ताऊ मास्टर से -” मेरा छोरा
पढाई मै कैसा सै ?”
😎मास्टर -“चौधरी यू समझ ले,……
आर्यभट्ट ने जीरो की खोज इसके खातिर ही करी थी ।”

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जुल्मी चाचा …

पड़ोस आली भाब्भी की छोटी बेब्बे आरी है … छत्त पै चक्कर मारण लाग ग्या मैं … चाचा बोल्या रै उपर के करण जाए करै …

मखा चाच्चू टाटा स्काई सैट करण जाऊं था …

बोल्या … ड्रैसिंग सैंस सुधार ले कुरते पजामे पै टाई लाए तै टाटा स्काई सैट ना होए करदी …

Me … Crying in a कूण ..

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न्यू सोचूं था अक आज एक महान रचना लिखूंगा पेज के दोस्तां तंई …

की बोर्ड पै बैठ्या ए था , माँ की अवाज आई … रै जाइए मड़ा दानें पिसवा ल्या …

एरी माँ तेरे मड़े दानेयां के चक्कर मैं आज फेर दुनिया एक महान रचना पढ़ण तै चूकगी … 😏😏😏

हर महान रचनाकार की राह में रोड़े उसके परिवार वाले ही बिछाते हैं … सइ बात है … हुंह … एकबै फेर हुंह …

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मै तो इसे जाडे म्य नहाया मखा उसतै विडियो कालिंग करुंगा,
उस बैरण नै फोन काट दिया नू कह के अक मने शर्म आवे से.

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Me : भाई , प्यार हो गया मन्नै
:

Dost : भाई तू एड्रेस बोल ।

हम छोरी की जिंदगी बर्बाद नही होण दयांगे

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काल पहली बार एक फेसबुक फ्रैंड के साथ डेट पै जांऊ था … दोस्त बोल्या :- कॉन्फिडैंस तै बात करिए छोरी के स्यामी बौखला मत जइए …😊

मखा रै बाप तै मत सिखावै , ऐसी ऐसी छोरियां तो आंगली पै नचा दिया करूं मैं … 😎

10:30 AM Coffee shop …

वा आई अर स्यामी बैठदे ई बोली :- So today is your holiday … 😗

मखा yes yes is is … 😰

थोड़ा मुस्करा कै बोली :- ok what would you have tea , coffee or cold drink … 😗

मैं उखड़ती सांस काब्बू करदा बोल्या :- yes yes … same to you … thankyou … 😰😨

इसकी बेब्बै कै बाथरूम का बहाना करकै भाज आया ओढ़े तै … अपणे बस की ना ये डेट फेट

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( मेरी ये पोस्ट फिर एक बार )

थोडा़ हटके …कोई समझे तो …।

गोहत्या पाप है यां नही … गोमांस खाना चाहिए या नहीं …?
है तो जानवर ही … जब दूसरे जानवरों को खा सकते हैं तो गाय क्यों नहीं …??

गाय जानवर है कोई शक नहीं … लेकिन गाय का पाचन तंत्र कैसा है ये समझें , सब प्राणी भोजन के जहरीले तत्वों का विसर्जन मल मुत्र से करते हैं और पौष्टिक तत्वों से उनका शरीर – मांस हड्डीयां खून आदि बनते हैं …।
गाय एकमात्र ऐसा प्राणी है जो अपने भोजन के पोष्टिक तत्वों को मल मूत्र में विसर्जीत करती है … और जहरीले पदार्थों से उसका शरीर बनता है … गाय खाना मना इसीलिए किया जाता है क्योंकी जहरिले पदार्थों से बना इसका मांस भी जहरीला होता है , और इसे यदि कोई इन्सान खाता है तो ये उसके शरीर और बुद्धी के लिए हानिकारक होता है …जबकि गाय का मुत्र और गोबर भी शुद्ध होता … इसे पीपल के वृक्ष के साथ भी जोड़ कर देख सकते हैं , जो दूसरे वृक्षों के विपरीत चौबिसों धन्टे हवा से कार्बनडाइआक्साईड सोख के आक्सिजन छोड़ता है इसलिए पीपल की लकड़ी जलाना वातावरण और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है …।।
पुराने समय में शिक्षा की कमी के कारण सब चीजों को पाप और पुण्य से जोड़ दिया जाता था जो लोगों को जल्दी समझ आता था … लेकिन हिन्दू पुराणों में लिखी हर वो बात जिसे अन्धविश्वाश कहा जाता है सब का वैग्यानिक आधार है … इसलिए गोमांस पे लड़ने मरने की बजाए यदि तथ्यों से समझाया जाए तो मुझे नहीं लगता कोई गोमांस खाएगा … और ये हमारे तथाकथित धर्मरक्षक इस तरह से कभी नहीं समझाएंगे , क्योंकि इस मांस में उनकी रोटियां छिपी हैं …
तो … लड़ते रहो …।।।

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काम धंधे के चक्कर मैं घर तै बाहर जाणा पड़या पहली बार …

साउथ इंडिया मैं चेन्नई … ओढ़ै एक घर मैं पी जी सैट हो ग्या , दो चार दन तो उनके डोस्सा , उपमा साम्भर बड़ा , इडली ठीक लागे … फेर मन भर ग्या घर की रोटी याद आण लाग्गी ,

होटलां कान्नी चल दिया पर ना रोटी ढंग की अर ना सब्जी रुह सर की … हार माणनियां तो होए ना करते हरयाणा आले मखा रै रोटी मैं बणाउंगा रूम पै खुद …

