happy – किमे ऐसी बात बता मेरी setting मन्ने छोड़ कै नही जावै….
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मैं (surbhi)- उसपै रपिए उधारे लेले

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बेट्टा :- मां आज ना बाब्बू कामआली तै बैडरूम मैं पोट्टी करण की कवै था …😩

बाब्बू के अपणी लुगाई के स्यामी तोत्ते से उड़गे बोल्या :- ओ हरामजादे मन्नै कद कई थी … 😡

बेट्टा :- आच्छया तूंए ना तड़की बैड पै पड़या पड़या उसतै बोल रया था मेरी जान वैलेनटांइन चल रया आजा हग दे ..

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बाब्बू का वाटर हीटर … 😅😅😅

तड़की बाब्बू लट्ठ लेकै खड़या होग्या अक आज तूं ठंडे पाणी गैल नहावैगा गात मैं फुर्ती आई रै सारा दन …

मखा बाब्बू रिस्तेदार बी बुलाले अंतिम किरया करम बी करणा पड़ सकै है …

बाब्बू नै वाए लट्ठ दिया कड़ मैं घुमा कै … बस फेर के उस लट्ठ की गरमी इतनी अत्याअधिक थी यारां नै पाणी की ठंडक महसूस ए ना होई .

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किस्मत_खराब है जो setting कोन्या होती,,

ना छोरा इतणा सरीफ हूँ ….बाथरूम का गेट_बंद करया पाछे बी….
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तोलिया_बांध के कच्छा_बदल्या करूँ

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न्यू कवैं मां बाप की इज्जत करो … औरतां की इज्जत करो … बढे बुड्ढयां की इज्जत करो … छोरियां की इज्जत करो …

अरै सबकी इज्जत करो तो … वा के कए करैं सुसरी बेज्जती किसकी करैं , हमनै तो रोटी बी ना बढिया लागती जब तक दन मैं दो चार की नासां मैं तै धुम्मा ना लिकाड़ दैं उनकी बेज्जती करकै …

यार हरीयाणवी सां हम …

एक हल है या किसे नै ना कही अक छोट्टेयां की इज्जत करो … इब कल तै जड़ै बी कोई छोट्टा दिख्खै उसकी गुद्दी पै बेमतलब रैप्टा मार द्यो … 😂😂

मजाक था भाई आग्गै थारी मरजी .

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इतणी महँगाई,,
अर उसमै तेरा न्युं भा खाणा,,
तेरी कसम भागवान,,
मरग्या यो गरीब बिचारा…!!

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मृत्यु क्या है … ???

बचपन मैं पड़़ोस आली लड़की दोस्त के स्यामी माँ के रैहप्टे खाणा है मृत्यू …

स्कूल मैं छोरियां के स्यामी मास्टर का मुर्गा बनाणा है मृत्यू …

नौकरी पै बॉस छोह मैं आ रया हो अर उस्से टैम चुतड़ां मैं खुजली होणा है मृत्यू …

ब्याह के बाद सालियां के बीच बैठ होए पाद लिकड़ जाणा है मृत्यू …

अर बुढ़ापे मैं बुढ़िया का “अपणा ख्याल राखिओ जी” बोल कै साथ छोड़ जाणा है मृत्यू .

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एक भाई एक तीस मंजिल बिल्डिंग की छत पै बैठ्या था …
जब्बे किसे नै आकै उसतै रुक्का दिया … औ परकासे तेरी बहू तेरे पड़ोसी राजबीर गैल्यां भाजगी …
दिल टूट ग्या माणस का अर घणी बेज्जती बी फील कर ग्या … बस दुख मैं उपर तै छाल मारदी ,
पच्चिसवीं मंजिल धौरै उसके ध्यान आई … अक मेरे पड़ोस मैं तो कोए राजबीर ना रैहता …
बीसवीं मंजिल पै दिमाग मैं आया अक रै मेरा तो ब्याह ए ना हो रया …
दसवीं मंजिल तक याद आया … ओ तेरी बेब्बे कै मेरा नाम तो सरेंदर है … या परकासा कौण है … ???
हट मेरे यार … तो मिसटर सरेंदर आपका समय समाप्त होता है … अब

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ताई- शादी हो गयी के बेटी तेरी??
छोरी- हां ताई।
ताई-छोरा के करा करें ??
छोरी- अफसोस

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आजकाल छोरी उस छोरे नै
‘हाय जानू,
हाय बेबी,
हाय हैडंसम’
कह कै बोलैै हैं
जिसनै हाम कदे लंडर कह कै बोल्या करते

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टीचर :- अपनी माँ की तारीफ मैं एक ऐस्से लिखो ,

छात्र :- सर दुनिया मैं वा स्याई ना बणी जो मेरी माँ के गुण लिख सकै …

टीचर :- ओह … तो बेट्टा बाब्बू के बारे मैं लिख दे कुछ ,

छात्र :- सर जी वा कागज इ ना है सृष्टी मैं जिसपै मेरे बाब्बू की महानता लिखी जा सकै …

मास्टर जी की आंख्यां मैं पाणी आ गया छोरे तै गले लाकै बोल्या :- वाह रै महान आत्मा मनैं गर्व है तेरे पै … बड़ा हो कै के बणैंगा …

महान आत्मा बोल्या :- जी मास्टर जी बड़ा होकै नेता बणूंगा अर बिना कुछ करे धरे न्युए बड़ी बड़ी बात करकै लोगां का फद्दू बणाउंगा अर ऐश करुंगा ..

