मेरे आली नै होम्योपैथी का कोरस कर राख्या दिखै …
कदे कि मिट्ठी गोली दिए जारी ,
लास्ट मैं न्यु ना कैह दे अक तेरा रोग मेरे बस का ना है किते और रैफर होजा ..
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मेरे आली नै होम्योपैथी का कोरस कर राख्या दिखै …
कदे कि मिट्ठी गोली दिए जारी ,
लास्ट मैं न्यु ना कैह दे अक तेरा रोग मेरे बस का ना है किते और रैफर होजा ..
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बाब्बू छोह मैं आ रया था बोल्या … उरै नै आ रै कुत्ते …
मैं पूरे स्वैग मैं … होर भांवे कुज वी करले बाब्बू पर गाल नी कड्डणी … 😎😎😎
अरै सुणजा … एक मिंट .. हाए रै … बात तो सुण … मर ग्याआआआ … देख सोरी … सोरी सोरीईईईई सुण तो ले … 😬😢😭
जिस बंदे की गाल काड्डण पै बैन लाण की सोचूं था … उसनै जुत्ता काड्ड लिआ … 😏😏
इसे इसे गाणया पै बी बैन लाओ मोदी साब
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खीर बणाण का एक नया तरिका …
एक ताजा खीरा ल्यो अर एक चक्कू ले कै उसकी पाछली आ की मात्रा खुरच द्यो …
No need to say thanks … करके देखिए अच्छा लगेगा
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कोई भी हरियाणा से बाहर का डाक्टर हरियाणा
में आकर डाक्टर की दुकान नहीं खोल सकता
क्यों? 😉😉
क्योंकि हरियाणा के मरीज की बिमारी हरियाणा के डाक्टर के अलावा कोई समझ ही नहीं सकता
जैसे :-
“भीतरले म धूमा सा उठै है”
“आख्या म त झल सी लकडै हैं”
“गात में उचाटी सी लाग री है।”
“जी कुलमुलावे है।”
“पेट मे धुकड़ धुकड़ हो री है।”
“हाथ झूठे पड़ रे स”
“हरकत हो री स”
“कालजा लकर लकर करे स”
“सिर मै चिड़िया सी बोले सै”
“कड़ मै तरेड़ सी पाटै सै”
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ट्रेन मैं एक मॉडर्न ख्याल की छोरी मेरे साथ टाइमपास खात्तर बातचीत कररी थी बात बात मैं बोली :- ये जो smoking करते हैं ना , I hate thos kind of men ,
मै बोल्या … सही बात है आपकी ऐसे लोग अपने साथ साथ आसपास वाले लोगों के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ करते हैं … और आजकल तो लड़कियां भी सिगरेट शराब पीने लगी हैं पता नही समाज किस ओर जा रहा है …
जब्बे बिफरगी :- how dere you … आप कौन होते हैं औरत की पसंद नापसंद में दख़ल देने वाले , आप जैसे मनुवादियों की सोच ने औरतों को हजारों साल से गुलाम बना के रखा है …
आस पास के लोग मेरे कान्नी न्यु देखण लागगे जणो मन्नै छोरी छेड़ दी
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पूनम : कोई आवाज दे है बाहर गेट पै , देखियो ।
अनिल : कौण है ?
पूनम : मैं ना पिछाणती
अनिल : अच्छा , रुकण की कह , मैं आऊं हुँ बाहर नै ।
एक तै इस घर मैं कुछ मिलता नी बख्त पै , मेरी घड़ी कित गई इब ?
किसे काम की नहीं या लुगाई , कोय चीज ठिकाणे पै नी पाती , बेरा ना के करती रह है सारे दिन बैठ्ठी बैठ्ठी ।
किस्मत फूट गी मेरी जो या पल्लै पड़ी ।
पूनम : तू पहल्या कोस ले अपणी किस्मत नै जी भर कै, तन्नै तो ज्युकर जीवन सफल कर दिया मेरा , तन्नै पा कै तो सारी इच्छा पूरी होगी मेरी ।
मौका मिलते ए जहर काढण लाग ज्या अपणा , कदे मिठास भी आया है इस जबान पै मेरे नाम का ??
इतणे मैं दुबारा किवाड़ खुड़कै है …..
अनिल : आऊं हूँ , आऊं हूँ , शांति राख ।
“नारंगी पीला सूट पहरे एक सुथरा सा चेहरा, जमीन मैं नजर ग़ाड्डे खड़ा था ।
ज्युकर कुछ छिन ग्या हो उसका”
अनिल : जी बोलो ,
पिछाणे नी आप !!
