एक भाई एक तीस मंजिल बिल्डिंग की छत पै बैठ्या था …
जब्बे किसे नै आकै उसतै रुक्का दिया … औ परकासे तेरी बहू तेरे पड़ोसी राजबीर गैल्यां भाजगी …
दिल टूट ग्या माणस का अर घणी बेज्जती बी फील कर ग्या … बस दुख मैं उपर तै छाल मारदी ,
पच्चिसवीं मंजिल धौरै उसके ध्यान आई … अक मेरे पड़ोस मैं तो कोए राजबीर ना रैहता …
बीसवीं मंजिल पै दिमाग मैं आया अक रै मेरा तो ब्याह ए ना हो रया …
दसवीं मंजिल तक याद आया … ओ तेरी बेब्बे कै मेरा नाम तो सरेंदर है … या परकासा कौण है … ???
हट मेरे यार … तो मिसटर सरेंदर आपका समय समाप्त होता है … अब

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रस्ते कांट्यां भरे हों तो बाब्बु भाई यार दोस्त कोए साथ ना देता …
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ऐसे मोके पै अपणी चप्पल ए काम आवै …
हर बार इमोसनल होणा जरुरी है के

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आज ताऊ जी गाम तै शहर आरे थे किसी काम तै , साथ मैं उनके तीन दोस्त और थे … काम निम्टा कै म्हारे तै मिलण आगे पापा घर ना थे मन्नैं इज्जत सत्कार तै बैठक मैं बिठाए …

थोड़ी हाण मैं माँ की अवाज आई रसोई मैं तै :- आइए बेट्टा …

मैं गया … माँ बोली :- रुह अफजा बणाई है , या जग अर एक गलास लेजा …

एक गलास … मैं थोड़ा हैरान हो कै बोल्या … चार गलासां मैं घाल दे ना माँ ट्रे मैं रखकै ले जांउगा …

ले कै जा … माँ नैं घुड़की मारी

बुरा सा मुंह बणाकै जग अर गलास ले कै गया …
ताऊ जी के जो दोस्त पहल्ड़े कान्नी बैठे थे … उन्तै गलास मैं घाल कै दिया रुह अफजा … पीकै उन्होनै फेर गलास आगै कर दिया … फेर एक … फेर एक

पूरा जग निम्टा दिया …

मैं रसोई मैं जाकै माँ तै बोल्या :- माँ या सारा जग तो एक ताऊ जी पी गए …

माँ मुस्करा कै बोली :- मन्नै पता था … बेट्टा गाम आले जब मेहनत करदे हाण नां शर्मांदे तो खाण पीण मैं बी वे गिण्ती ना करया करदे … मैं बी गाम की हूं … तेरे मामा हर कदे आवैंगे तो देखिए वे इनके बी ताऊ हैं … या दूसरा जग ले जा जब तक मैं तीसरा जग तयार करुं …

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भूंडू के भीरे कै लट्ठ लाग्गे आज … 😝😝😝
एक टैंट आली दकान पै लिख राख्या था …. यंहा ब्याह शादी का सब सामान मिलता है ,
जाकै बोल्या हां जी सेठ जी एक बढ़िया सी छोरी दिखाओ ब्याह खात्तर …
टैंट आली दरी मैं लपेट कै कुट्या मेरा साला … 😜😜
पाँच मिन्ट पाच्छै चूचे की ढाल दरी मैं तै गरदन बाहर लिकाड़ कै बोल्या … हां बइ फीजिकल फैल होया मेरा अक पास …
फेर दुबारा फीजिकल टैस्ट शुरु कर दिया … उसके सुसराड़ आल्यां नै

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एक छोरे नै एक सिगरेट का पैकेट लिआ उसपै लिख राख्या था सिगरेट पीने से कैंसर होता है
वा दुकानदार तै बोल्या … भाई कोई दुसरी चेतावनी आला पैकेट ना है
दुकानदार नै दूसरा दे दिआ उसपै लिख्या था … सिगरेट पीने वाले को नामर्द होने का खतरा रहता है ,
पैकेट उल्टा देकै बोल्या … यार तूं वा कैंसर आला ए पैकेट देदे ..

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ओ हवनकुंड, भक्तों का झुंड
सुनसान रात, सब साथ-साथ
सुन मन की बात, रख दिल पे हाथ
बोलो त्या थिलेदाआआआ …
तमल थिलेदा… तमल थिलेदा…तमल थिलेदा… 😎😎

जोकिंग अवेएएए ..

