कोई भी हरियाणा से बाहर का डाक्टर हरियाणा
में आकर डाक्टर की दुकान नहीं खोल सकता

क्यों? 😉😉

क्योंकि हरियाणा के मरीज की बिमारी हरियाणा के डाक्टर के अलावा कोई समझ ही नहीं सकता

जैसे :-

“भीतरले म धूमा सा उठै है”
“आख्या म त झल सी लकडै हैं”
“गात में उचाटी सी लाग री है।”
“जी कुलमुलावे है।”
“पेट मे धुकड़ धुकड़ हो री है।”
“हाथ झूठे पड़ रे स”
“हरकत हो री स”
“कालजा लकर लकर करे स”
“सिर मै चिड़िया सी बोले सै”
“कड़ मै तरेड़ सी पाटै सै”

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एक हरियाणा आले आदमी की कार के पीछे लिखी सुंदर लाइन 🚘
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देख के ओवरटेक करें
गाड़ी म लठ भी धरें हैं

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मन्नै आशकी मैं बारां लाइन की शायरी पेली थी ,
तन्नै hmmm जवाब देकै जणो गोब्बर कर दिया .

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लड़की – तुम्हारा निक नेम क्या है ?
लड़का – ये क्या होता है ?
लड़की – अरे तुमको घर सब
किस नाम से बुलाते हैं
लड़का – डाकि

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सिर्फ पिच्छलग्गु बनके विरोध करने वालो एक बार पद्मावत देख के तो आओ …
राजपूती आन बान शान को कैसे खूबसूरती से दिखाया है इसमें

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पति बैडरूम मैं बैठ्या था लुगाई झाड़ू मारण आगी बोल्ली थोड़ा सरकिओ …
पति ड्राईंग रूम मैं आकै बैठ ग्या झाड़ू लेकै वंहा बी पोंहचगी … थोड़ा सरकिओ …
पति आंगण मैं चल्या गया … थोड़ी हाण पाच्छै औढ़ै बी … थोड़ा सरकिओ …
पति घर तै बाहर लिक्ड़ ग्या , पांच घंटे बाद लुगाई तै फोन आया … मैं चंडिगढ़ सत्तरां सैक्टर बस अड्डे पै हूं और सरकूं के

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काल तूफान ढंग तै ना आया ,

मखा भागवान चाल तन्नैं इस्से खुशी मैं बाहर बढ़िया डिनर करवा कै ल्याऊं … डेड़ घंटा लाकै तयार होई बचारी अर आठ बजरे थे …

बोली चलो जी मैं तयार हूं हंजी … 😗

मैं बोल्या यार कुछ मूढ़ ना हो रया बाहर जाण का घर मैं बणा ले नैं किम्मै …

तूफान आना चइए मतबल आना चइए … आ ग्या

बैड तलै बड़ रया हूं तूफान तै बचण तंइ

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जोणसी न्यू कहया करती :-
“तू नी मिल्या जे मर जाऊगी”
उसे कै आज दूसरा छोरा होया है!!

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आज काल की बहू।
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एक बहु आपणे पीहर चली गयी
अर अपणे पांच साल के छोरे नै वो सास्सू
धोरै छोड़ गी!
बहु नै गई नै 15 दिन हुए थे के उसकी सास्सू की चिट्ठी आ-गी !
सास्सू नै लिख राख्या था, “बहु
तावली आ-ज्या, छोरे
का जी कोन्या लाग रह्या” ।
बहु नै उल्टी चिट्ठी लिक्खी, “माँ, तन्नै
नू कोन्या लिख्या अक मेरे छोरे
का जी कोन्या लाग रहया अक तेरे
का ?”

