ताऊ आपणे डांगरा नै ले के खेत में तै आण लाग रह्या था अर
इतने में एक मोड्डा आ ग्या अर उस नै देख कै सारे डांगर बिदक
( डर ) गे, ताऊ बोल्या ओ मोड्डे एक ओड़ नै हो ले मेरे डांगर
डर रे हैं तेरे तै ?
मोड्डा बोल्या- अरे बच्चा तुम्हें बोलने की अक्ल नहीं है, हमें
स्वामीजी कह कर बुलाते हैं,
ताऊ कै छोह उठ ग्या अर बोल्या – एक ओड नै मर ले, एक लठ
लाग ग्या तो मोड्डे तै भी जावैगा

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नाक अर होंठ के बीच की जगाह नै के कए करैं ?
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मुच्छां की पार्किंग

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एक बरात किराए पै लिए हवाई जाहज मैं मुम्बई जा थी …

एलियनस नै वा जाहज हाईजैक करकै प्लूटो ग्रह पै रख दिया …

जंहा जाड्डे का राज … माइनस साढे चार सौ डिगरी पै राज कर रया … कोए जीव तो के घास बी ना उगण दे था अगला …

औढ़े जहाज तै उतर कै स्लिवलैस सूट पैहरी छोरियां रुक्के देण लाग्गी … कम ऑन गर्लस लैटस डांस .. पर या डी जे कित सै …

जाड्डा बोरिया बिस्तर बांध कै राम जी धौरै चल्या गया बोल्या … प्रभू मेरा इस्तिफा स्वीकार करिए अब मेरे अंदर वो पहले जैसी बात नही रही …

राम जी बोल्ले … भाई तूं ड्युटी कर अपणी … ये छोरी हरियाणे की हैं इनका जाड्डा कुछ ना बिगाड़ सकता ये वरदान मेराए दिया होड़ सै

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पूनम : कोई आवाज दे है बाहर गेट पै , देखियो ।
अनिल : कौण है ?
पूनम : मैं ना पिछाणती
अनिल : अच्छा , रुकण की कह , मैं आऊं हुँ बाहर नै ।
एक तै इस घर मैं कुछ मिलता नी बख्त पै , मेरी घड़ी कित गई इब ?
किसे काम की नहीं या लुगाई , कोय चीज ठिकाणे पै नी पाती , बेरा ना के करती रह है सारे दिन बैठ्ठी बैठ्ठी ।
किस्मत फूट गी मेरी जो या पल्लै पड़ी ।
पूनम : तू पहल्या कोस ले अपणी किस्मत नै जी भर कै, तन्नै तो ज्युकर जीवन सफल कर दिया मेरा , तन्नै पा कै तो सारी इच्छा पूरी होगी मेरी ।
मौका मिलते ए जहर काढण लाग ज्या अपणा , कदे मिठास भी आया है इस जबान पै मेरे नाम का ??
इतणे मैं दुबारा किवाड़ खुड़कै है …..
अनिल : आऊं हूँ , आऊं हूँ , शांति राख ।
“नारंगी पीला सूट पहरे एक सुथरा सा चेहरा, जमीन मैं नजर ग़ाड्डे खड़ा था ।
ज्युकर कुछ छिन ग्या हो उसका”
अनिल : जी बोलो ,
पिछाणे नी आप !!
“उसकी आंख ईब भी जमीन पै थी, ज्युकर कुछ
उकेरणा चाहती हो, उस संगमरमर के धोले फर्श पै ।”
ब्होत हिम्मत जुटा कै वा उप्पर लखाई ।
अनिल : सुमन तू !!
“इस बोल के पाछै जो सन्नाटा ब्यखरा , उसकी चीख मैं , वे सारे ‘घा’ जो भर कै , नई खाल मैं ढल गे थे, एक बार फेर हरे हो गे ।”
” वो घर का गेट एक सीमा रेखा मैं बदलग्या ।”
“एक पासै रिवाजां की रस्सी तै गांठ मार कै गला घोंटी होई गृहस्थी थी और दूसरे पासै बख्त अर झूठे अहंकार की मार खाया होया प्यार।”
“बसी होई गृहस्थी मैं अलगाव का विलाप था अर उजड़े होए , दीमक के खाए होए प्यार मैं सुकून।”
“करुणा तै एक जीसी थी दोनूं पासै , बस बख्त सही ना था।”
“दिल के स्वार्थ नै गृहस्थी के किवाड़ लात मार कै बंद कर दिए थे ।”
अहमद फ़राज़ साहब की ग़ज़ल का यो शेर ब्होत सही लागै है आडै :
” रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ …
तू फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ “

