सड़क पै एक लुगाई गर्मी तै चक्कर खाकै पड़गी … मानस कट्ठे होगे

एक ताऊ रुक्के देण लाग्या :- दूध सोढा ल्याओ रै कोएसा दूध सोढा ल्याओ …

एक छोरा भाज कै बीस रपइए का ठंडा दूध सोढा लियाया …

ताऊ उसपै तै दूध सोढा लेकै सारा आप पी ग्या अर गहरी सांस भर कै बोल्या … भाई मेरे पै नि ऐसे ऐसे हादसे देक्खे जांदे यार …

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एक बुढे कै चार-पाँच छोरे,
बुढा मरणासन हो रया, आर वे पाँचु मेरे बटे
सकिम भिडाण लाग रे,
एक बोल्या ‘ रै बाबु मरेगा’
दुसरा बोल्या ‘हाँ भाई मरणन तै होए
रहया स’
तीसरा बोल्या ‘भाई गाँम कि च्याणी त
दुर पडेँगी इतणी दुर नही चालेगा, न्यु
कर ल्यागे ट्रेक्टर म ले चालागे।’
पहलडा बोल्या ‘आछ्या 100 रपये
लेगा ट्रेकटर आला’
दुसरा बोल्या ‘रे बुगी म ले चालागे’
एक बोल्या ‘तेरा झकोई 70
लेगा बुगी आला भी’
चौथा बोल्या ‘रे न्यु कर लियो साईकल क
गेल न सिढी बांध क उसप लुटा लियो’
इब बुढा खाट म पडया पडया सुणन
लाग रया था, उसन देख लिया तेरी खराब
माटी करैगे, कोए कोए साँस आवै था, उसने
जोड के साँस आर मार कै हँगा, होकै
बैठया बोल्या ‘रे मैरी जुती दे दयो, मैँ पैदल
ए डिगर ज्यांगा’

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किसी हरियाणवी तै कदे उल्टा सवाल ना करणा चइए …

मैडिकल स्टोर पै जाकै एक हरियाणवी बोल्या :- भाई मुस्से मारण की दवाई दिए …

स्टोर आला :- घर ले जाओगे … ?

हरियाणवी :- ना गैल ले कै आ रया हूं आढ़िए खुआदे … अर मेरे तंइ चाय बोलदे जाड्डा हो रया है घणा ..

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पूनम : कोई आवाज दे है बाहर गेट पै , देखियो ।
अनिल : कौण है ?
पूनम : मैं ना पिछाणती
अनिल : अच्छा , रुकण की कह , मैं आऊं हुँ बाहर नै ।
एक तै इस घर मैं कुछ मिलता नी बख्त पै , मेरी घड़ी कित गई इब ?
किसे काम की नहीं या लुगाई , कोय चीज ठिकाणे पै नी पाती , बेरा ना के करती रह है सारे दिन बैठ्ठी बैठ्ठी ।
किस्मत फूट गी मेरी जो या पल्लै पड़ी ।
पूनम : तू पहल्या कोस ले अपणी किस्मत नै जी भर कै, तन्नै तो ज्युकर जीवन सफल कर दिया मेरा , तन्नै पा कै तो सारी इच्छा पूरी होगी मेरी ।
मौका मिलते ए जहर काढण लाग ज्या अपणा , कदे मिठास भी आया है इस जबान पै मेरे नाम का ??
इतणे मैं दुबारा किवाड़ खुड़कै है …..
अनिल : आऊं हूँ , आऊं हूँ , शांति राख ।
“नारंगी पीला सूट पहरे एक सुथरा सा चेहरा, जमीन मैं नजर ग़ाड्डे खड़ा था ।
ज्युकर कुछ छिन ग्या हो उसका”
अनिल : जी बोलो ,
पिछाणे नी आप !!
“उसकी आंख ईब भी जमीन पै थी, ज्युकर कुछ
उकेरणा चाहती हो, उस संगमरमर के धोले फर्श पै ।”
ब्होत हिम्मत जुटा कै वा उप्पर लखाई ।
अनिल : सुमन तू !!
“इस बोल के पाछै जो सन्नाटा ब्यखरा , उसकी चीख मैं , वे सारे ‘घा’ जो भर कै , नई खाल मैं ढल गे थे, एक बार फेर हरे हो गे ।”
” वो घर का गेट एक सीमा रेखा मैं बदलग्या ।”
“एक पासै रिवाजां की रस्सी तै गांठ मार कै गला घोंटी होई गृहस्थी थी और दूसरे पासै बख्त अर झूठे अहंकार की मार खाया होया प्यार।”
“बसी होई गृहस्थी मैं अलगाव का विलाप था अर उजड़े होए , दीमक के खाए होए प्यार मैं सुकून।”
“करुणा तै एक जीसी थी दोनूं पासै , बस बख्त सही ना था।”
“दिल के स्वार्थ नै गृहस्थी के किवाड़ लात मार कै बंद कर दिए थे ।”
अहमद फ़राज़ साहब की ग़ज़ल का यो शेर ब्होत सही लागै है आडै :
” रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ …
तू फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ “