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एक बुढे कै चार-पाँच छोरे,
बुढा मरणासन हो रया, आर वे पाँचु मेरे बटे
सकिम भिडाण लाग रे,
एक बोल्या ‘ रै बाबु मरेगा’
दुसरा बोल्या ‘हाँ भाई मरणन तै होए
रहया स’
तीसरा बोल्या ‘भाई गाँम कि च्याणी त
दुर पडेँगी इतणी दुर नही चालेगा, न्यु
कर ल्यागे ट्रेक्टर म ले चालागे।’
पहलडा बोल्या ‘आछ्या 100 रपये
लेगा ट्रेकटर आला’
दुसरा बोल्या ‘रे बुगी म ले चालागे’
एक बोल्या ‘तेरा झकोई 70
लेगा बुगी आला भी’
चौथा बोल्या ‘रे न्यु कर लियो साईकल क
गेल न सिढी बांध क उसप लुटा लियो’
इब बुढा खाट म पडया पडया सुणन
लाग रया था, उसन देख लिया तेरी खराब
माटी करैगे, कोए कोए साँस आवै था, उसने
जोड के साँस आर मार कै हँगा, होकै
बैठया बोल्या ‘रे मैरी जुती दे दयो, मैँ पैदल
ए डिगर ज्यांगा’

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दिल्ली में प्रदूषण का कारण हरियाणा के जाट सं
जो हुक्के का धुमा दिल्ली कण मुंह करके छोड़े सं

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ताऊ दारू पीकै आवै था आगे तै कुत्ता पड़ ग्या …
ताऊ नैं सैड़ देणी अपणा पजामा पाड़ दिया
मखा ताऊ या के करी
बोल्या उसनै बी तो पाड़नाए था

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एक मॉडर्न छोरी बोल्ली मैं आज की छोरी हूं कुछ बी कह दे मन्नै छौह ना आता …
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मन्नै उस्तै बेब्बे कैह दिया

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अर आज मेरी एक बहन और है अर वा मन्नै सगे भाई जैसा समझै अर मैं धन हो गया … नजरिया है लड़कियों की तरफ देखने का कभी भी बहन गर्ल फ्रैंड से ज्यादा प्यारी होती है क्योंके उसके प्यार में छल नही होता … और जीवन साथी एक होता है एक ही होना चाहिए … भाई बहन हमें जितने हो सकें बनाने चाहिए

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पूनम : कोई आवाज दे है बाहर गेट पै , देखियो ।
अनिल : कौण है ?
पूनम : मैं ना पिछाणती
अनिल : अच्छा , रुकण की कह , मैं आऊं हुँ बाहर नै ।
एक तै इस घर मैं कुछ मिलता नी बख्त पै , मेरी घड़ी कित गई इब ?
किसे काम की नहीं या लुगाई , कोय चीज ठिकाणे पै नी पाती , बेरा ना के करती रह है सारे दिन बैठ्ठी बैठ्ठी ।
किस्मत फूट गी मेरी जो या पल्लै पड़ी ।
पूनम : तू पहल्या कोस ले अपणी किस्मत नै जी भर कै, तन्नै तो ज्युकर जीवन सफल कर दिया मेरा , तन्नै पा कै तो सारी इच्छा पूरी होगी मेरी ।
मौका मिलते ए जहर काढण लाग ज्या अपणा , कदे मिठास भी आया है इस जबान पै मेरे नाम का ??
इतणे मैं दुबारा किवाड़ खुड़कै है …..
अनिल : आऊं हूँ , आऊं हूँ , शांति राख ।
“नारंगी पीला सूट पहरे एक सुथरा सा चेहरा, जमीन मैं नजर ग़ाड्डे खड़ा था ।
ज्युकर कुछ छिन ग्या हो उसका”
अनिल : जी बोलो ,
पिछाणे नी आप !!
“उसकी आंख ईब भी जमीन पै थी, ज्युकर कुछ
उकेरणा चाहती हो, उस संगमरमर के धोले फर्श पै ।”
ब्होत हिम्मत जुटा कै वा उप्पर लखाई ।
अनिल : सुमन तू !!
“इस बोल के पाछै जो सन्नाटा ब्यखरा , उसकी चीख मैं , वे सारे ‘घा’ जो भर कै , नई खाल मैं ढल गे थे, एक बार फेर हरे हो गे ।”
” वो घर का गेट एक सीमा रेखा मैं बदलग्या ।”
“एक पासै रिवाजां की रस्सी तै गांठ मार कै गला घोंटी होई गृहस्थी थी और दूसरे पासै बख्त अर झूठे अहंकार की मार खाया होया प्यार।”
“बसी होई गृहस्थी मैं अलगाव का विलाप था अर उजड़े होए , दीमक के खाए होए प्यार मैं सुकून।”
“करुणा तै एक जीसी थी दोनूं पासै , बस बख्त सही ना था।”
“दिल के स्वार्थ नै गृहस्थी के किवाड़ लात मार कै बंद कर दिए थे ।”
अहमद फ़राज़ साहब की ग़ज़ल का यो शेर ब्होत सही लागै है आडै :
” रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ …
तू फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ “

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