न्यू सोचूं था अक आज एक महान रचना लिखूंगा पेज के दोस्तां तंई …

की बोर्ड पै बैठ्या ए था , माँ की अवाज आई … रै जाइए मड़ा दानें पिसवा ल्या …

एरी माँ तेरे मड़े दानेयां के चक्कर मैं आज फेर दुनिया एक महान रचना पढ़ण तै चूकगी … 😏😏😏

हर महान रचनाकार की राह में रोड़े उसके परिवार वाले ही बिछाते हैं … सइ बात है … हुंह … एकबै फेर हुंह …

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मुस्कला एक शायरी याद करी थी छोरी फ़सान ताई। अक “एक पल में जान, जिस्म से कैसे जुदा होती है” या बात मन्ने कही तो अपणि सोड म थी। पर मेरे बाब्बू न बेरा ना क्यूकर सुणगी
फेर बाब्बू न बताई कोहणि मार मार के अक एक पल म जान जिस्म से कैसे जुदा होती है। इतने भूंडे भी कोई मारया करे। …!!

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बाब्बू :- ओ कुत्ते …
बेट्टा :- हां बाब्बू …

मां :- थम दोनूं लिक्ड़ो इस घर तै बाहर गली मैं भौंको जाकै … 😬😬

What a गजब की family .

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लड़की – तुम्हारा निक नेम क्या है ?
लड़का – ये क्या होता है ?
लड़की – अरे तुमको घर सब
किस नाम से बुलाते हैं
लड़का – डाकि

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गाजर का हलवा बनाने के लिए महिलाएँ 1200 रू/किलो काजू
800 रू/किलो बादाम और ड्राई फ्रूट और 700 रुपये किलो देसी घी सब खरीद लेंगी.
लेकिन गाजर जब तक दस रूपये की डेढ़ किलो ना हो जाये
तब तक हलवा बनाने का प्रोग्राम पेंडिंग ही रखती हैं

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8 दिन हो गए थे लगातार इनबॉक्स में हाय हेल्लो होते। किते ना किते उसका भी जी करे था मेरे त बात करण का अर किते ना किते मैं भी बाट देखू था उसके मैसज का सारी हाण। फेर के था नोम्मा दिन आ गया जुकर त उसका मैसज आया जमा गेला गेल मन्ने रिप्लाई करा मखा के ढंग स। वा भी स्माइली घणी भेजे थी बात कम करे थी। फेर बात इतनी बढ़ गी थी ईब अक भीतरले मैं कुलकली रहण लाग्गी जब तैई बात ना हो ले किसे काम का जी ना करे। फेर एक दिन उसने बुला ऐ लिया तडके तडक मिलण खातर। ईब तडके तडक मीठी मीठी ठण्ड। अर वा मेरे स्यामी। मेरा कसूता जी कर रया अक कोळी भर ल्यू अर जब तैई घाम ना लिकडे छोड्डूए ना। फेर वा न्यू बोल्ली मन्ने तेरे त कुछ कहणा है। मन्ने कान करा उसके होठां कहनी। आवाज आयी
र बेटीचो* के यो काटडू खुला गया सारी धार चूँघ गया। खड़ा हो ले चुतड़ा प घाम आ लिया। बाब्बू न सारे सपने की इसीतीसी करदी।

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. भाई तेरे भतिजे नै प्लस टू फ्रस्ट कलास तै पास करली , ईब आगै के कराऊं … ?

… भाई न्यू कर उसतै बी टैक करादे , यां ऐम बी ए करलेगा … दिमाग तो बढ़िया है बेट्टे मैं ,

… फेर भाई ये कोरस करे पाच्छै बढ़िया जॉब पाजागी नै … ?

… ना यार जॉब का चक्कर ना है जिसकी रेहड़ी पै जितनी बड़ी डिग्री टंगी पावैगी उसके पकोड़े उतने जादा बिकैंगे … इब ये मैट़्रिक प्लस टू आल्यां के पकौड़े ना खरिदने का कोई , कम्पिटिसन का जमाना है भाई …

जा रै थारी … इनकी बेब्बे कै पकौड़े मारुं ..

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एक अस्सी साल के बुजरग नै बुढ़ापे के अकेले पण तै तंग आकै एक सत्तर साल की विधवा गैल ब्याह कर लिआ …
सुहागरात नै बेगम धोरै गया अर … उसका हाथ पकड़ कै सो ग्या …
दूसरी रात बी याए काम करया बुढ़िया का हाथ पकड़ कै सो गया …
तीसरी रात बी …
चौथी बी …
पांचवी रात हाथ पकड़न लाग्या तो बुढिया बोल्ली … आज मेरी तबियत कुछ ठीक नाहै जी … आज रैहण दो प्लीज

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आज मैं सोनीपत जा रया था, उड़ै मन्नै एक गरीब आदमी मिल्या, मन्नै उस्तै आपणा फ़ोन, सोने की चैन अर बटुआ में जो 5-7 हज़ार रपिये पड़े थे, सब दान कर दिए..

