इसे कहते हैं अर्थ का अनर्थ होना ÷
सुबह नहा के छत पर कच्छा टांगने गया तो
पडोसन भी अपनी सलवार टांगते हुए बोली
बारिश आने वाली है जब अपना कच्छा उतारे तो मेरी
भी सलवार उतार देना।
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