स्टोर रूम की सफाई करदी हाण जब लास्ट लकड़ी का बक्सा ठाओ तो कूण मैं तै एक मुस्सी लिक्ड़ कै भाज्या करै …
आजकल ऐसे ऐसे बालक बी फेसबुक पै शेर बणे हांडैं हैं ..
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स्टोर रूम की सफाई करदी हाण जब लास्ट लकड़ी का बक्सा ठाओ तो कूण मैं तै एक मुस्सी लिक्ड़ कै भाज्या करै …
आजकल ऐसे ऐसे बालक बी फेसबुक पै शेर बणे हांडैं हैं ..
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काम धंधे के चक्कर मैं घर तै बाहर जाणा पड़या पहली बार …
साउथ इंडिया मैं चेन्नई … ओढ़ै एक घर मैं पी जी सैट हो ग्या , दो चार दन तो उनके डोस्सा , उपमा साम्भर बड़ा , इडली ठीक लागे … फेर मन भर ग्या घर की रोटी याद आण लाग्गी ,
होटलां कान्नी चल दिया पर ना रोटी ढंग की अर ना सब्जी रुह सर की … हार माणनियां तो होए ना करते हरयाणा आले मखा रै रोटी मैं बणाउंगा रूम पै खुद …
कर लिआ सारा जुगाड़ अर बणाई आड्डी टेड्डी सी रोटी अर कच्ची पक्की सी दाल … जैसी बी थी घाल्या घी अर खाई … भाई बणी तो बात सी किम्मै पर वा माँ के हाथ का सुआद ना था …
दो तीन दन बाद हाथ तो चालण लाग गया रोटी सब्जी बणान मैं पर वा बात क्यों ना बणरी यार …
फेर के बांध लिआ परणा सर पै … लाल टोप्पी आले बाबा तै ले कै अर लाल चड्डी आले बाबा तक सारेआं के मसाले जो टीवी मैं देखे थे बरते … सब्जी चरचरी सी होजा थी पर वा बात ना ,
मिहनेंक पाच्छै रात साड्डे यांरा बजे रूम पै आया आलू गाजर मटर की सब्जी बणान लाग्या … ना तो लाल मिर्च ना मसाले सब किम्मै निमट रया था … बस थोड़ी हरी मिर्च अदरक लहसण पड़या था … चाल रै आज याए सइ … बणाई सब्जी रोटी अर पहली बुरकी मुंह मैं गेरिए थी माँ के हाथ बरगी सी लाग्गी …
मन्नै तड़कै माँ तै सारी कहानी बताई … माँ बोल्ली रै बेट्टा सुआद किसी बी औरत के हाथ मैं ना होता उसकी नीयत मैं हो सै वा स्वाद गैल्यां परिवार की सेहत का बी ख्याल राक्खै सै अर घणे तेल मसाले ना गेरदी वाए पोस्टिक सुआद मर्दां की जबान पै रच बस जा है … जिसनै थम्म परदेसां मैं याद करो अक माँ के हाथ का खाणा ,
मखा ए माँ मन्नै बी आ लिया थोड़ा थोड़ा माँ के हाथ का खाणा बणाना … बेसक टोह ले कोइ मेरे खात्तर जिसनै रोटी बणानी ना आंदी हो … मैं तो न्यू चांहू अक मेरे बालक याद करैं …
बाब्बू के हाथ का खाणा … 👍👍👍
Love you माँ …
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हाय हाय रे मजबूरी …
या जाड्डा अर या दूरी ,
मन्नै कसम आज या खाई …
मेरा ब्याह जब तक ना हो जाता …
मैं ओढूंगा दो रजाई …
थम के सोच्चो थे अक मैं अपणा स्मयंवर रचण आला हूं तड़की … छोरेयां का ना होता याaaaर 😏😏
पर भाई क्लेश आला काम हो ग्या … कसम तो खा बैठया रै पतंदर गरमियां मैं के करैगा …
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एक जाट की छोरी के ब्याह मैं फेरे
होण लाग रे
थे |
पण्डितआँख मींच क मंतर पढ़ क
बोल्या “ॐ गन गणपते नमह |
51 रुपे दक्षिणा समर्पियामी ”
नु कह क जाट त बोल्या धर 51 रुपे
