मंज़िलों तक पहुँचने का जब रास्ता मिलेगा मुझे
अंजानों का चेहरा भी तब, हसता मिलेगा मुझे।
.
माना की ज़रा महँगे हैं अब दो पल भी लोगों के
ऊँचाइयों पर अच्छा अच्छा सस्ता मिलेगा मुझे।
Related Posts
लिखा था जनता का, जनता को, जनता के लिये, संविधान में। पर आज लुट रही, जनता, जनता से, जनता के Continue Reading..
अच्छा, बुरा और बुरा, अच्छा लगने लगता है। पहले देखेगा कौन? बदल तो सही अपना द्रष्टिकोण। सोचेगा कौन? जो रहेगा Continue Reading..
*स्वर्ग का सपना छोड़ दो*, *नर्क का डर छोड़ दो* , *कौन जाने क्या पाप ,* *क्या पुण्य* , *बस…………* Continue Reading..
बैठे बैठे ज़िन्दगी बरबाद ना की जिए, ज़िन्दगी मिलती है कुछ कर दिखाने के लिए, रोके अगर आसमान हमारे रस्ते Continue Reading..
Hum bachpan main pensil istemal karte the par ab pen istemal karte hai pata hai kyu kyun ki bachpan me Continue Reading..
यदि कोई व्यक्ति आपको ग़ुस्सा दिलाने में कामयाब रहता है तो… समझ लीजिए आप उसके हाथ की कठपुतली हैं…!
जिंदगी मैं कितना भी समेट लो.. मगर हाथों से फिसलता ज़रूर है.. ये वक्त है साहब.. एक ना एक बदलता Continue Reading..
एक पार्क मे दो बुजुर्ग बातें कर रहे थे…. पहला :- मेरी एक पोती है, शादी के लायक है… MA Continue Reading..