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एक बहु गोबर गेरण जावे थी —
एक जणा गाल म्ह दारू पी रया था अर
बहु त बोल्या :- माणस सेटिंग कर ले न
,बहु नाट गी , अर जाके न घरां बता दी !
पंचायत होई —
गाम का चौकीदार उनके गया अर जाके बोल्या :-
चाल र तन्ने पंचायत म्ह बुलावें है —
तन्ने फलाणे की बहु छेड़ दी चाल फैसला होवेगा पंचायत म्ह !
न्यू बोल्या :- ना भाई साहब हो लिया था फैसला तो , वा तो उड़े ऐ नाटगी थी

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ब्रेकिंग न्यूज ::- आज शहर में एक दिल दहला देने वाली हृदय विदारक घटना घटित हुई …

कुछ व्यापारी एक जाने माने होटल में एक दोस्त के जन्म दिन की पार्टी में पीते हुए नाच कूद रहे थे …

तभी कोई आसामाजिक शरारती तत्व जोर से चिल्लाया …. मितरोंooo

ये सुनते ही दो व्यापारियों के हाथ से शराब का गिलास छूट गया एक व्यापारी को हार्ट अटैक आते आते बचा … फिर सब व्यापारी मुह लटका के बैठ गए … 😏😏😏

बस रै मितरों मैए … अर जे आग्गै भाइयोरबैनोंooo बी बोल देंदा तो के बन्दा थारा

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म्हारी म्हैस नै तीन दन होगे , रोज सांज नै बोलै अक आज रात ब्याउंगी … सारी रात उसके सिराहणे बैठे रवां दो तीन जणे कम्बल सोड़ औढ़ कै … अर तड़की फेर दांदरे काड्ढ कै दिखा दे है … अक इबी मूढ नाहै … 😬😬

हद ऐ यार मतबल … डांगर बी जाड्डे मैं सुआद लेरे हैं …

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छोटी बहन बड्डी तै :- या छोरी हर जन्म मैं एक इ पति क्यों मांगै सैं … 😩
बड्डी :- ए बेब्बे हर जन्म नंवे गधे नै ट्रेनिंग कौण दे … 😗

( छोरियां तो इस पोस्ट नै पढ़ कै खुसी के मारे गिद्दा लावणी भरत नाट्यम सब किमै नाच लेंगी …

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एक बै एक चौधरी साहब की लाटरी लाग गी, अर लाटरी भी थोड़ी नहीं, पूरे 50 करोड़ की लागी। पूरे गोहान्ड मै रुक्का पङग्या अर मीडिया आले चौधरी कै पाच्छै पाच्छै चक्कर काटैं। एक मीडिया आला चौधरी कै मुह आगै माईक लगा कै बोल्या :-

चौधरी साहब। आप नै के बेरा लाग्या के इस नम्बर पै ऐ लाटरी लागै गी?

चौधरी :- जब मैं पहली रात नै सोया तो मन्नै सूपने मैं 16 दिख्या।। अर दूसरी रात नै सोया तो सूपने मै 2 दिख्या।। मन्नै 16 अर 2 की गुणा करकै 8 नम्बर पै लाटरी लगा दी।।

मीडिया आला ( अचम्भे मै ) :- रै चौधरी साहब। यो के कर्या आप नै। 16 अर 2 की गुणा तो 32 होव सै।।

चौधरी साहब :- रै बावलीबूच। तेरै हिसाब तै चालदा तो लाग ली थी लाटरी।।

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आज ताऊ जी गाम तै शहर आरे थे किसी काम तै , साथ मैं उनके तीन दोस्त और थे … काम निम्टा कै म्हारे तै मिलण आगे पापा घर ना थे मन्नैं इज्जत सत्कार तै बैठक मैं बिठाए …

थोड़ी हाण मैं माँ की अवाज आई रसोई मैं तै :- आइए बेट्टा …

मैं गया … माँ बोली :- रुह अफजा बणाई है , या जग अर एक गलास लेजा …

एक गलास … मैं थोड़ा हैरान हो कै बोल्या … चार गलासां मैं घाल दे ना माँ ट्रे मैं रखकै ले जांउगा …

ले कै जा … माँ नैं घुड़की मारी

बुरा सा मुंह बणाकै जग अर गलास ले कै गया …
ताऊ जी के जो दोस्त पहल्ड़े कान्नी बैठे थे … उन्तै गलास मैं घाल कै दिया रुह अफजा … पीकै उन्होनै फेर गलास आगै कर दिया … फेर एक … फेर एक