“उसकी आंख ईब भी जमीन पै थी, ज्युकर कुछ
उकेरणा चाहती हो, उस संगमरमर के धोले फर्श पै ।”
ब्होत हिम्मत जुटा कै वा उप्पर लखाई ।
अनिल : सुमन तू !!
“इस बोल के पाछै जो सन्नाटा ब्यखरा , उसकी चीख मैं , वे सारे ‘घा’ जो भर कै , नई खाल मैं ढल गे थे, एक बार फेर हरे हो गे ।”
” वो घर का गेट एक सीमा रेखा मैं बदलग्या ।”
“एक पासै रिवाजां की रस्सी तै गांठ मार कै गला घोंटी होई गृहस्थी थी और दूसरे पासै बख्त अर झूठे अहंकार की मार खाया होया प्यार।”
“बसी होई गृहस्थी मैं अलगाव का विलाप था अर उजड़े होए , दीमक के खाए होए प्यार मैं सुकून।”
“करुणा तै एक जीसी थी दोनूं पासै , बस बख्त सही ना था।”
“दिल के स्वार्थ नै गृहस्थी के किवाड़ लात मार कै बंद कर दिए थे ।”
अहमद फ़राज़ साहब की ग़ज़ल का यो शेर ब्होत सही लागै है आडै :
” रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ …
तू फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ “
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दिल्ली मैं कुछ पटाखा समर्थक स्वंयसेवक संघों नै सुप्रीम कोर्ट की रोक का एक तोड़ काड्या है …
उन्होनै फैसला करया है अक दिवाली के दिन सारे दिल्ली ऐन सी आर आल्यां तै पेट भर कै मूली के परांठे तीन तीन गलास लास्सी अर चार चार हाजमोला की गोली फरी दी जावैगी …
आजो कोर्ट साब रोक ल्यो धमाके अर कर ल्यो पोल्युशन कंट्रोल …
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एक अस्सी साल के बुजरग नै बुढ़ापे के अकेले पण तै तंग आकै एक सत्तर साल की विधवा गैल ब्याह कर लिआ …
सुहागरात नै बेगम धोरै गया अर … उसका हाथ पकड़ कै सो ग्या …
दूसरी रात बी याए काम करया बुढ़िया का हाथ पकड़ कै सो गया …
तीसरी रात बी …
चौथी बी …
पांचवी रात हाथ पकड़न लाग्या तो बुढिया बोल्ली … आज मेरी तबियत कुछ ठीक नाहै जी … आज रैहण दो प्लीज
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मेरी रश्के कमर … तेरी दुक्खै कमर ,
तेरी होई सगाई …
मजा आ गया
तन्नै ब्लॉक मैं करया … कसूर मेरा धरया ,
फेर बी ना भूल पाई …
मजा आ गया
ना गिला तेरे तै … मैं तो आदी धूप का
तूं थी छांव बण कै आई …
मजा आ गया
जिंदगी पाणी सी … नदी बण कै तन्नै
कुछ दन सीधी चलाई …
मजा आ गया
( किसी की कसम तोड़ कै लिखी हैं ये लाइन भाई … कोई उल्टा सुल्टा मतलब मत लिकाड़िओ
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आज की नारी हर नारी पै भारी … 😂
सास्सू :- घणी चबड़ चबड़ मतना करै तेरी सुसराड़ है यो पीहर ना … 😏
बहू :- अर मांजी तूं तो इस घर के बरांडे मैं ई उगी थी ना … 😗
ईब बैठी है सास्सू मॉम गाल मैं मुड्डा गेर कै … आ लेण दे चुड़ेल मेरे बेट्टे नैं … ( आखरी हथियार )
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एक दिन पड़ोस का हरयाणवी छोरा आ के बोल्या-
” रे चाचा, अपनी इस्त्री देदे… ”
चाचा ने अपनी जनानी की ओर इसारा करया और बोला- ” ले जा, वा बैठी.. ”
छोरा चुप चाप देखन लाग्या…
बोला- ” चाचा यो नहीं, कपडे वाली..”
चाचा बोल्या- ” भले मानस, यो तन्ने बगेर कपड़े दिखे है के ??? ”
छोरा गुस्से में चीखा- ” रा चाचा
बावला ना बन, करंट वाली इस्त्री..”
चाचा- ” बावले, हाथ ते लगा के देख…जे ना मारे करंट, फेर कहिये…”
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एक बंदे नै मीट की दुकान खोली अर बाहर बोरड पै लिख दिया ….
