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Preet Singh ( View Profile )

एक बै एक गादडी के पाछे दो कुत्ते लाग रे थे। वा भाज कै एक दूसरे गादड के बिल में बड गई। गादड बडा मसखरा था। वो आपणी बहू तै बोल्या “पुछिये ­ बहू नै क्यूं तंग पा री सै..?”
गादडी बोल्ली “म्हारै ­ छोरी के बटेऊ आरे सै अर आजै ले जाण की जिद कररे सैं।”
गादड छो में भर कै बोल्या “मैं देखूं सूं उन्हें जा कै।”
अकड में गादड ने बिल तै मुंह बाहर काढा तै दोनूं कुत्तां नै उसके दोनूं कान पकड लिये। गादड झटका मार कै उलटा ए बिल में बड ग्या। पर कान कुत्तां के मुंह में ही रह गये। भीतर दूसरी गादडी ने गादड की बहू तै कहा, “पूछिये री मेरे पितसरे के कानां कै के होग्या….?”
गीदड बोल्या “बटेऊ तै घणें ऊंत सैं। वैं छोरी के धोखें में मन्नै ए ट्राली में गेर के ले जावैं थे। बडी मुश्किल तै पिंडा छुड़ा कै आया सूं…!!



Language » Haryanvi






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