेरिए थी माँ के हाथ बरगी सी लाग्गी …
मन्नै तड़कै माँ तै सारी कहानी बताई … माँ बोल्ली रै बेट्टा सुआद किसी बी औरत के हाथ मैं ना होता उसकी नीयत मैं हो सै वा स्वाद गैल्यां परिवार की सेहत का बी ख्याल राक्खै सै अर घणे तेल मसाले ना गेरदी वाए पोस्टिक सुआद मर्दां की जबान पै रच बस जा है … जिसनै थम्म परदेसां मैं याद करो अक माँ के हाथ का खाणा ,
मखा ए माँ मन्नै बी आ लिया थोड़ा थोड़ा माँ के हाथ का खाणा बणाना … बेसक टोह ले कोइ मेरे खात्तर जिसनै रोटी बणानी ना आंदी हो … मैं तो न्यू चांहू अक मेरे बालक याद करैं …
बाब्बू के हाथ का खाणा … 👍👍👍
Love you माँ …
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छोरी :- या लिपस्टिक कितने की है …?
दुकानदार :- सतरां रुपए की ,
छोरी :- ओ माई गॉड सैवन्टी … फिफ्टी रुपए लेदां हो तो बोल …?
दुकानदार :- सैवन्टी नि मैडम सैवनटीन सतरां रुपए ,
छोरी :- ओह सैवनटीन …. बारां रुपए लेले
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