गणेश जी प
| जाट ने 51 रुपे धर दिए |
फेर आँख मीच क और मन्त्र पढ़न लगगया |
थोड़ी हान पाछे फेर बोल्या “ॐ गन
गणपते
नमह |
101 रुपे दक्षिणा समर्पियामी ”
धरो 101 रुपे गणेश
जी प |
जाट ने 101 रुपे धर दिए | फेर आँख
मीच क और
मन्त्र पढ़न लगगया |
थोड़ी हान पाछे फेर बोल्या “ॐ गन गणपते
नमह |
151 रुपे दक्षिणा समर्पियामी ”
धरो 151 रुपे
गणेश
जी प | जाट ने 151 रुपे फेर धर दिए |
पण्डित आँख मीच क और मन्त्र पढ़न
लगगया | जाट नै सोची भी पंडित
त
कत्ती लूट क छोड़े गा |
इब के ने जाट ने गणेश जी की मूर्ति ठा क जेब में
रख
ली |
पंडित फेर बोल्या “ॐ गन गणपते
नमह |
201 रुपे दक्षिणा समर्पियामी ” धरो 201 रुपे
गणेश जी प अर
आँख
खोल क
देख्या; त गणेश जी गायब थे | पंडित
बोल्या –
चोधरी साहब ये गणेश जी कित गए
| जाट बोल्या – पंडित जी देश मे और
भी त ब्याह
सं
एकला मेरी बेटी काये थोडा स |
हो सके स किसे और के फेरां प चले
गए हों.
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किसी हरियाणवी तै कदे उल्टा सवाल ना करणा चइए …
मैडिकल स्टोर पै जाकै एक हरियाणवी बोल्या :- भाई मुस्से मारण की दवाई दिए …
स्टोर आला :- घर ले जाओगे … ?
हरियाणवी :- ना गैल ले कै आ रया हूं आढ़िए खुआदे … अर मेरे तंइ चाय बोलदे जाड्डा हो रया है घणा ..
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*टेम आण दै मोदी*
*तनै प्रधानमंत्री की कुर्सी न्यू: याद आवेगी*
ज्युकर सिरसा आले बाबे ने हनीप्रीत याद आवै
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पांच दस साल की सजा तो सलमान क्यूकरे भुगत लेता कोए फरक ना पड़ता …
पर या दस हजार का जुर्माना … मजा आ गया …
बाप की जमीन बेच यां किडनी … बेट्टा ये तो भरने पडैंगे … और मार हिरण वा बी काला
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न्यू सोचूं था अक आज एक महान रचना लिखूंगा पेज के दोस्तां तंई …
की बोर्ड पै बैठ्या ए था , माँ की अवाज आई … रै जाइए मड़ा दानें पिसवा ल्या …
एरी माँ तेरे मड़े दानेयां के चक्कर मैं आज फेर दुनिया एक महान रचना पढ़ण तै चूकगी … 😏😏😏
हर महान रचनाकार की राह में रोड़े उसके परिवार वाले ही बिछाते हैं … सइ बात है … हुंह … एकबै फेर हुंह …
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काल तूफान ढंग तै ना आया ,
मखा भागवान चाल तन्नैं इस्से खुशी मैं बाहर बढ़िया डिनर करवा कै ल्याऊं … डेड़ घंटा लाकै तयार होई बचारी अर आठ बजरे थे …
बोली चलो जी मैं तयार हूं हंजी … 😗
मैं बोल्या यार कुछ मूढ़ ना हो रया बाहर जाण का घर मैं बणा ले नैं किम्मै …
तूफान आना चइए मतबल आना चइए … आ ग्या
बैड तलै बड़ रया हूं तूफान तै बचण तंइ
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दो आदमियों की बीवीयाँ मेले में खो गईं।
:
जिसमे से एक हरियाणा से था, और एक दिल्ली से।
:
अपनी – अपनी बीवी ढूंढते हुए वो आपस में मिले।
:
हरियाणा वाले ने दिल्ली वाले से पूछा..? तुम्हारी बीवी की पहचान क्या है..?