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पत्थर उठा के मारते हैं मेरे ही मुझको …

दीवाना हो गया हूं मैं … देख के तुझको ,

तूं खुद भी खुद के जलवे से अंजान है शायद …

तिरछी नजर से आइने में देख तो खुद को

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दिल्ली की छोरी हरियाणवी फोटोग्राफर का मजाक उड़ान खात्तर बोली :- अंकल पासपोर्ट साइज फोटो खींच दो पर उसमें मेरे नाइक के शूज भी आने चाहिए …

एक तो फरमाइश खतरनाक दूसरा सम्बोधन ( अंकल ) उस्तै खतरनाक पर छोरा हरयाणवी था बोल्या :- ठीक सै जूते सिर पै धर कै खड़ी होजा …

छोरी बेज्जती सी फील करगी … दूकान के बाहर छोरे का बाब्बु बेठ्या था उसनै उस्ते शकैत लाई …

पूरी रामकहानी सुण कै बाब्बु बोल्या :- किम्मे ना बेट्टी यो नंवा नंवा काम सिख्या है … तूं न्यू कर उकड़ू बैठ कै खिचवाले .

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करनी सेना कवै … जे कोए म्हारी लड़की कान्नी लखा ग्या तो खड़या लट्ठ बाजैगा …

सुप्रीम कोर्ट :- देखिए अब मूवी का नाम लड़के वाला रख दिया है … अब देख सकते हैं …

सूप्रीम कोरट साब आपनै तो बोल दिया देख सकते हैं वा जो हात्थां मैं लट्ठ ठाए घूमरे उनके मुंह तै कवाओ जी … क्यों जन्ता की चुतड़ी तुड़वाण आले काम कर रे हो

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एक होए करैं बेसुरे सिंगर …
एक होए करैं बेहुदे सिंगर …
फेर आवैं वे बेवड़े सिंगर जो रात साड्डे यारां बजे इमोशनल हो कै बची खुची गर्ल फ्रैंड तै फोन पै नशे मैं गल्त सल्त गाणा सुणा कै बचे खुचे रिलेशन का बी ब्रेकअप कर कै बैठ जां हैं … ओ रै लक फोर्टी एट कुड़ी दा … भाई रै एटी सेवन वेट कुड़ी दा … हट जा ताऊ पाच्छे नै मेरी डार्लिंग नाचैगी …

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हाऊ क्या होता है …???

एक छोरी अपणे तीन साल के भतीजे तै बहका कै उसके हाथ मैं पकड़ी टॉफी खागी …
अर बोली … अले लेले मुन्ना की टॉफी हाऊ ले ग्या … 😂😗

मुन्ना के ज्ञान चक्षू जब्बे खुलगे अक हाऊ चुड़ैल तै कए करैं

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टीचर :- अपनी माँ की तारीफ मैं एक ऐस्से लिखो ,

छात्र :- सर दुनिया मैं वा स्याई ना बणी जो मेरी माँ के गुण लिख सकै …

टीचर :- ओह … तो बेट्टा बाब्बू के बारे मैं लिख दे कुछ ,

छात्र :- सर जी वा कागज इ ना है सृष्टी मैं जिसपै मेरे बाब्बू की महानता लिखी जा सकै …

मास्टर जी की आंख्यां मैं पाणी आ गया छोरे तै गले लाकै बोल्या :- वाह रै महान आत्मा मनैं गर्व है तेरे पै … बड़ा हो कै के बणैंगा …

महान आत्मा बोल्या :- जी मास्टर जी बड़ा होकै नेता बणूंगा अर बिना कुछ करे धरे न्युए बड़ी बड़ी बात करकै लोगां का फद्दू बणाउंगा अर ऐश करुंगा ..

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म्हारे ताऊ ना देखदे वकत बी मन की आई जब्बे कह दे हैं …
एक ताई मरगी उस्तै शमशान लेजण खात्तर ठाण लाग्गे तो उसकी तीन बहू उस्तै लिपट कै रोरो कै फंड करण लाग्गी … ए मां हमनै बी ले जा तेरी गैल्यां हम बी चालांगी ,
ताऊ पै ना डट्या गया बोल्या :- गैल्यां ले जण नै के उसनै टाटा सूमो कर राक्खी जो थम्नै बी बिठा ले जागी … थम ठाओ रै फेर मन्नै आकै धार बी काडणी है ,
Be practical like ताऊ

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एक घणी सुथरी छोरी किराने की दुकान पै जाकै बोल्ली :: लाला जी लिपटन की चा है के … 😗😗
लाला जी बोल्या :: ना बेब्बे चा पत्ती तो खतम होगी ,
थम के सोच्चो थे लाला के कवैगा … लुच्चे कट्ठे होरे बइमान … 😂😅😜
जो.इसका मतलब समज रे हैं वे तो मजे लेरे जिसनै ना समज आई वे किसे तै टैग कर कै पूछ ल्यो … लुच्चे तो घणे हैं .