पूरा जग निम्टा दिया …

मैं रसोई मैं जाकै माँ तै बोल्या :- माँ या सारा जग तो एक ताऊ जी पी गए …

माँ मुस्करा कै बोली :- मन्नै पता था … बेट्टा गाम आले जब मेहनत करदे हाण नां शर्मांदे तो खाण पीण मैं बी वे गिण्ती ना करया करदे … मैं बी गाम की हूं … तेरे मामा हर कदे आवैंगे तो देखिए वे इनके बी ताऊ हैं … या दूसरा जग ले जा जब तक मैं तीसरा जग तयार करुं …

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थोड़ी टैंसन सी होरी थी दोस्तो … मन्नैं पता है दारू हल ना है …
पी ली और पिऊंगा ,कौए साथ बैठ ज्यो रै मेरे

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एक जाट की छोरी के ब्याह मैं फेरे
होण लाग रे
थे |
पण्डितआँख मींच क मंतर पढ़ क
बोल्या “ॐ गन गणपते नमह |
51 रुपे दक्षिणा समर्पियामी ”
नु कह क जाट त बोल्या धर 51 रुपे
गणेश जी प
| जाट ने 51 रुपे धर दिए |
फेर आँख मीच क और मन्त्र पढ़न लगगया |
थोड़ी हान पाछे फेर बोल्या “ॐ गन
गणपते
नमह |
101 रुपे दक्षिणा समर्पियामी ”
धरो 101 रुपे गणेश
जी प |
जाट ने 101 रुपे धर दिए | फेर आँख
मीच क और
मन्त्र पढ़न लगगया |
थोड़ी हान पाछे फेर बोल्या “ॐ गन गणपते
नमह |
151 रुपे दक्षिणा समर्पियामी ”
धरो 151 रुपे
गणेश
जी प | जाट ने 151 रुपे फेर धर दिए |
पण्डित आँख मीच क और मन्त्र पढ़न
लगगया | जाट नै सोची भी पंडित

कत्ती लूट क छोड़े गा |
इब के ने जाट ने गणेश जी की मूर्ति ठा क जेब में
रख
ली |
पंडित फेर बोल्या “ॐ गन गणपते
नमह |
201 रुपे दक्षिणा समर्पियामी ” धरो 201 रुपे
गणेश जी प अर
आँख
खोल क
देख्या; त गणेश जी गायब थे | पंडित
बोल्या –
चोधरी साहब ये गणेश जी कित गए
| जाट बोल्या – पंडित जी देश मे और
भी त ब्याह
सं
एकला मेरी बेटी काये थोडा स |
हो सके स किसे और के फेरां प चले
गए हों.

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आज की शोले …

कालिया हरयाणवी होंदा तो … 😎😎

गब्बर :- कितने आदमी थे … टूंऊंऊंऊंऊं ( बैकग्रांऊड सांउड )

कालिया :- सरदार चालिस पचास तो होंगे गिणे ना ,

गब्बर :- ओ बकलोल न्यु कए करैं सरदार दो ,

कालिया :- आहो साले अर फेर तूं हमनै हंसा हंसा कै गोली मार दिए … तेरे फुफ्फे वे गाम आले बी तो थे उन गैल्यां …

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एक मैडम नै घणी वार सब्जी आले गैल्यां तुंतुं मैंमैं करी फेर उसके धौरै खड़े होकै एक सैल्फी लेकै फेसबुक पै पोस्ट करदी …

Fighting with सब्जीवाला ,
Feeling …. छौ ,
He is too much लुटेरा ,
Never purchase सब्जी from this डाकू ,
Every body पिछान लो ..

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मुस्कला एक शायरी याद करी थी छोरी फ़सान ताई। अक “एक पल में जान, जिस्म से कैसे जुदा होती है” या बात मन्ने कही तो अपणि सोड म थी। पर मेरे बाब्बू न बेरा ना क्यूकर सुणगी
फेर बाब्बू न बताई कोहणि मार मार के अक एक पल म जान जिस्म से कैसे जुदा होती है। इतने भूंडे भी कोई मारया करे। …!!

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ट्रेन मैं एक मॉडर्न ख्याल की छोरी मेरे साथ टाइमपास खात्तर बातचीत कररी थी बात बात मैं बोली :- ये जो smoking करते हैं ना , I hate thos kind of men ,

मै बोल्या … सही बात है आपकी ऐसे लोग अपने साथ साथ आसपास वाले लोगों के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ करते हैं … और आजकल तो लड़कियां भी सिगरेट शराब पीने लगी हैं पता नही समाज किस ओर जा रहा है …

जब्बे बिफरगी :- how dere you … आप कौन होते हैं औरत की पसंद नापसंद में दख़ल देने वाले , आप जैसे मनुवादियों की सोच ने औरतों को हजारों साल से गुलाम बना के रखा है …

आस पास के लोग मेरे कान्नी न्यु देखण लागगे जणो मन्नै छोरी छेड़ दी

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