यंहा बकरे का ताजा मीट मिलता है
एक आया बोल्या … भाई आसपास और बी मीट की दुकान है के … ?
कसाई बोल्या … नां तो …
बोल्या फेर यंहा क्यों लिख रख्या वातो दिक्खण लग रया …
कसाई नै यंहा मिटा दिया … रै ग्या बकरे का ताजा मीट मिलता है
फेर एक आया … मुर्गा मच्छी बी बेचे करै के
… ना भाई
फेर बकरे का क्यों लिख राख्या … वा तो दिक्खणे लाग रया
बकरे का मेट दिया … रै ग्या ताजा मीट मिलता है
एक और आया … बासी मीट बी बेच्चे करै तीन चार दिनां का
बोल्या ना रै भाई
फेर ताजा क्यों लिख राख्या … लोग शक करैंगे
ताजा हटा दिया रै ग्या … मीट मिलता है
एक और हस्ती आई … भाई दाल सब्जी बी बेचे करै ?
ना यार दिखता नाके
फेर मीट मिलता है क्यों लिख राख्या … लोग आंधे हैं के
पूरे बोरड पैए पोच्छा मारकै बैठ ग्या
फेर एक महान शख्श आया अर बोल्या … भाई इतनी बड़ी दुकान खोल कै बैठ ग्या … बोरड बी है इसपै इतना ना लिख सकता …
यंहा पर बकरे का ताजा मीट मिलता है … 😏😏😏
कसाई नै बकरे का सींग बगाकै मारया साले कै
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प्लस टू का रिजल्ट आया …
बाब्बू गब्बर … छोरा कूण मैं खड़या
बाब्बू … कितने पेपर थे … टूंऊंऊंऊंऊं ( बैकग्रांउड सांउड )
छोरा … बाब्बू घणे थे …
… कितनैयां मैं फैल होया … टूंऊंऊंऊं
…. बाब्बू सप्ली आरी हैं
… याके सौदा है रै , पास होया …
… हां बाब्बू … ना बाब्बू … वा बाब्बू वा तो बाब्बू कलियर कर दयुंगा
… सुसरे सिधा पास क्यों ना होया अर फेर बी उल्टा आ ग्या खाली दमाग … अरे ओ भीरे की माँ कितना खरच होया इसपै इस साल … टूंऊंऊंऊं
… जी पूरे पैंतिस हजार
… सुण्या तन्नैं पूउउरे पैंतिस हजार अर या पैंतिस हजार ज्यांतै अक मेरा बेट्टा आई ए ऐस बणैगा मेरा नाम करैगा … अर तन्नैं मेरा नाम मिट्टी मैं मिला दिया … अब तेरा क्या होगा भीरे … टूंऊंऊंऊं
… बाब्बू न्यू तो खड़के का रामा भी फैल हो ग्या , बिंदर का लिल्लू बी फैल हो ग्या , रामधारी का गुल्लू बी फैल हो ग्या , बीरपाल का …
… आच्छया रै या बात है के चल फेर बरफ लिकाड़ कै ल्या फरीज मैं तै पैग लाण का टैम हो रया
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देश बदल रहा है गुजरात चुनाव दो घंटे म्ह 11% वोटिंग ~
दुल्हा – दुल्हन नै भी पहल्यां वोट का अधिकार जरुरी समझा, शादी की रस्म बाद म्ह
वहीं 98 साल का बुजुर्ग भी जाड्डा म्ह शुरू कै एक घंटे म्ह बोट डाल कै घर जा लिया
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ल्यो भाई भजन सुण ल्यो आज।
राम राम तडके आली।
बीयर पीवैँ गरमिया म्ह
यार मेरे उल्लू के पट्ठे
पूरी पेटी ठा ल्यावैँ
100 100रपिये कर कैँ कट्ठे..
पीयाँ पाच्छै भुँडे बोलैँ
शर्म तार कैँ धर दे सैँ
फोन मिला कैढब्बण धोरै
LOUDSPEAKER On कर दे सैँ
बात करा दे बात करा दे
इसे बात प रोला हो ज्या
बोतल फोङैँ दही खँढादेँ
नया पजामा धोला हो ज्या
कितै कूण म्ह प्याज पङे
और कितै कूण म्ह दाल सै
DAILY रात नै कह कै सोवैँ
भाई आज पाच्छै टाल सै”
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जिंदगी ना होई मोबाईल की लीड होगी … जितना बी सुलझा कै सो ले , तड़की उलझी पावै ,
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