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दिल्ली में प्रदूषण का कारण हरियाणा के जाट सं
जो हुक्के का धुमा दिल्ली कण मुंह करके छोड़े सं

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हरियाणा का ताऊ ट्रेन में बिना टिकट यात्रा करै था। टी टी इ आग्या।
TTE : ताऊ टिकट दिखा।
ताऊ: टिकट तो ना है।
TTE : क्यों नही है….? 🤨🤨
ताऊ: मन्नै टिकट खरीदी ए कोन्या।
TTE : क्यों ना खरीदी ताऊ..?
ताऊ : बस ना खरीदी भाई।
TTE : तनै डर न्ही लाग्या..? कोए पकड़ लेगा तै जरमान्ना हो ज्यागा।
ताऊ: भाई मन्नै सोच्ची अक कोए खानदान्नी TTE होगा तै छोड़ देगा अर कोई घटीया, उल्लू का पट्ठा, गधे का बच्चा, जिसकी लुगाई भी पड़ोसियां पै लैन मारती हो, कोए इसा कुत्ता होगा त जरमान्ना कर लेगा। और के…
इब तू अपणा हिसाब ला ले भाई।

TTE: जा ताऊ काच्चे काट, खिड़की कान्है बैठ ज्या, हवा लाग्गे जागी।

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दिल्ली की छोरी हरियाणवी फोटोग्राफर का मजाक उड़ान खात्तर बोली :- अंकल पासपोर्ट साइज फोटो खींच दो पर उसमें मेरे नाइक के शूज भी आने चाहिए …

एक तो फरमाइश खतरनाक दूसरा सम्बोधन ( अंकल ) उस्तै खतरनाक पर छोरा हरयाणवी था बोल्या :- ठीक सै जूते सिर पै धर कै खड़ी होजा …

छोरी बेज्जती सी फील करगी … दूकान के बाहर छोरे का बाब्बु बेठ्या था उसनै उस्ते शकैत लाई …

पूरी रामकहानी सुण कै बाब्बु बोल्या :- किम्मे ना बेट्टी यो नंवा नंवा काम सिख्या है … तूं न्यू कर उकड़ू बैठ कै खिचवाले .

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फेसबुक पै फ्रैंड बणकै चैटिंग करया करदी … घणे दनां कि रिक्वैस्ट के बाद उसनै मेरे नंबर पै आज फोन करया …
अर वा बार बार अपणा नाम प्रिया बता री है अर या सुसरा true caller फोन की स्क्रीन पै Madan Lal Welder बता रया है … बेरा ना के रोला है …

फेक आई डी आली ऐंजलों थारी आवाज कितनीए छोरी बरगी हो भूल कै बी सामने आले तै फोन मत करिओ हो सकै उसनै true caller install कर राख्या हो .

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न्यू सोचूं था अक आज एक महान रचना लिखूंगा पेज के दोस्तां तंई …

की बोर्ड पै बैठ्या ए था , माँ की अवाज आई … रै जाइए मड़ा दानें पिसवा ल्या …

एरी माँ तेरे मड़े दानेयां के चक्कर मैं आज फेर दुनिया एक महान रचना पढ़ण तै चूकगी … 😏😏😏

हर महान रचनाकार की राह में रोड़े उसके परिवार वाले ही बिछाते हैं … सइ बात है … हुंह … एकबै फेर हुंह …

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उपर आला ठाल्ली बेठ्या था एक दन … के करूं … के करूं …
उसके तो सोचने की देर थी ( बइ पावरफुल तो है ) सृष्टी रच दी … गोल गोल गेंद से ग्रह कोई इसके चक्कर काट रया कोए उसके अर जिसके सारे चक्कर काटरे वो बी चक्कर काट रया बेरा ना किसके …

इतना कन्फ्यूजन पर ना कोई लड़ाई ना झगड़ा ना दंगा ना फसाद ना ऐक्सिडैंट … मतलब मजेदार तो था पर कोए थ्रिल ना था … फेर बोरिंग सा माहौल हो ग्या थोड़े दन पाच्छै ( उसका एक दन बी करोड़ों साल का होए करै )

फेर उसनैं एक गेंद ( ग्रह ) चुनी उसपै पेड़ पौधे , जीव जंतू से बणा दिए … फेर कुछ दन जी सा लाग ग्या … पर मजे आली बात ना थी …