वो आदमी भोत खुश होया
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अर उसनै पिस्तौल उल्टी ए आपणी गोझ में घाल ली

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बेट्टा :- मां आज ना बाब्बू कामआली तै बैडरूम मैं पोट्टी करण की कवै था …😩

बाब्बू के अपणी लुगाई के स्यामी तोत्ते से उड़गे बोल्या :- ओ हरामजादे मन्नै कद कई थी … 😡

बेट्टा :- आच्छया तूंए ना तड़की बैड पै पड़या पड़या उसतै बोल रया था मेरी जान वैलेनटांइन चल रया आजा हग दे ..

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स्टोर रूम की सफाई करदी हाण जब लास्ट लकड़ी का बक्सा ठाओ तो कूण मैं तै एक मुस्सी लिक्ड़ कै भाज्या करै …
आजकल ऐसे ऐसे बालक बी फेसबुक पै शेर बणे हांडैं हैं ..

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एक जाट की छोरी के ब्याह मैं फेरे
होण लाग रे
थे |
पण्डितआँख मींच क मंतर पढ़ क
बोल्या “ॐ गन गणपते नमह |
51 रुपे दक्षिणा समर्पियामी ”
नु कह क जाट त बोल्या धर 51 रुपे
गणेश जी प
| जाट ने 51 रुपे धर दिए |
फेर आँख मीच क और मन्त्र पढ़न लगगया |
थोड़ी हान पाछे फेर बोल्या “ॐ गन
गणपते
नमह |
101 रुपे दक्षिणा समर्पियामी ”
धरो 101 रुपे गणेश
जी प |
जाट ने 101 रुपे धर दिए | फेर आँख
मीच क और
मन्त्र पढ़न लगगया |
थोड़ी हान पाछे फेर बोल्या “ॐ गन गणपते
नमह |
151 रुपे दक्षिणा समर्पियामी ”
धरो 151 रुपे
गणेश
जी प | जाट ने 151 रुपे फेर धर दिए |
पण्डित आँख मीच क और मन्त्र पढ़न
लगगया | जाट नै सोची भी पंडित

कत्ती लूट क छोड़े गा |
इब के ने जाट ने गणेश जी की मूर्ति ठा क जेब में
रख
ली |
पंडित फेर बोल्या “ॐ गन गणपते
नमह |
201 रुपे दक्षिणा समर्पियामी ” धरो 201 रुपे
गणेश जी प अर
आँख
खोल क
देख्या; त गणेश जी गायब थे | पंडित
बोल्या –
चोधरी साहब ये गणेश जी कित गए
| जाट बोल्या – पंडित जी देश मे और
भी त ब्याह
सं
एकला मेरी बेटी काये थोडा स |
हो सके स किसे और के फेरां प चले
गए हों.

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आदमी ए आदमी का काटै इब रस्ता …
बिल्ली मेरे शहर की सब ठाली बैठी सैं ,

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छोटे छोटे चैक की लाल बुरशट , डार्क गरे पन्ट , पीटर इंग्लैंड की जर्सी , रेड चीफ के काले जूत्ते , क्लीन शेव , सुथरे पठे बाह क आज घर त लिकड़ा था डयूटी प। पर कोइसी भाईरोई न, ना त देख्या अर ना भाव दिए
फेर मन्ने सोच्या के कमी रह गी र
भीतर त आवाज आई दिल्ली म आ रया स खागड आड़े सकल भी भुंडी होणि चईये

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रस्ते कांट्यां भरे हों तो बाब्बु भाई यार दोस्त कोए साथ ना देता …
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ऐसे मोके पै अपणी चप्पल ए काम आवै …
हर बार इमोसनल होणा जरुरी है के

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मैथ टीचर ने एक बच्चे से सवाल पूछा :- मान लो तुम्हारी भैंस ने दूध नही दिया और तुम्हे घर आए मेहमानों को चाय पिलानी है तो क्या करोगे … ?

बच्चा बोला … जी बजार से दूध ले आंउगा …

टीचर ( मुस्कुराते हुए ) :- वैरी गुड , अच्छा मान लो घर की भैंस का दूध पड़ता है बियालिस रुपये किलो , और बजार से मिलता है साड्डे बावन रुपये किलो … तुमने दूध लिया डेढ़ पाव , और दूध वाले नें उसमें पैंसठ ग्राम पानी मिला रखा था … तो बताओ तुम्हे कुल कितना नुक्सान हुआ … ?

जवाब ना देने पर मास्टर ने उस बच्चे को धूप में मुर्गा बना दिया …

अब दूसरे छात्र से वही सवाल पूछा …

छात्र बोला जी अपणे ताऊ के घर तै दूध लिआऊंगा …

टीचर बोला :- मान लो उनके घर भी दूध नही है तो …

छात्र :- जी पड़ोस आली चाची तै दूध मांग लूंगा …

टीचर चिढ़ के :- अगर उनके घर भी ना मिला तो …

छात्र :- मास्टर जी सारे गाम मैं हांड जाउंगा दूध मांगण खातर , ना मिलया तो मेहमाना तै नींबू पाणी प्या दूंगा … पर बजार तै मोल कोनी ल्यांऊ … मन्नैं धूप मैं मुर्गा ना बणना ..

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