ताई- शादी हो गयी के बेटी तेरी??
छोरी- हां ताई।
ताई-छोरा के करा करें ??
छोरी- अफसोस
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ताई- शादी हो गयी के बेटी तेरी??
छोरी- हां ताई।
ताई-छोरा के करा करें ??
छोरी- अफसोस
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न्यू सोचूं था अक आज एक महान रचना लिखूंगा पेज के दोस्तां तंई …
की बोर्ड पै बैठ्या ए था , माँ की अवाज आई … रै जाइए मड़ा दानें पिसवा ल्या …
एरी माँ तेरे मड़े दानेयां के चक्कर मैं आज फेर दुनिया एक महान रचना पढ़ण तै चूकगी … 😏😏😏
हर महान रचनाकार की राह में रोड़े उसके परिवार वाले ही बिछाते हैं … सइ बात है … हुंह … एकबै फेर हुंह …
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पत्नी हरियाणा पुलिस से- जी म्हारा
घरवाला 5 दिन पेहला गोभी लेन
गया था इब तक कोणी आया
हरियाणा पुलिस- फेर के होया,
कोई और सब्जी बना ले, जरुरी है
गोभी बनानी .
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बस मैं बैठ्या था घणी भीड़ थी एक सुथरी छोरी खड़ी देख कै ना डट्या गया बोल्या :- मैं तन्नै अपणी सीट दे दूं पर तूं सोच्चैगी मैं तन्नै सैट करण की कौशिश करुं हूं ,
बोली ना तो मैं तो ना सोच्चूं ऐसा … 😗
मखा रैहण दे फेर खड़ी रै ..
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किलकी पाटी थी उसकै गाम म
जब मने उसका हाथ थाम्या था
इब अपणी के बात करू
मेरी माँ न सुथरा ए इतना जाम्या था
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फोन करकै बोली :- मेला बाबू तंहा है … 😗
मखा थाने आया हूं … 😏
बोली … ओooo मेले बाबू को भुक्खू लगी थाना था लहा है … 😗
मखा ओ भूरी चमगादड़ बाइक एक्सिंडैंट हो गया था पुलिस आले ठा ल्याए मन्नै थाने … समझगी तोतली मकौड़ी … 😡
बोली … ओooo मेला बाबू नलाज हो दया … छोooली … 😗😗😗
धणे फरी टैम मैं बणाई थी राम नैं या आइटम मेरे तंई
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एक मॉडर्न छोरी बोल्ली मैं आज की छोरी हूं कुछ बी कह दे मन्नै छौह ना आता …
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मन्नै उस्तै बेब्बे कैह दिया
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अर आज मेरी एक बहन और है अर वा मन्नै सगे भाई जैसा समझै अर मैं धन हो गया … नजरिया है लड़कियों की तरफ देखने का कभी भी बहन गर्ल फ्रैंड से ज्यादा प्यारी होती है क्योंके उसके प्यार में छल नही होता … और जीवन साथी एक होता है एक ही होना चाहिए … भाई बहन हमें जितने हो सकें बनाने चाहिए
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एक भाई एक तीस मंजिल बिल्डिंग की छत पै बैठ्या था …
जब्बे किसे नै आकै उसतै रुक्का दिया … औ परकासे तेरी बहू तेरे पड़ोसी राजबीर गैल्यां भाजगी …
दिल टूट ग्या माणस का अर घणी बेज्जती बी फील कर ग्या … बस दुख मैं उपर तै छाल मारदी ,
पच्चिसवीं मंजिल धौरै उसके ध्यान आई … अक मेरे पड़ोस मैं तो कोए राजबीर ना रैहता …
बीसवीं मंजिल पै दिमाग मैं आया अक रै मेरा तो ब्याह ए ना हो रया …
दसवीं मंजिल तक याद आया … ओ तेरी बेब्बे कै मेरा नाम तो सरेंदर है … या परकासा कौण है … ???
हट मेरे यार … तो मिसटर सरेंदर आपका समय समाप्त होता है … अब
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सुबह से लेके शाम तक …
शाम से लेके रात तक …
रात से फिर सुबह तक …
सुबह से फिर रात तक
फोन पै मंडया रवै … भाई यां तो तूं कुंवारा है यां तेरी लुगाई गैल्यां ना बणदी .
