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Preet Singh ( View Profile )

काल मैं बस में सफर करु था..
मेरे साइड आली सीट प एक छोरा अर छोरी बैठे थे।
दोनों एक दूसरे ताइं अजनबी थे।
थोड़े टेम बाद वे आपस में बात करण लाग्गे।
बातचीत उस मुकाम तक पहुँचगी जीत मोबाइल नंबर का आदान प्रदान होया करे
छोरे का फोन बेरा ना क्यूं ऑफ था।
फेर छोरे ने अपनी जेब म त एक कागज लिकाड़ा, लेकिन लिखने के लिए उसपे पेन कोनी था।
अर मैं जब्बे समझ गया कि, उसने मोबाइल नंबर लिखण ताई पेन की जरूत स।
उसने बड़ी आशा से मेरी कहन देख्या।
मैंने अपनी शर्ट के ऊपरी जेब में टांग्या होड पेन लिकाडा
अर चालती बस त बाहर फेंक दिया।
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“…ना खाऊँगा, ना खाण दूँगा..।।”



Language » Haryanvi






"1" Comment
  1. Good morning

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