कर लिआ सारा जुगाड़ अर बणाई आड्डी टेड्डी सी रोटी अर कच्ची पक्की सी दाल … जैसी बी थी घाल्या घी अर खाई … भाई बणी तो बात सी किम्मै पर वा माँ के हाथ का सुआद ना था …

दो तीन दन बाद हाथ तो चालण लाग गया रोटी सब्जी बणान मैं पर वा बात क्यों ना बणरी यार …

फेर के बांध लिआ परणा सर पै … लाल टोप्पी आले बाबा तै ले कै अर लाल चड्डी आले बाबा तक सारेआं के मसाले जो टीवी मैं देखे थे बरते … सब्जी चरचरी सी होजा थी पर वा बात ना ,

मिहनेंक पाच्छै रात साड्डे यांरा बजे रूम पै आया आलू गाजर मटर की सब्जी बणान लाग्या … ना तो लाल मिर्च ना मसाले सब किम्मै निमट रया था … बस थोड़ी हरी मिर्च अदरक लहसण पड़या था … चाल रै आज याए सइ … बणाई सब्जी रोटी अर पहली बुरकी मुंह मैं गेरिए थी माँ के हाथ बरगी सी लाग्गी …

मन्नै तड़कै माँ तै सारी कहानी बताई … माँ बोल्ली रै बेट्टा सुआद किसी बी औरत के हाथ मैं ना होता उसकी नीयत मैं हो सै वा स्वाद गैल्यां परिवार की सेहत का बी ख्याल राक्खै सै अर घणे तेल मसाले ना गेरदी वाए पोस्टिक सुआद मर्दां की जबान पै रच बस जा है … जिसनै थम्म परदेसां मैं याद करो अक माँ के हाथ का खाणा ,

मखा ए माँ मन्नै बी आ लिया थोड़ा थोड़ा माँ के हाथ का खाणा बणाना … बेसक टोह ले कोइ मेरे खात्तर जिसनै रोटी बणानी ना आंदी हो … मैं तो न्यू चांहू अक मेरे बालक याद करैं …

बाब्बू के हाथ का खाणा … 👍👍👍

Love you माँ …

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दुकान पै गया था अंडे लेण मखा कितने का एक है …

बैल्या भाई सात का …

मखा यार स्यामी दकाण आला तो पाँच का दे है …

चारौं कान्नी देख कै खड़या होकै मेरे कान मैं बोल्या …
भाई उसकी मुर्गी का करैक्टर खराब है …

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बाब्बू छोह मैं आ रया था बोल्या … उरै नै आ रै कुत्ते …

मैं पूरे स्वैग मैं … होर भांवे कुज वी करले बाब्बू पर गाल नी कड्डणी … 😎😎😎

अरै सुणजा … एक मिंट .. हाए रै … बात तो सुण … मर ग्याआआआ … देख सोरी … सोरी सोरीईईईई सुण तो ले … 😬😢😭

जिस बंदे की गाल काड्डण पै बैन लाण की सोचूं था … उसनै जुत्ता काड्ड लिआ … 😏😏

इसे इसे गाणया पै बी बैन लाओ मोदी साब

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दिल्ली की छोरी :- आपने किसी से प्यार किया है … 😗
हरयाणवी छोरा :- आहो मैडम घणा किया है जी … 😎
दिल्ली की छोरी :- WOW किससे … 😗

हरियाणवी छोरा :- घी बूरे तै … खाट्टू के साग अर बाजरे के रोट तै … घेवर तै … लास्सी तै … मक्खण तै … और बी घणी चीज हैं मैडम जी … 😎

दिल्ली की छोरी :- पागल हो क्या इनसे कौन प्यार करता है … 😗

हरियाणवी छोरा :- हाम करां हां मैडम जी , एकबै खा कै देख ल्यो आपनै बी हो जागा

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इंटरयू देण गया था इधर उधर के सवाल करकै वा बोल्या :- तो आपकी कोई कमजोरी भी है तो बताओ …

मखा जी मेरै पैग लाग रहा हो अर मेरे को कोए गंवार कैह दे तो मैं उसको साला बावली बूच बोल देता हूं जी …

बोल्या … ओह ये तो तुम सचमुच गंवारो वाली हरकत करते हो ,

मखा ओ साले बावली बूच अपणी लिमट मैं रै लिए …

फेर बेरा ना के होया सालेयां नै मेरा मुंह सूंघ सूंघ छेत्या मैं

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फोन मैं एक वाएरस साफ करण की ऐप थी उसपै दिन मैं दसियां मैसेज आए करते अक फोन हैंग होण तै बचाण तंइ फालतू ऐप डीलीट करो …
मन्नै वा ऐप ए डीलीट मार दी सुसरी … ईब ना हैंग होता फोन

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एक बणिये का आखरी बखत आ-ग्या ।
उसनै आवाज लगाई – बेटी लक्ष्मी !
वा बोल्ली – “हां बाबू !”
फिर उसनै आपणे छोरे को आवाज लगाई – बेटा कुबेर!
छोरा बोल्या – “हां बाबू!”
बणिया ने फिर आपणी घर-आळी खातिर रूका मारा- भागवान !
उसकी घर-आळी बोल्ली -“हां जी !”
बणियां बोल्या – अड़ मखा लुटवाओगे – तुम सारे हाड़ै बैठे सो,

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चौधरी से मेज़बान ने पूछा-
चौधरी जी क्या लेंगे आप, हलवा लाऊं या खीर??
चौधरी – घर में कटोरा एक ही है के??

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जिंदगी ना होई मोबाईल की लीड होगी … जितना बी सुलझा कै सो ले , तड़की उलझी पावै ,

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