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बाब्बू छोह मैं आ रया था बोल्या … उरै नै आ रै कुत्ते …
मैं पूरे स्वैग मैं … होर भांवे कुज वी करले बाब्बू पर गाल नी कड्डणी … 😎😎😎
अरै सुणजा … एक मिंट .. हाए रै … बात तो सुण … मर ग्याआआआ … देख सोरी … सोरी सोरीईईईई सुण तो ले … 😬😢😭
जिस बंदे की गाल काड्डण पै बैन लाण की सोचूं था … उसनै जुत्ता काड्ड लिआ … 😏😏
इसे इसे गाणया पै बी बैन लाओ मोदी साब
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आजकाल छोरी उस छोरे नै
‘हाय जानू,
हाय बेबी,
हाय हैडंसम’
कह कै बोलैै हैं
जिसनै हाम कदे लंडर कह कै बोल्या करते
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एक हरियाणा आले आदमी की कार के पीछे लिखी सुंदर लाइन 🚘
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देख के ओवरटेक करें
गाड़ी म लठ भी धरें हैं
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जुल्मी चाचा …
पड़ोस आली भाब्भी की छोटी बेब्बे आरी है … छत्त पै चक्कर मारण लाग ग्या मैं … चाचा बोल्या रै उपर के करण जाए करै …
मखा चाच्चू टाटा स्काई सैट करण जाऊं था …
बोल्या … ड्रैसिंग सैंस सुधार ले कुरते पजामे पै टाई लाए तै टाटा स्काई सैट ना होए करदी …
Me … Crying in a कूण ..
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मेरे आली नै होम्योपैथी का कोरस कर राख्या दिखै …
कदे कि मिट्ठी गोली दिए जारी ,
लास्ट मैं न्यु ना कैह दे अक तेरा रोग मेरे बस का ना है किते और रैफर होजा ..
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पूनम : कोई आवाज दे है बाहर गेट पै , देखियो ।
अनिल : कौण है ?
पूनम : मैं ना पिछाणती
अनिल : अच्छा , रुकण की कह , मैं आऊं हुँ बाहर नै ।
एक तै इस घर मैं कुछ मिलता नी बख्त पै , मेरी घड़ी कित गई इब ?
किसे काम की नहीं या लुगाई , कोय चीज ठिकाणे पै नी पाती , बेरा ना के करती रह है सारे दिन बैठ्ठी बैठ्ठी ।
किस्मत फूट गी मेरी जो या पल्लै पड़ी ।
पूनम : तू पहल्या कोस ले अपणी किस्मत नै जी भर कै, तन्नै तो ज्युकर जीवन सफल कर दिया मेरा , तन्नै पा कै तो सारी इच्छा पूरी होगी मेरी ।
मौका मिलते ए जहर काढण लाग ज्या अपणा , कदे मिठास भी आया है इस जबान पै मेरे नाम का ??
इतणे मैं दुबारा किवाड़ खुड़कै है …..
अनिल : आऊं हूँ , आऊं हूँ , शांति राख ।
“नारंगी पीला सूट पहरे एक सुथरा सा चेहरा, जमीन मैं नजर ग़ाड्डे खड़ा था ।
ज्युकर कुछ छिन ग्या हो उसका”
अनिल : जी बोलो ,
पिछाणे नी आप !!
“उसकी आंख ईब भी जमीन पै थी, ज्युकर कुछ
उकेरणा चाहती हो, उस संगमरमर के धोले फर्श पै ।”
ब्होत हिम्मत जुटा कै वा उप्पर लखाई ।
अनिल : सुमन तू !!
“इस बोल के पाछै जो सन्नाटा ब्यखरा , उसकी चीख मैं , वे सारे ‘घा’ जो भर कै , नई खाल मैं ढल गे थे, एक बार फेर हरे हो गे ।”
” वो घर का गेट एक सीमा रेखा मैं बदलग्या ।”
“एक पासै रिवाजां की रस्सी तै गांठ मार कै गला घोंटी होई गृहस्थी थी और दूसरे पासै बख्त अर झूठे अहंकार की मार खाया होया प्यार।”
“बसी होई गृहस्थी मैं अलगाव का विलाप था अर उजड़े होए , दीमक के खाए होए प्यार मैं सुकून।”
“करुणा तै एक जीसी थी दोनूं पासै , बस बख्त सही ना था।”
“दिल के स्वार्थ नै गृहस्थी के किवाड़ लात मार कै बंद कर दिए थे ।”
अहमद फ़राज़ साहब की ग़ज़ल का यो शेर ब्होत सही लागै है आडै :
” रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ …
तू फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ “
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क्या आप जानते हैं …
चमगाद्दड़ ( सचमुच आली मेरी गर्लफ्रैंड ना 😂 ) लगभग अंधी होए करै … पर उड़दे होए उसका कदे ऐक्सिडैंट ना होंदा …
क्यों … ???
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