:
दिल्ली वाला बोला -> कद 5’7″, गोरी, भूरी आँखें और पतली है, स्लीवलेस पिंक टी-शर्ट और लाल मिनी स्कर्ट पहने है।
:
तुम्हारी बीवी की क्या पहचान है..?
:
हरियाणा वाला -> मेरे आली कै मार गोली, चाल तेरे वाली को ढूंढते है।
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पत्नी हरियाणा पुलिस से- जी म्हारा
घरवाला 5 दिन पेहला गोभी लेन
गया था इब तक कोणी आया
हरियाणा पुलिस- फेर के होया,
कोई और सब्जी बना ले, जरुरी है
गोभी बनानी .
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आज मैं सोनीपत जा रया था, उड़ै मन्नै एक गरीब आदमी मिल्या, मन्नै उस्तै आपणा फ़ोन, सोने की चैन अर बटुआ में जो 5-7 हज़ार रपिये पड़े थे, सब दान कर दिए..
वो आदमी भोत खुश होया
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अर उसनै पिस्तौल उल्टी ए आपणी गोझ में घाल ली
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आज पेपर था ग्रामीण बैंक का, बाहर चैकिंग करण आळा नै भीतर ना बड़ण दिया, मराबटा न्यूं बोल्या तेरी आधार कार्ड की फ़ोटो ना मिलती, भूंडी फ़ोटो है……. मखा आधार कार्ड में कोए भी टॉम क्रूज ना लाग्या करता…. ना मान्या मेरा सुसरा…. मखा जाऊं सूँ, याद राखिए भूखा मैं भी नहीं मरूं, हिसार के जाट कॉलेज आगै गोल गप्प्यां की रेहड़ी लाऊंगा अर तेरी छोरी मेरे ए धोरै आया करैगी पाणी के पतासे खाण 😜
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खैर… घरां आया अर आकै अलमारी खोली जिसमें मेरे आज तक के भरे होड़ सारे फॉर्म थे..IIT तै लेकै MTS तक, कैलकुलेटर लेकै हिसाब लगाया तो बेरा पाट्या इन फार्मां कै पाछै घणे रपिये फूक दिए, इतणे में एक Bullet आ जाती अर विडम्बना देखो…. ईब साली नौकरी की उम्र भी जा ली 😂😂
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एक भाई एक तीस मंजिल बिल्डिंग की छत पै बैठ्या था …
जब्बे किसे नै आकै उसतै रुक्का दिया … औ परकासे तेरी बहू तेरे पड़ोसी राजबीर गैल्यां भाजगी …
दिल टूट ग्या माणस का अर घणी बेज्जती बी फील कर ग्या … बस दुख मैं उपर तै छाल मारदी ,
पच्चिसवीं मंजिल धौरै उसके ध्यान आई … अक मेरे पड़ोस मैं तो कोए राजबीर ना रैहता …
बीसवीं मंजिल पै दिमाग मैं आया अक रै मेरा तो ब्याह ए ना हो रया …
दसवीं मंजिल तक याद आया … ओ तेरी बेब्बे कै मेरा नाम तो सरेंदर है … या परकासा कौण है … ???
हट मेरे यार … तो मिसटर सरेंदर आपका समय समाप्त होता है … अब
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जिंदगी ना होई मोबाईल की लीड होगी … जितना बी सुलझा कै सो ले , तड़की उलझी पावै ,
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बुलेट ट्रेन तो उन देशों के लिए बनी है जहां समय की कमी हो।
हमारे देश मे तो अगर कहीं JCB लगी हो तो आधा गांव उसे देखने चला जाता है।
ड्राइवर बैक कर रहा हो तो 15 आदमी ‘आण दे आण दे’ में लगे रहते हैं।
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