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भीड़ ते खचा खच भरी होई मैट्रो,
मैं आराम तै खड्या जबे राजीव चौक पै,
दरवाजा सज्जे हाथ ने खुला अर मेरा
ध्यान दरवाजा की तरफ गया
एक 5’7 लांबी छोरी , पिला सूट मड़कन आली जुत्ती ,
आँख्या में शयाई घाल ली, सर पै चुन्नी अर
जब वा चाले तो हवा जब उसके काना धौरे
को गुजरे तो हवा मैं उड़ते उसके बाल ,
नाक में एक छोटा सा कोका, चहरे की एक
साइड उसके डिंपल पड़े अर ठोड़ी आला तिल
उसके गुल्लक से मुह की सुंदरता में 4 चाँद लागण लाग रह्या, अर बेरण जमा टिकाई तै पैर धरदी
होइ आवे अर मैं अपनी दिल की धड़कण
रोक के उसकी तरफ देखण लाग रह्या ,
वा मेरी तरफ़ आगे बढ़ी और भोली सी सकल बनाके
मेरी आँख्या में देख के अपना डिंपल
दिखा के एक घणी प्यारी मुस्कान देके बोली
” आप तो एडमिन हो ना” 😍😍
मेरा साँस ऊपर की ऊपर रह गया
मखा कोये छोरी हमने भी जाणे है 😊
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अरे भाई रेस मारण चलेगा के ?
बेरा नी मैरी सासू का कोणसा था
सारा सपना की इसी तीसी कर गया 😕😑
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चलो कोई नहीँ
तडके तड़क की राम राम सबने

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इब या किसनै फैलाई…
कोहली ब्याह मै बाज्या आल्या के रपिये मार गया

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आज पेपर था ग्रामीण बैंक का, बाहर चैकिंग करण आळा नै भीतर ना बड़ण दिया, मराबटा न्यूं बोल्या तेरी आधार कार्ड की फ़ोटो ना मिलती, भूंडी फ़ोटो है……. मखा आधार कार्ड में कोए भी टॉम क्रूज ना लाग्या करता…. ना मान्या मेरा सुसरा…. मखा जाऊं सूँ, याद राखिए भूखा मैं भी नहीं मरूं, हिसार के जाट कॉलेज आगै गोल गप्प्यां की रेहड़ी लाऊंगा अर तेरी छोरी मेरे ए धोरै आया करैगी पाणी के पतासे खाण 😜
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खैर… घरां आया अर आकै अलमारी खोली जिसमें मेरे आज तक के भरे होड़ सारे फॉर्म थे..IIT तै लेकै MTS तक, कैलकुलेटर लेकै हिसाब लगाया तो बेरा पाट्या इन फार्मां कै पाछै घणे रपिये फूक दिए, इतणे में एक Bullet आ जाती अर विडम्बना देखो…. ईब साली नौकरी की उम्र भी जा ली 😂😂

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एक छोरे नै एक सिगरेट का पैकेट लिआ उसपै लिख राख्या था सिगरेट पीने से कैंसर होता है
वा दुकानदार तै बोल्या … भाई कोई दुसरी चेतावनी आला पैकेट ना है
दुकानदार नै दूसरा दे दिआ उसपै लिख्या था … सिगरेट पीने वाले को नामर्द होने का खतरा रहता है ,
पैकेट उल्टा देकै बोल्या … यार तूं वा कैंसर आला ए पैकेट देदे ..

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न्यू सोचूं था अक आज एक महान रचना लिखूंगा पेज के दोस्तां तंई …

की बोर्ड पै बैठ्या ए था , माँ की अवाज आई … रै जाइए मड़ा दानें पिसवा ल्या …

एरी माँ तेरे मड़े दानेयां के चक्कर मैं आज फेर दुनिया एक महान रचना पढ़ण तै चूकगी … 😏😏😏

हर महान रचनाकार की राह में रोड़े उसके परिवार वाले ही बिछाते हैं … सइ बात है … हुंह … एकबै फेर हुंह …

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सास :- या बर्तन किसनै तोड़े …

बहु :- सोरी मांजी म्हारा झगड़ा हो ग्या था …

सास :- अर या डबल बैड … ???

बहु ( शरमांदे होए ) :- या तो समझौता करदे हाण टूट ग्या

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पत्थर उठा के मारते हैं मेरे ही मुझको …

दीवाना हो गया हूं मैं … देख के तुझको ,

तूं खुद भी खुद के जलवे से अंजान है शायद …

तिरछी नजर से आइने में देख तो खुद को

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