भीड़ ते खचा खच भरी होई मैट्रो,
मैं आराम तै खड्या जबे राजीव चौक पै,
दरवाजा सज्जे हाथ ने खुला अर मेरा
ध्यान दरवाजा की तरफ गया
एक 5’7 लांबी छोरी , पिला सूट मड़कन आली जुत्ती ,
आँख्या में शयाई घाल ली, सर पै चुन्नी अर
जब वा चाले तो हवा जब उसके काना धौरे
को गुजरे तो हवा मैं उड़ते उसके बाल ,
नाक में एक छोटा सा कोका, चहरे की एक
साइड उसके डिंपल पड़े अर ठोड़ी आला तिल
उसके गुल्लक से मुह की सुंदरता में 4 चाँद लागण लाग रह्या, अर बेरण जमा टिकाई तै पैर धरदी
होइ आवे अर मैं अपनी दिल की धड़कण
रोक के उसकी तरफ देखण लाग रह्या ,
वा मेरी तरफ़ आगे बढ़ी और भोली सी सकल बनाके
मेरी आँख्या में देख के अपना डिंपल
दिखा के एक घणी प्यारी मुस्कान देके बोली
” आप तो एडमिन हो ना” 😍😍
मेरा साँस ऊपर की ऊपर रह गया
मखा कोये छोरी हमने भी जाणे है 😊
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अरे भाई रेस मारण चलेगा के ?
बेरा नी मैरी सासू का कोणसा था
सारा सपना की इसी तीसी कर गया 😕😑
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चलो कोई नहीँ
तडके तड़क की राम राम सबने

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सुसराड़ मैं पहली बार आया जमाई सांझ नै एकला ए गाम देखण लिकड़ पड़या …
चौक मै खड़े एक छोरे तै बुज्झण लाग्या :- ओ साले साब थारे गाम मैं देखण की के चीज है ,
साले साब सुण कै साला चिंगर कै बोल्या :- एके थी देखण आली चीज तो …
वा तूं ले गया .

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ग्राहक: थारी भैंस की एक आंख तो खराब सै, फेर भी तू इसके 25 हज़ार रुपये मांगन लाग्र्या सै?
आदमी: तन्नै भैंस दूध खात्तर चाहिए या नैन-मटक्का करन खात्तर..?????

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ऐसी की तैसी किसी गब्बर टब्बर की … 😈😈

आलम पूरे मुहल्ले में ये है हमारी दहशत का …

हाथ में आइसक्रीम लिया हर बच्चा काँप उठता है हमें देखके …

अक ईब यो खोसैगा … 😢

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पप्पी की सगाई होई …
सोने की अंगूठी पहरा दी सुसराड़ आल्यां नै …
नोरमल बात सै …

लोगां तै बहाने बहाने तै अंगूठी दिखाण की कौशिश करै था किसी नै ध्यान ना दिया …
ईब बात नोरमल ना रई …

तंग आकै तीसरे दन अपणे घर मैं आग लादी … लोग कट्ठे हो कै पाणी गेर कै आग बुझाण लागरे थे … अर पप्पी वाए अंगूठी आली आंगली तै इशारे कर कर कै रुक्के देण लाग्या … औढ़ै पाणी गेरो , औढ़ै पाणी गेरो …
थोड़ी हाण मैं एक नै बूझ लिआ … रै पप्पी या अंगूठी कित तै लियाया …

पप्पी उस्तै एक रैप्टा मार कै बोल्या … रै फुफ्फा जे पहल्यां ए बूझ लेता तो मेरे घर मैं आग तो ना लागती …

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आज पेपर था ग्रामीण बैंक का, बाहर चैकिंग करण आळा नै भीतर ना बड़ण दिया, मराबटा न्यूं बोल्या तेरी आधार कार्ड की फ़ोटो ना मिलती, भूंडी फ़ोटो है……. मखा आधार कार्ड में कोए भी टॉम क्रूज ना लाग्या करता…. ना मान्या मेरा सुसरा…. मखा जाऊं सूँ, याद राखिए भूखा मैं भी नहीं मरूं, हिसार के जाट कॉलेज आगै गोल गप्प्यां की रेहड़ी लाऊंगा अर तेरी छोरी मेरे ए धोरै आया करैगी पाणी के पतासे खाण 😜
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खैर… घरां आया अर आकै अलमारी खोली जिसमें मेरे आज तक के भरे होड़ सारे फॉर्म थे..IIT तै लेकै MTS तक, कैलकुलेटर लेकै हिसाब लगाया तो बेरा पाट्या इन फार्मां कै पाछै घणे रपिये फूक दिए, इतणे में एक Bullet आ जाती अर विडम्बना देखो…. ईब साली नौकरी की उम्र भी जा ली 😂😂