फेर उसनै बनाया इंसान …

अर उसके बाद आज तंई ढंग तै वा खुद बी ना सो पाया … जो उसनैं मान्नैं वा चौबिसों घंटे उसतै मांगे …
अर जो ना मानते वो … उसतै चैलेंज करदे रवैं … अक तूं है तो या करकै दिखा वा करकै दिखा …
अर जो बीच आले हैं … वे उसका नाम ले कै सारी दुनियां मैं नफरत फैलावें … देश , धर्म , रंग , नस्ल के नाम पै अर उसके बनाए इंसान तै उसी का नाम ले कै बेकूफ बणारे हैं अपणे सुख की खात्तर …
भाई मान जाओ … दुखी हो लिया वो ईब थारे लच्छना तै … रात बतावै था मेरे तै न्यू कवै था यार ईब तो या खेल खत्म करणा पड़ैगा घणा बेकार हो लिया ..

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रस्ते कांट्यां भरे हों तो बाब्बु भाई यार दोस्त कोए साथ ना देता …
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ऐसे मोके पै अपणी चप्पल ए काम आवै …
हर बार इमोसनल होणा जरुरी है के

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ताऊ :- बिंदर की ताई उपर आजा घणी सोहणी हवा चालरी है …
ताई :- बिंदर के ताऊ चुप्प चाल्ला सो ज्या मन्नैं बेरा तन्नैं आग लागरी सै … 😩

कवि समेंलण मैं भेजण जोग्गे होरे ये तो

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पड़ोस मैं एक भाभी दिल्ली की स। आज तड़के 7 बजे म्हारै घर आयी, मैने दरवाजा खोला तो वो बोली:- कोई बात नही जी मैं फिर आ जाऊँगी।
मनै दरवाजा बंद कर दिया।
7:30 बजे दोबारा आई, दरवाजा खोलते ही बोली:-कोई बात नही जी मैं थोड़ी देर में आ जाऊँगी।
मेरे बात समझ नहीं आई, मनै दरवाजा बंद कर दिया।
8 बजे फिर आई,दरवाजा खोला तो बोली कोई बात नही जी, मैं कल ही आ जाऊँगी।
मैं बोल्या :- रूक भाभी, के चक्कर है???
तीन बार आली, फेर न्यू कहदे है बाद म्हं आऊँगी!
भाभी बोली:- जी मैं जब भी आती हूँ आपके हाथ में चम्मच मिलती है, मैं सोची आप खाना खा रहे हो तो बाद में आ जाऊँ।
मैं बोल्या रै बावलीबूच या चम्मच तो हाम साँकल म्हं लाया कराँ….!!

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इंटरयू देण गया था इधर उधर के सवाल करकै वा बोल्या :- तो आपकी कोई कमजोरी भी है तो बताओ …

मखा जी मेरै पैग लाग रहा हो अर मेरे को कोए गंवार कैह दे तो मैं उसको साला बावली बूच बोल देता हूं जी …

बोल्या … ओह ये तो तुम सचमुच गंवारो वाली हरकत करते हो ,

मखा ओ साले बावली बूच अपणी लिमट मैं रै लिए …

फेर बेरा ना के होया सालेयां नै मेरा मुंह सूंघ सूंघ छेत्या मैं

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भूंडू के भीरे कै लट्ठ लाग्गे आज … 😝😝😝
एक टैंट आली दकान पै लिख राख्या था …. यंहा ब्याह शादी का सब सामान मिलता है ,
जाकै बोल्या हां जी सेठ जी एक बढ़िया सी छोरी दिखाओ ब्याह खात्तर …
टैंट आली दरी मैं लपेट कै कुट्या मेरा साला … 😜😜
पाँच मिन्ट पाच्छै चूचे की ढाल दरी मैं तै गरदन बाहर लिकाड़ कै बोल्या … हां बइ फीजिकल फैल होया मेरा अक पास …
फेर दुबारा फीजिकल टैस्ट शुरु कर दिया … उसके सुसराड़ आल्यां नै

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दो आदमियों की बीवीयाँ मेले में खो गईं जिसमे से एक हरियाणा से था और एक दिल्ली से l
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अपनी अपनी बीवी ढूंढते हुए वो आपस में मिले..!
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तुम्हारी वाली की पहचान? – हरियाणा वाले ने दिल्ली वाले से पूछा.
दिल्ली वाला बोला – 5’7″, गोरी, भूरी आँखें और पतली है, स्लीवलेस पिंक टीशर्ट और लाल मिनी स्कर्ट पहने है।😪
तुम्हारी की क्या पहचान है ?😌
हरियाणा वाला- मेरे आली कै मार गोली, चाल तेरी ढूंढेंगे

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