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म्हारे देस मैं लोग घणे कोपरेटिव सी नेचर के मतबल भुरभुरे से स्भाव के हैं …
इब देख ल्यो किते कोई जे सी बी नाला साफ कररी हो तो पोणे दो सौ माणस बैठ कै न्यु देखैं जणु अंदर तै कौई नेता जी लिक्ड़ आया तो नारे लाणे पड़ सकैं …
एक आदमी तै रास्ता पुच्छो सात बताणा शरु कर दे हैं अर थारी गाड्डी मैं जगाह हो तो गंतव्य स्थल तंई होम डिलीवरी कर कै भी आ सकैं हैं …
ड्राइवर ट्रक बैक कर रया हो तो वंहा खड़े हर एक प्राणी का संवैधानिक कर्तव्य बण जा है के वो पूरी तन्मयता तै आण दे आण दे करै … ना तै ट्रक भिड़ ग्या गल्ती तै तो मकोका लाग सकै है … 😅😅😂😂
सुप्रभात दोस्तो मस्त रहो हंसते रहो

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पूनम : कोई आवाज दे है बाहर गेट पै , देखियो ।
अनिल : कौण है ?
पूनम : मैं ना पिछाणती
अनिल : अच्छा , रुकण की कह , मैं आऊं हुँ बाहर नै ।
एक तै इस घर मैं कुछ मिलता नी बख्त पै , मेरी घड़ी कित गई इब ?
किसे काम की नहीं या लुगाई , कोय चीज ठिकाणे पै नी पाती , बेरा ना के करती रह है सारे दिन बैठ्ठी बैठ्ठी ।
किस्मत फूट गी मेरी जो या पल्लै पड़ी ।
पूनम : तू पहल्या कोस ले अपणी किस्मत नै जी भर कै, तन्नै तो ज्युकर जीवन सफल कर दिया मेरा , तन्नै पा कै तो सारी इच्छा पूरी होगी मेरी ।
मौका मिलते ए जहर काढण लाग ज्या अपणा , कदे मिठास भी आया है इस जबान पै मेरे नाम का ??
इतणे मैं दुबारा किवाड़ खुड़कै है …..
अनिल : आऊं हूँ , आऊं हूँ , शांति राख ।
“नारंगी पीला सूट पहरे एक सुथरा सा चेहरा, जमीन मैं नजर ग़ाड्डे खड़ा था ।
ज्युकर कुछ छिन ग्या हो उसका”
अनिल : जी बोलो ,
पिछाणे नी आप !!
“उसकी आंख ईब भी जमीन पै थी, ज्युकर कुछ
उकेरणा चाहती हो, उस संगमरमर के धोले फर्श पै ।”
ब्होत हिम्मत जुटा कै वा उप्पर लखाई ।
अनिल : सुमन तू !!
“इस बोल के पाछै जो सन्नाटा ब्यखरा , उसकी चीख मैं , वे सारे ‘घा’ जो भर कै , नई खाल मैं ढल गे थे, एक बार फेर हरे हो गे ।”
” वो घर का गेट एक सीमा रेखा मैं बदलग्या ।”
“एक पासै रिवाजां की रस्सी तै गांठ मार कै गला घोंटी होई गृहस्थी थी और दूसरे पासै बख्त अर झूठे अहंकार की मार खाया होया प्यार।”
“बसी होई गृहस्थी मैं अलगाव का विलाप था अर उजड़े होए , दीमक के खाए होए प्यार मैं सुकून।”
“करुणा तै एक जीसी थी दोनूं पासै , बस बख्त सही ना था।”
“दिल के स्वार्थ नै गृहस्थी के किवाड़ लात मार कै बंद कर दिए थे ।”
अहमद फ़राज़ साहब की ग़ज़ल का यो शेर ब्होत सही लागै है आडै :
” रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ …
तू फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ “

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