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टीचर :- “आंधे की माक्खी राम हटावै” इस मुहावरे का वाक्य में प्रयोग करो ,
छात्र :- जी माणस बेसक दारू पीकै आंधा बोला हो रया हो , पर दारू का गलास आंख बंद करकै पी सकै इतिहास गवाह है दारू के गलास मैं माक्खी ना गिरती क्योंकि “आंधे की माक्खी राम हटावै” … 😝😝
टीचर :- बाहर लिक्ड़ क्लास तै कमीण अर सांझ नै मिलिए .

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ताऊ :- बिंदर की ताई उपर आजा घणी सोहणी हवा चालरी है …
ताई :- बिंदर के ताऊ चुप्प चाल्ला सो ज्या मन्नैं बेरा तन्नैं आग लागरी सै … 😩

कवि समेंलण मैं भेजण जोग्गे होरे ये तो

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आज मौसी का छोरा आ रया था … माँ नै जांदी हाण उस्तै सौ रपइए दिए प्यार के …
मन्नै बाहर लिक्ड़दे ई हेर लिआ … ओ कुत्ते गाजरपाक खुआ कै जा ,

हे प्रभू मेरे इस गुनाह को माफ करना वो भी मेरी गैल ऐसे इ करता है जी

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पूनम : कोई आवाज दे है बाहर गेट पै , देखियो ।
अनिल : कौण है ?
पूनम : मैं ना पिछाणती
अनिल : अच्छा , रुकण की कह , मैं आऊं हुँ बाहर नै ।
एक तै इस घर मैं कुछ मिलता नी बख्त पै , मेरी घड़ी कित गई इब ?
किसे काम की नहीं या लुगाई , कोय चीज ठिकाणे पै नी पाती , बेरा ना के करती रह है सारे दिन बैठ्ठी बैठ्ठी ।
किस्मत फूट गी मेरी जो या पल्लै पड़ी ।
पूनम : तू पहल्या कोस ले अपणी किस्मत नै जी भर कै, तन्नै तो ज्युकर जीवन सफल कर दिया मेरा , तन्नै पा कै तो सारी इच्छा पूरी होगी मेरी ।
मौका मिलते ए जहर काढण लाग ज्या अपणा , कदे मिठास भी आया है इस जबान पै मेरे नाम का ??
इतणे मैं दुबारा किवाड़ खुड़कै है …..
अनिल : आऊं हूँ , आऊं हूँ , शांति राख ।
“नारंगी पीला सूट पहरे एक सुथरा सा चेहरा, जमीन मैं नजर ग़ाड्डे खड़ा था ।
ज्युकर कुछ छिन ग्या हो उसका”
अनिल : जी बोलो ,
पिछाणे नी आप !!
“उसकी आंख ईब भी जमीन पै थी, ज्युकर कुछ
उकेरणा चाहती हो, उस संगमरमर के धोले फर्श पै ।”
ब्होत हिम्मत जुटा कै वा उप्पर लखाई ।
अनिल : सुमन तू !!
“इस बोल के पाछै जो सन्नाटा ब्यखरा , उसकी चीख मैं , वे सारे ‘घा’ जो भर कै , नई खाल मैं ढल गे थे, एक बार फेर हरे हो गे ।”
” वो घर का गेट एक सीमा रेखा मैं बदलग्या ।”
“एक पासै रिवाजां की रस्सी तै गांठ मार कै गला घोंटी होई गृहस्थी थी और दूसरे पासै बख्त अर झूठे अहंकार की मार खाया होया प्यार।”
“बसी होई गृहस्थी मैं अलगाव का विलाप था अर उजड़े होए , दीमक के खाए होए प्यार मैं सुकून।”
“करुणा तै एक जीसी थी दोनूं पासै , बस बख्त सही ना था।”
“दिल के स्वार्थ नै गृहस्थी के किवाड़ लात मार कै बंद कर दिए थे ।”
अहमद फ़राज़ साहब की ग़ज़ल का यो शेर ब्होत सही लागै है आडै :
” रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ …
तू फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ “

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दो आदमियों की बीवीयाँ मेले में खो गईं।
:
जिसमे से एक हरियाणा से था, और एक दिल्ली से।
:
अपनी – अपनी बीवी ढूंढते हुए वो आपस में मिले।
:
हरियाणा वाले ने दिल्ली वाले से पूछा..? तुम्हारी बीवी की पहचान क्या है..?
:
दिल्ली वाला बोला -> कद 5’7″, गोरी, भूरी आँखें और पतली है, स्लीवलेस पिंक टी-शर्ट और लाल मिनी स्कर्ट पहने है।
:
तुम्हारी बीवी की क्या पहचान है..?
:
हरियाणा वाला -> मेरे आली कै मार गोली, चाल तेरे वाली को ढूंढते है।

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जाट…… दिल्ली चला गया
रेलवे स्टेशन पै अखबार वाले से bola
एक अखबार देना…
.
.
अखबार वाला-हिन्दी या अंग्रेजी ka
.
.जाट ….. भाई कोईसा दे दे
मने तो रोटी लपेटनी है|

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थोड़ी कड़वी लागैगी … छोह मैं मतना आइओ …
म्हारे देस मैं घणखरी छोरियां स्कूल कॉलेज मैं ऐडवांस पणे का रोला करैं अक हमनै कुछ भी बोलण की अजादी चइए , कुछ बी पहरण की अजादी चइए , कंही बी अकेले आण जाण की अजादी चइए , किसी के साथ बी कैसा बी सबंध बणान की अजादी चइए …
अर याए छोरियां ब्याह पाच्छै अपणे पति का मोबाइल तो के जुराब तक सूंघ मारै अक कित कित गया था अर किस किस तै मिलया था आज सारा दिन .

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म्हारे गाम का सुक्की वेहला ब्याह खात्तर छोरी देखण मन्नै अपने गैल्यां ले ग्या …

छोरी के सारे घर के बैठे थे , छोरी चाय लेकै आई अर सामने बैठगी … सुक्की थोड़ी हाण छोरी कान्नी देखकै छोरी के बाब्बू तै बोल्या :- अंकल जी है तो या बी ठीक पर इस्तै बढ़िया कोई और हो तो वा बी दिखा द्यो ……..

या सुन्दे ई मैं तो औढ़े तै अंतरध्यान हो ग्या …
सुक्की गैल्यां के बणी पाच्छे तै या तो वो होस मैं आण के बाद बतावैगा … आई सी यू मैं बेहोस पड़या फिलहाल तो

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एक लड़की क पेट म दर्द होग्या अर वा डाक्टर धौरै गई…
डाक्टर :- रात नै के खाया था?
छौरी :- रात को मैंने हैमबर्गर, फ्राइड राईस, कार्न पिज्जा, चिल्ली पनीर और थोड़ी चिल्ड कोक ली थी।
डाक्टर :- फेसबुक कोन्या यो, साच्ची बता के खाया था?
छौरी :- जी, बथुऐ का रायता

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माँ का जन्मदिन है आज …
उस्नैं तो याद बी ना था … मन्नैं सोच्ची अक अपणी भोली माँ तै सरप्राइज द्युंगा आज … घरां जाकै सारे घरके कट्ठे कर लिए अर माँ तै बोल्या :- हैप्पी बर्थडे माँ … या केक पै मोमबत्ती जलाऊं हूं आप मोमबतियां कै फूंक मार कै केक काटो … अर और के गिफ्ट चइए आपनै …

माँ बोली :- रै तूं इस केक पै धर कै अपणा मोबाइल फूंक दे याए मेरा गिफ्ट सै ,

सबके स्यामी मेरा हैप्पी बर्डे कर दिया … खैर माँ तो माँ होती है

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